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सात बजे से लग जात है मरीजों की कतार, कैसे पाएं लापरवाहों से पार
Updated Sat, 13 Jan 2018 12:18 AM IST
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सात बजे से लग जाती है मरीजों की कतार, कैसे पाएं लापरवाहों से पार
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
सरकार का बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा संसाधनों के अभाव, स्टाफ की लेटलतीफी, मैन पावर की कमी जिला अस्पताल समेत सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की चरमराई व्यवस्था पर भारी पड़ रहा है। ओपीडी का समय सुबह नौ से तीन बजे है, मगर हालात दर्शाते हैं कि यहां कई डाक्टरों का आना मनमर्जी से होता है। लिहाजा ओपीडी खुले होने के समय पर भी चैंबर पर ताले लगे रहते हैं। अस्पताल में डॉक्टर से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक ड्रेस कोड के प्रति गंभीर नहीं दिखते। ड्रेस कोड के बिना यह पता लगाना बेहद मुश्किल होता है कि कौन डॉक्टर है और कौन मरीज के साथ आया तिमारदार या अन्य कोई। जिले के लगभग सभी स्वास्थ्य केंद्रों में अधिकांश स्टाफ बगैर वर्दी के ड्यूटी करता है। ड्रेस कोड का पालन न करने का बड़ा फायदा यह बताया जा रहा है कि अस्पताल के अंदर बाहर जाते समय लोगों को पता ही नहीं चलता कि उनके पास से गुजरने वाला व्यक्ति अस्पताल स्टाफ है या सामान्य नागरिक।
अमर उजाला टीम ने शुक्रवार को साढ़े आठ बजे से साढ़े 12 बजे तक अस्पताल की व्यवस्था का रियलटी चेक किया। ओपीडी में चेकअप कराने के लिए मरीज और उनके परिजन ठंड में भी सुबह पौने सात बजे से कतार में लगे थे। जल्दी आकर ओपीडी की पर्ची बनवाने के लिए लाइनों में लगने का बड़ा कारण यही होता है कि चेकअप कराने के बाद वे समय से घर या दूसरे काम पर निकलेंगे। लेकिन, ओपीडी की पर्ची बनवाने से लेकर डॉक्टरों के सीट पर मिलने तक का वक्त सुनिश्चित नहीं होता। अस्पताल के नियमानुसार सभी डॉक्टरों को ओपीडी में सुबह नौ बजे पहुंचना होता है। और तीन बजे तक मरीजों को देखना होता है। इसके बाद बावजूद 9 बजे तक अमर उजाला की टीम को कुछ चिकित्सक ही मिले। अधिकांश डॉक्टर सवा नौ, साढ़े नौ और 10 बजे के बाद ही अपनी सीट तक पहुंचे।
100 बेड का अस्पताल दाखिल हैं 266 मरीज
100 बेड के जिला अस्पताल में रोजाना करीब 1500 से अधिक मरीजों का रजिस्ट्रेशन होता है। 12 जनवरी 2018 को इस अस्पताल में 266 या क्षमता से 166 मरीज ज्यादा दाखिल बताए गए। प्रसूति विभाग में 40 बेड का बंदोस्त है, लेकिन यहां क्षमता से दोगुने मरीज दाखिल हैं। हालात यह है कि एक-एक बेड पर दो-दो मरीज दाखिल है।
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मेडिकल सुप्रिटेंडेंट की प्रतिक्रिया
जिला अस्पताल के मेडिकल सुप्रिटेंडेंट डॉ. मनजीत सिंह ने डाक्टरों की लेटलतीफी पर कहा कि डॉक्टरों का ड्यूटी टाइम सुबहब नौ से तीन बजे तक है,लेकिन डाक्टरों की कमी के चलते उन्हें अक्सर शाम को पांच से सात बजे तक भी अस्पताल में ड्यूटी देनी पड़ती है। आज कुछ मरीज मौसम की वजह से देरी हुई है। ताला सिर्फ उन डॉक्टरों के ओपीडी रूम पर लगा है, जिनकी कोर्ट में पेशी है। उन्होंने बताया कि 43 साल पहले यह अस्पताल 50 बेड का बनाया गया था। इसे बाद में 100 बेड का किया गया। यहां मैन पावर बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके लिए विभाग के उच्च अधिकारियों को रिमांडर भेजे जा चुके हैं।
