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देश की पहली सूक्ष्म सिंचाई परियोजना से साकार होगा हर खेत को पानी का सपना
Updated Thu, 27 Jul 2017 11:31 PM IST
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साकार होगा हर खेत को पानी का सपना
देश की पहली सूक्ष्म सिंचाई परियोजना से किसानों को होगा लाभ
-30 जुलाई को सीएम पिहोवा से करेंगे सूक्ष्म सिंचाई योजना के पायलट प्रोजेक्ट का शुभारंभ
24 करोड़ 65 लाख का बजट खर्च होगा परियोजना पर
-13 जिलों के 15 गांव को होगा फायदा
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
स्वर्ण जयंती वर्ष पर राज्य सरकार प्रदेश के किसानों को करीब 25 करोड़ की लागत से सूक्ष्म सिंचाई के पायलट प्रोजेक्ट की सौगात देने जा रही है। इस प्रोजेक्ट पर 24 करोड़ 65 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका 13 जिलों और 15 गांवों के लाखों किसानों का फायदा मिलेगा। अहम पहलू यह है कि इस प्लांट में सौर ऊर्जा पैनलों से पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली नजदीकी पॉवर सब-स्टेशन में भेजी जाएगी, जो 24 घंटे प्लांट के साथ 11 केवी लाइन के साथ जुड़ा रहेगा। इस परियोजना का शुभारंभ मुख्यमंत्री मनोहर लाल 30 जुलाई को पिहोवा के गांव गुमथला गढ़ु डेरा फतेह सिंह में करेंगे।
चीफ इंजीनियर राजीव बंसल व एक्सईएन नीरज शर्मा की देखरेख में सूक्ष्म सिंचाई योजना के पायलट प्रोजेक्ट के कार्य को पूरा किया गया है। इस परियोजना की आधारशिला भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पिहोवा में रखी थी। शर्मा ने बताया कि हर खेत तक पानी पहुंचाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत काडा हरियाणा की ओर से सूक्ष्म सिंचाई योजना के पायलट प्रोजेक्ट को स्थापित किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कोई भी बारह मासी नदी नहीं है और दो तिहाई हिस्से में भूमिगत जल का स्तर खारा है। इसके कारण जल की खपत में प्रत्येक वर्ष अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है जबकि उपलब्ध जल की मात्रा सीमित है।
इस योजना से सूक्ष्म सिंचाई के लिए किसानों को प्रेशर के साथ नहरी पानी मिलेगा और इस पानी को टपका सिंचाई व फव्वारा सिंचाई विधि के जरिये प्रयोग में लाया जा सकेगा। इससे पानी की खपत में कमी आएगी और ज्यादा से ज्यादा किसानों को पानी मिल पाएगा। इससे सरकार के हर खेत को पानी के लक्ष्य को साकार किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि यह देश की अपनी किस्म की पहली योजना है।
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प्रथम चरण में परियोजना के साथ जुड़ेंगे 13 जिले
सूक्ष्म सिंचाई पायलट परियोजना प्रथम चरण में प्रदेश के 13 जिलों में शुरू की जाएगी। इनमें अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, हिसार, झज्जर, भिवानी, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, सिरसा, सोनीपत, पानीपत, जींद जिले शामिल है, के साथ-साथ 15 गांव को भी शामिल किया जाएगा।
परियोजना के लिए बिछेगी एचडीपीआई पाइप लाइन
इस परियोजना में कुल सिंचित नहरी क्षेत्र 1972.49 हेक्टेयर को शामिल किया गया है और करीब 5 लाख 50 हजार फीट एचडीपीआई पाइपलाइन बिछाई जाएगी और इसका डिस्चार्ज 15.86 क्युसिक होगा।
यह है टपका व फव्वारा सिंचाई के फायदे
सिंचाई की इस विधि से जल उपयोगिता दक्षता 80 प्रतिशत तक होती है जबकि पारंपरिक सिंचाई की दक्षता 40 प्रतिशत है। इस विधि में जल के साथ-साथ उर्वरकों की अनावश्यक बर्बादी को रोका जा सकता है, जल की कमी वाले क्षेत्रों के लिए विधि लाभदायक है, जल का भूमिगत रिसाव व कटाव नहीं होगा, अच्छी फसल विकास के लिए आदर्श मृदा नमी स्तर प्रदान करती है, खरपतवार नियंत्रण के लिए लाभदायक है। फसलों की पैदावार 150 प्रतिशत बढ़ेगी और इन सिंचाई विधियों से ऊर्जा की भी बचत होगी।