कैंसर हीमोफिलिया की नहीं मिलती दवा
अस्पताल के स्टॉक में 90 प्रतिशत दवाइयां मरीजों के लिए उपलब्ध हैं, लेकिन हीमोफिलिया और कैंसर के मरीजों के लिये अभी तक जिला अस्पताल में दवाइयां नहीं हैं। चिकित्साधिकारी डॉ. गौरव चावला के मुताबिक हीमोफिलिया के रोगियों के लिए आठ और नौ कैटेगिरी की दवा की आवश्यकता होती है। नौ कैटेगिरी की दवा अभी उपलब्ध नहीं है। एनसीडी प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. रमेश सभ्रवाल ने माना कि अस्पताल में करीब 400 कैंसर मरीजों का रजिस्ट्रेशन हैं, लेकिन उनके लिए दवा उपलब्ध नहीं है।
सिविल अस्पताल में रेडियोग्राफर के पांच पद स्वीकृत, दो उपलब्ध
कुरुक्षेत्र जिला
कुल जनसंख्या - 9 लाख 64 हजार 656
एक सिविल अस्पताल
एक टीबी अस्पताल
एक पॉलीक्लीनिक
पीएचसी 21
सीएचसी-5
सब सेंटर-117
आयुर्वेद डिस्पेंसरी- 1
आयुर्वेद कॉलेज एवं अस्पताल-1
निजी अस्पताल -125
इनपुट
- कुरुक्षेत्र जिले में एक सिविल अस्पताल के अलावा पांच सीएचसी और 18 पीएचसी शामिल हैं।
- जिला अस्पताल, सीएचसी और सभी पीएचसी में चिकित्सकों के कुल स्वीकृत पद 158
-158 में से 134 डॉक्टर सेवा में, चिकित्सकों के 24 पद रिक्त
- जिले में स्टाफ नर्स के 111 पद स्वीकृत हैं, उपलब्ध हैं 68, रिक्त पद 43
-जिले में लैब टेक्नीशियन के कुल स्वीकृत पद 37, उपलब्ध हैं 21, रिक्त पद 16
- सिविल अस्पताल में सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, ऑटोएनाइजर और एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध है
-एमआरआई, वेंटीलेटर और माडर्न ऑपरेशन थियेटर का अभाव
-सिविल अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक-40
- जिले में कुल एंबुलेंस-17
-सिविल अस्पताल में तीन गाड़ियों में उपलब्ध है वेंटीलेटर, लेकिन ऑपरेटर की व्यवस्था नहीं
-सिविल अस्पताल में आईसीयू सुविधा उपलब्ध
-निक्कू की सुविधा उपलब्ध, रिक्कू पिक्कू का अभाव
- सभी स्वास्थ्य केंद्रों में दवा काउंटर पर 450 में करीब 400 दवाइयां उपलब्ध
- सस्ती दवाइयों के लिए बिरला मंदिर के निकट जेनरिक दवाओं का सरकारी स्टोर उपलब्ध
-शाहाबाद, पिहोवा में रेडियोग्राफर के एक-एक पद पर रेडियोग्राफर उपलब्ध
-लाडवा, झांसा और मथाना में रेडियोग्राफर का एक-एक पद स्वीकृत, तीनों खाली
-जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का एक पद, उपलब्ध
सिविल अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूता विभाग में 40 बेड की व्यवस्था, दोगुने मरीज दाखिल
फोटो 1,2,3
-जच्चा को डिलीवरी के बाद सिविल अस्पताल में तीन समय पौष्टिक आहार उपलब्ध
-1975 में उद्घाटन के समय स्थापित किया था कुरुक्षेत्र में 50 बेड का अस्पताल, वर्तमान में 100 बेड
- तीन वर्ष, 16 रिमाइंडर, 12 लाख की मशीन, हर रोज 300 ओपीडी, नतीजा शून्य
-तीन वर्षो से एक्सरे प्लांट पर लटका ताला
-सेक्टर 4 स्थित पोली क्लिनिक वर्ष 2014 में खुलने से आज तक नहीं हो पाई रेडियोग्राफर की नियुक्ति
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
तीन वर्ष, 16 रिमांइडर , 12 लाख की मशीन, हर रोज 300 ओपीडी। इसके बाद भी नहीं हो रही सुनवाई। यह हालात हैं शहर के सेक्टर-4 स्थित राजकीय पोलीक्लीनिक के। वहां लाखों रुपये की लागत से तैयार भवन में एक्स रे मशीन जंग खा रही हैं, तो मरीज धक्के खाने को मजबूर हैं। पोली क्लीनिक की यह बदहाली प्रदेश सरकार के तेज तर्रार माने जाने वाले स्वास्थ्य मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री के दावों की पोल खोल रही है। यहां तीन वर्षों बाद भी एक अस्थाई रेडियोलोजिस्ट तक की नियुक्त नहीं हो सकी है।
सरकार की इस बेरुखी से क्लीनिक में कार्यरत चिकित्सकों से लेकर मरीज भी हैरान है तो स्वास्थ्य विभाग को ऑनलाइन करने और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिए जाने के दावों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिकारियों से लेकर सरकार तक को यह जानकारी है। इस बीच 16 बार रिमांडर भेजे गए, लेकिन शासन ने समस्या हल करने की जहमत नहीं उठाई। बता दें कि सेक्टर-4 की बेशकीमती जमीन पर करोड़ों रुपये से बने पोली क्लीनिक की शुरुआत वर्ष 2014 में की गई थी। उसी दौरान यहां करीब 12 लाख रुपये की एक्स-रे मशीन भी विभाग ने लगाई है। इसके लिए कक्ष भी बना है। कहने को यहां एक्स-रे मशीन स्थापित है, लेकिन यह भी अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। चिकित्सकों ने बताया कि यहां शहरी क्षेत्र के साथ गांव उमरी, देवीदासपुरा, सुंदरपुर, पलवल आदि गांवों के मरीज भी आते हैं। इस वजह से यहां हर रोज करीब 300 की ओपीडी होती है। इनमें से सामान्य तौर पर करीब 40 मरीजों को एक्स रे की जरूरत होती है। लेकिन, यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। बता दें कि यह पद जिला स्तर पर ही विभाग को भरना है। इसके लिए मंजूरी विभाग के उच्च अधिकारियों से ली जाती है।
एलएनजेपी अस्पताल पर बढ़ रहा दबाव : मलिक
पोली क्लीनिक के चिकित्सक डॉ. जगमिंद्र मलिक का कहना है कि यहां एक्स रे मशीन न होने के कारण मरीजों को एलएनजेपी सिविल अस्पताल ही एक्स-रे करवाने के लिए जाना पड़ता है। इससे न केवल मरीजों के उपचार में बाधा होती है, बल्कि एलएनजेपी सिविल अस्पताल पर भी अधिक मरीजों का दबाव बढ़ रहा है। लाखों रुपये की लागत से यहां तैयार किया गया एक्स रे प्लांट भी ठप हो रहा है।
16 बार भेजे रिमांडर, कोई जवाब तक नहीं आया: इंचार्ज
पोली क्लीनिक के इंचार्ज और सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. ललित कलसन का कहना है कि यहां रेडियोलॉजिस्ट का पद शुरू से ही रिक्त है। यह पद अनुबंधित है, लेकिन इसके लिए आज तक विज्ञापन तक जारी नहीं हुआ है। वह इसके लिए विभाग को तीन वर्षों में 16 बार रिमांइडर भेज चुके है, लेकिन कोई जवाब तक नहीं आया।
जल्द होगी रेडियोग्राफर की नियुक्ति : नैन
जिला सिविल सर्जन एसके नैन ने कहा कि ड्यूटी में लेट लतीफी का मामला संज्ञान में है। ड्यूटी में किसी प्रकार की कोताही सहन नहीं होगी। उन्होंने कहा कि पोली क्लीनिक में रिक्त पड़े रेडियोलोजिस्ट के पद का मामला संज्ञान में है। जल्द इस बारे में प्रक्रिया शुरू की जाएगी और रेडियोग्राफर पद पर नियुक्ति होगी।
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फोटो 12 से 14, 17
पिपली पीएचसी
साढ़े नौ बजे तक भी नहीं खुला डिस्पेंसरी का ताला, इंचार्ज भी नहीं पहुंचे