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साकार होगा हर खेत को पानी का सपना
देश की पहली सूक्ष्म सिंचाई परियोजना से किसानों को होगा लाभ
-30 जुलाई को सीएम पिहोवा से करेंगे सूक्ष्म सिंचाई योजना के पायलट प्रोजेक्ट का शुभारंभ
24 करोड़ 65 लाख का बजट खर्च होगा परियोजना पर
-13 जिलों के 15 गांव को होगा फायदा
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
स्वर्ण जयंती वर्ष पर राज्य सरकार प्रदेश के किसानों को करीब 25 करोड़ की लागत से सूक्ष्म सिंचाई के पायलट प्रोजेक्ट की सौगात देने जा रही है। इस प्रोजेक्ट पर 24 करोड़ 65 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका 13 जिलों और 15 गांवों के लाखों किसानों का फायदा मिलेगा। अहम पहलू यह है कि इस प्लांट में सौर ऊर्जा पैनलों से पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली नजदीकी पॉवर सब-स्टेशन में भेजी जाएगी, जो 24 घंटे प्लांट के साथ 11 केवी लाइन के साथ जुड़ा रहेगा। इस परियोजना का शुभारंभ मुख्यमंत्री मनोहर लाल 30 जुलाई को पिहोवा के गांव गुमथला गढ़ु डेरा फतेह सिंह में करेंगे।
चीफ इंजीनियर राजीव बंसल व एक्सईएन नीरज शर्मा की देखरेख में सूक्ष्म सिंचाई योजना के पायलट प्रोजेक्ट के कार्य को पूरा किया गया है। इस परियोजना की आधारशिला भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पिहोवा में रखी थी। शर्मा ने बताया कि हर खेत तक पानी पहुंचाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत काडा हरियाणा की ओर से सूक्ष्म सिंचाई योजना के पायलट प्रोजेक्ट को स्थापित किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कोई भी बारह मासी नदी नहीं है और दो तिहाई हिस्से में भूमिगत जल का स्तर खारा है। इसके कारण जल की खपत में प्रत्येक वर्ष अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है जबकि उपलब्ध जल की मात्रा सीमित है।
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इस योजना से सूक्ष्म सिंचाई के लिए किसानों को प्रेशर के साथ नहरी पानी मिलेगा और इस पानी को टपका सिंचाई व फव्वारा सिंचाई विधि के जरिये प्रयोग में लाया जा सकेगा। इससे पानी की खपत में कमी आएगी और ज्यादा से ज्यादा किसानों को पानी मिल पाएगा। इससे सरकार के हर खेत को पानी के लक्ष्य को साकार किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि यह देश की अपनी किस्म की पहली योजना है।
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प्रथम चरण में परियोजना के साथ जुड़ेंगे 13 जिले
सूक्ष्म सिंचाई पायलट परियोजना प्रथम चरण में प्रदेश के 13 जिलों में शुरू की जाएगी। इनमें अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, हिसार, झज्जर, भिवानी, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, सिरसा, सोनीपत, पानीपत, जींद जिले शामिल है, के साथ-साथ 15 गांव को भी शामिल किया जाएगा।
परियोजना के लिए बिछेगी एचडीपीआई पाइप लाइन
इस परियोजना में कुल सिंचित नहरी क्षेत्र 1972.49 हेक्टेयर को शामिल किया गया है और करीब 5 लाख 50 हजार फीट एचडीपीआई पाइपलाइन बिछाई जाएगी और इसका डिस्चार्ज 15.86 क्युसिक होगा।
यह है टपका व फव्वारा सिंचाई के फायदे
सिंचाई की इस विधि से जल उपयोगिता दक्षता 80 प्रतिशत तक होती है जबकि पारंपरिक सिंचाई की दक्षता 40 प्रतिशत है। इस विधि में जल के साथ-साथ उर्वरकों की अनावश्यक बर्बादी को रोका जा सकता है, जल की कमी वाले क्षेत्रों के लिए विधि लाभदायक है, जल का भूमिगत रिसाव व कटाव नहीं होगा, अच्छी फसल विकास के लिए आदर्श मृदा नमी स्तर प्रदान करती है, खरपतवार नियंत्रण के लिए लाभदायक है। फसलों की पैदावार 150 प्रतिशत बढ़ेगी और इन सिंचाई विधियों से ऊर्जा की भी बचत होगी।