पिपली पीएचसी नेशनल हाईवे पर स्थित है। इसके बावजूद यहां मुख्य चिकित्सक से लेकर लैब इंचार्ज और अन्य कर्मियों की मनमानी चलती है। सुबह 9 बजकर 22 मिनट तक पीएचसी के इंचार्ज डॉ. मनोज रंगा शुक्रवार को पीएचसी पर नहीं पहुंचे थे। यहां दवा स्टोर का ताला भी इस समय तक नहीं खुला था। यहां चिकित्सकों से पहले देवीदासपुरा में कार्यरत आशा वर्कर कुसुमलता टीकाकरण के लिए सुबह नौ बजे दवा लेने पहुंची थीं। अधीक्षक आशा रानी भी नौ बजे पहुंच गई थीं। एंबुलेंस के लिए तैनात फार्मासिस्ट कमल भी समय पर पहुंचे चुके थे। स्टाफ नर्स पूजा करनाल से सुबह सवा नौ बजे पहुंची तो फार्मासिस्ट कैलाश देवी नौ बजकर 18 मिनट पर पहुंचीं। यहां चिकित्सक से लेकर अन्य कर्मियों की लेटतीफी में खराब पड़ी बायोमेट्रिक मशीन भी साथ दे रही है। फार्मासिस्ट कैलाश देवी ने बताया कि यहां हर रोज करीब 125 की ओपीडी होती है। दवा आदि का भी पूरा प्रबंध है।
फोटो 15, 16 व 18, 19
पोली क्लीनिक में 10 बजे तक जलरता हीटर करता है इंचार्ज का इंतजार
सेक्टर-4 में स्थित पोली क्लीनिक में 9 बजकर 36 मिनट तक आठ मरीज पंजीकरण करा चुके थे, लेकिन क्लीनिक इंचार्ज और सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. ललित कलसन यहां सुबह 10 बजे के बाद पहुंचे। उनकी खाली कुर्सी के पास जलता हीटर भी उनकी राह देखता रहा। उनके कार्यालय में ही तैनात कर्मी कुछ मिनट में उनके आने के दावे करते रहे। पौने 10 बजे तक दंत चिकित्सक भी नहीं पहुंची थी। यहां कई मरीज सुबह सवा नौ बजे से ही उनका इंतजार कर रहे थे। चिकित्सकों की जानकारी देने वाला भी कोई नहीं था। दूसरी ओर सवा नौ बजे पंजीकरण काउंटर पर दो महिला कर्मी तैनात थीं। नेत्र चिकित्सक अपने कक्ष में सीट पर बैठी थीं, लेकिन करीब साढ़े 9 बजे तक उनके पास कोई मरीज नहीं पहुंचा था। डॉ. जगमिंद्र मलिक सुबह साढ़े नौ बजे मरीजों की जांच में जुटे थे। यहां आने वाले मरीज पहले ही अनुबंधित मेडिकल ऑफिसर, एक स्टाफ सिस्टर, एक डेंटल एसिस्टेंट, एक स्थाई लेखाकार के न होने से परेशान होते हैं। चिकित्सकों की लेटलतीफी उनकी परेशानी को और भी बढ़ा रही है।
मथाना सीएचसी में मरीज झेल रहे चिकित्सकों की लेट-लतीफी
फोटो नंबर - 6, 7, 8, 9
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गांव मथाना स्थित 30 बेड के सीएचसी में मेडिकल ऑफिसर के चार पदों में से केवल दो ही भरे हुए हैं, जबकि दो रिक्त हैं। रिक्त में से एक पोस्ट के लिए हाल ही में आर्डर होना बताया जा रहा है, लेकिन ज्वॉइनिंग का अभी इंतजार है। खास बात कि सीएचसी की करीब 50 लोगों की टीम में अधिकांश स्टाफ सदस्य समय पर ड्यूटी देने में पिछड़े हुए हैं। इनमें एमओ, डेंटल सर्जन, फिजियोथेरेपिस्ट आदि कर्मी भी शामिल हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर अमर उजाला टीम ने शुक्रवार को सीएचसी मथाना का दौरा किया तो चिकित्सकों की लेट-लतीफी सामने आई। अस्पताल प्रबंधन ने ओपीडी के लिए सुबह नौ से शाम चार बजे तक समय है, लेकिन यहां डेंटल सर्जन रूम नंबर-8 में नौ बजकर 20 मिनट तक तो एमओ के रूम नंबर-6 में करीब दस बजे तक चिकित्सक नहीं पहुंचे थे। फिजियोथेरेपिस्ट के रूम नंबर-5 का ताला पौने दस बजे के करीब खुला। डेंटल, सर्जन, एमओ और फिजियोथेरेपिस्ट रूम के बाहर सुबह नौ बजे से ओपीडी के लिए मरीजों का आना शुरू हो गया था। लेकिन, इनके देर आने के कारण उन्हें समय पर सेवाएं नहीं मिल सकीं। रेडियोग्राफर न होने के कारण यहां लंबे समय से एक्सरे रूम के बाहर ताला लटका है। सीएचसी प्रभारी ने दावा किया कि सभी बेड सही कंडीशन में है। जबकि असलियत जांचते वक्त कई बेड दयनीय स्थिति में नजर आए। किसी पर चादर नहीं थी तो कई फटे हुए थे। कुछ के तो गद्दे ही गायब थे। मथाना सीएचसी की एसएमओ डॉ. अनुपमा सैनी ने कहा कि यहां अस्पताल में बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं। सभी 30 बेड बेहतर स्थिति में हैं और चिकित्सक समय पर पहुंचते हैं। यदि कोई लेट या छुट्टी पर होता है तो उसकी जानकारी दी जाती है।
लाडवा में भी स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल
फोटो नंबर - 10, 11
अमर उजाला ब्यूरो
लाडवा।
लाडवा में भी स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाडवा में एक एसएमओ के अलावा सात पद मेडिकल आफिसर के हैं। इनमें से चार पद खाली हैं। लाडवा के साथ बाबैन ब्लॉक के गांव भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत आते हैं। इस वजह से हजारों लोग स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इस स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं। लाडवा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा अधिकारी से लेकर सफाई कर्मचारी तक के पद खाली हैं। इन पदों को भरने में कोई रुचि नहीं ले रहा। हालत यह है कि रोजाना 400 से अधिक मरीजों को देखने का काम केवल तीन डाक्टर कर रहे हैं। इनमें से एक खुद केंद्र की एसएमओ हैं। इस वजह से मरीजों को अपनी बारी के लिए घंटों बैठना पड़ता है। स्वास्थ्य केंद्र में वर्षों से कोई भी जनरल सर्जरी, हड्डी रोग, बालरोग, नेत्ररोग या हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। स्वास्थ्य केंद्र के एक्स-रे रूम में रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण ताला लगा रहता है। पिछले कुछ दिनों से स्वास्थ्य केंद्र में सप्ताह में केवल दो दिन के लिए ही एलएनजेपी कुरुक्षेत्र से एक रेडियोलोजिस्ट की व्यवस्था की गई है। केंद्र की एंबुलेंस भी पुरानी हो चुकी है। यहां कार्यालय में स्टेनो, लिपिक और अकाउंटेंट के पद खाली पड़े हैं।
फोटो 20
पिहोवा में एंबुलेंस की हालत खस्ता
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिहोवा में लंबे समय समय से एमएमओ और दो मेडिकल ऑफिसर के पद खाली हैं। मरीजों के लिए उपलब्ध कराई गईं दो एंबुलेंस खस्ता हाल हो चुकी हैं। एंबुलेंस पर एक ड्राइवर, हेल्पर और ईएमटी का स्टाफ होता है, लेकिन यहां एक इमर्जेंसी मेडिसन ट्रेनर (ईएमटी) की कमी है। कई महीनों से सरकारी अस्पताल में खांसी की दवा (सीरप) नहीं है। पिहोवा सीएचसी में एक एसएमओ के अलावा सात सात पद मेडिकल आफिसर के हैं। इनमें एसएमओ, दो मेडिकल ऑफिसर के पद खाली हैं। यहां एक ही ओपीडी में दो डॉक्टरों के बैठने की व्यवस्था है। इस कारण ओपीडी के बाहर मरीजों की लाइन लगी रहती है। अस्पताल में दो ओपीडी होने के बावजूद डॉक्टर एक ही रूम में बैठकर मरीजों की जांच करते है।
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
सरकार का बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा संसाधनों के अभाव, स्टाफ की लेटलतीफी, मैन पावर की कमी जिला अस्पताल समेत सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की चरमराई व्यवस्था पर भारी पड़ रहा है। ओपीडी का समय सुबह नौ से तीन बजे है, मगर हालात दर्शाते हैं कि यहां कई डाक्टरों का आना मनमर्जी से होता है। लिहाजा ओपीडी खुले होने के समय पर भी चैंबर पर ताले लगे रहते हैं। अस्पताल में डॉक्टर से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक ड्रेस कोड के प्रति गंभीर नहीं दिखते। ड्रेस कोड के बिना यह पता लगाना बेहद मुश्किल होता है कि कौन डॉक्टर है और कौन मरीज के साथ आया तिमारदार या अन्य कोई। जिले के लगभग सभी स्वास्थ्य केंद्रों में अधिकांश स्टाफ बगैर वर्दी के ड्यूटी करता है। ड्रेस कोड का पालन न करने का बड़ा फायदा यह बताया जा रहा है कि अस्पताल के अंदर बाहर जाते समय लोगों को पता ही नहीं चलता कि उनके पास से गुजरने वाला व्यक्ति अस्पताल स्टाफ है या सामान्य नागरिक।
अमर उजाला टीम ने शुक्रवार को साढ़े आठ बजे से साढ़े 12 बजे तक अस्पताल की व्यवस्था का रियलटी चेक किया। ओपीडी में चेकअप कराने के लिए मरीज और उनके परिजन ठंड में भी सुबह पौने सात बजे से कतार में लगे थे। जल्दी आकर ओपीडी की पर्ची बनवाने के लिए लाइनों में लगने का बड़ा कारण यही होता है कि चेकअप कराने के बाद वे समय से घर या दूसरे काम पर निकलेंगे। लेकिन, ओपीडी की पर्ची बनवाने से लेकर डॉक्टरों के सीट पर मिलने तक का वक्त सुनिश्चित नहीं होता। अस्पताल के नियमानुसार सभी डॉक्टरों को ओपीडी में सुबह नौ बजे पहुंचना होता है। और तीन बजे तक मरीजों को देखना होता है। इसके बाद बावजूद 9 बजे तक अमर उजाला की टीम को कुछ चिकित्सक ही मिले। अधिकांश डॉक्टर सवा नौ, साढ़े नौ और 10 बजे के बाद ही अपनी सीट तक पहुंचे।
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100 बेड का अस्पताल दाखिल हैं 266 मरीज
100 बेड के जिला अस्पताल में रोजाना करीब 1500 से अधिक मरीजों का रजिस्ट्रेशन होता है। 12 जनवरी 2018 को इस अस्पताल में 266 या क्षमता से 166 मरीज ज्यादा दाखिल बताए गए। प्रसूति विभाग में 40 बेड का बंदोस्त है, लेकिन यहां क्षमता से दोगुने मरीज दाखिल हैं। हालात यह है कि एक-एक बेड पर दो-दो मरीज दाखिल है।
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मेडिकल सुप्रिटेंडेंट की प्रतिक्रिया
जिला अस्पताल के मेडिकल सुप्रिटेंडेंट डॉ. मनजीत सिंह ने डाक्टरों की लेटलतीफी पर कहा कि डॉक्टरों का ड्यूटी टाइम सुबहब नौ से तीन बजे तक है,लेकिन डाक्टरों की कमी के चलते उन्हें अक्सर शाम को पांच से सात बजे तक भी अस्पताल में ड्यूटी देनी पड़ती है। आज कुछ मरीज मौसम की वजह से देरी हुई है। ताला सिर्फ उन डॉक्टरों के ओपीडी रूम पर लगा है, जिनकी कोर्ट में पेशी है। उन्होंने बताया कि 43 साल पहले यह अस्पताल 50 बेड का बनाया गया था। इसे बाद में 100 बेड का किया गया। यहां मैन पावर बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके लिए विभाग के उच्च अधिकारियों को रिमांडर भेजे जा चुके हैं।
कैंसर हीमोफिलिया की नहीं मिलती दवा
अस्पताल के स्टॉक में 90 प्रतिशत दवाइयां मरीजों के लिए उपलब्ध हैं, लेकिन हीमोफिलिया और कैंसर के मरीजों के लिये अभी तक जिला अस्पताल में दवाइयां नहीं हैं। चिकित्साधिकारी डॉ. गौरव चावला के मुताबिक हीमोफिलिया के रोगियों के लिए आठ और नौ कैटेगिरी की दवा की आवश्यकता होती है। नौ कैटेगिरी की दवा अभी उपलब्ध नहीं है। एनसीडी प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. रमेश सभ्रवाल ने माना कि अस्पताल में करीब 400 कैंसर मरीजों का रजिस्ट्रेशन हैं, लेकिन उनके लिए दवा उपलब्ध नहीं है।
सिविल अस्पताल में रेडियोग्राफर के पांच पद स्वीकृत, दो उपलब्ध
कुरुक्षेत्र जिला
कुल जनसंख्या - 9 लाख 64 हजार 656
एक सिविल अस्पताल
एक टीबी अस्पताल
एक पॉलीक्लीनिक
पीएचसी 21
सीएचसी-5
सब सेंटर-117
आयुर्वेद डिस्पेंसरी- 1
आयुर्वेद कॉलेज एवं अस्पताल-1
निजी अस्पताल -125
इनपुट
- कुरुक्षेत्र जिले में एक सिविल अस्पताल के अलावा पांच सीएचसी और 18 पीएचसी शामिल हैं।
- जिला अस्पताल, सीएचसी और सभी पीएचसी में चिकित्सकों के कुल स्वीकृत पद 158
-158 में से 134 डॉक्टर सेवा में, चिकित्सकों के 24 पद रिक्त
- जिले में स्टाफ नर्स के 111 पद स्वीकृत हैं, उपलब्ध हैं 68, रिक्त पद 43
-जिले में लैब टेक्नीशियन के कुल स्वीकृत पद 37, उपलब्ध हैं 21, रिक्त पद 16
- सिविल अस्पताल में सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, ऑटोएनाइजर और एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध है
-एमआरआई, वेंटीलेटर और माडर्न ऑपरेशन थियेटर का अभाव
-सिविल अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक-40
- जिले में कुल एंबुलेंस-17
-सिविल अस्पताल में तीन गाड़ियों में उपलब्ध है वेंटीलेटर, लेकिन ऑपरेटर की व्यवस्था नहीं
-सिविल अस्पताल में आईसीयू सुविधा उपलब्ध
-निक्कू की सुविधा उपलब्ध, रिक्कू पिक्कू का अभाव
- सभी स्वास्थ्य केंद्रों में दवा काउंटर पर 450 में करीब 400 दवाइयां उपलब्ध
- सस्ती दवाइयों के लिए बिरला मंदिर के निकट जेनरिक दवाओं का सरकारी स्टोर उपलब्ध
-शाहाबाद, पिहोवा में रेडियोग्राफर के एक-एक पद पर रेडियोग्राफर उपलब्ध
-लाडवा, झांसा और मथाना में रेडियोग्राफर का एक-एक पद स्वीकृत, तीनों खाली
-जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का एक पद, उपलब्ध
सिविल अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूता विभाग में 40 बेड की व्यवस्था, दोगुने मरीज दाखिल
फोटो 1,2,3
-जच्चा को डिलीवरी के बाद सिविल अस्पताल में तीन समय पौष्टिक आहार उपलब्ध
-1975 में उद्घाटन के समय स्थापित किया था कुरुक्षेत्र में 50 बेड का अस्पताल, वर्तमान में 100 बेड
- तीन वर्ष, 16 रिमाइंडर, 12 लाख की मशीन, हर रोज 300 ओपीडी, नतीजा शून्य
-तीन वर्षो से एक्सरे प्लांट पर लटका ताला
-सेक्टर 4 स्थित पोली क्लिनिक वर्ष 2014 में खुलने से आज तक नहीं हो पाई रेडियोग्राफर की नियुक्ति
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
तीन वर्ष, 16 रिमांइडर , 12 लाख की मशीन, हर रोज 300 ओपीडी। इसके बाद भी नहीं हो रही सुनवाई। यह हालात हैं शहर के सेक्टर-4 स्थित राजकीय पोलीक्लीनिक के। वहां लाखों रुपये की लागत से तैयार भवन में एक्स रे मशीन जंग खा रही हैं, तो मरीज धक्के खाने को मजबूर हैं। पोली क्लीनिक की यह बदहाली प्रदेश सरकार के तेज तर्रार माने जाने वाले स्वास्थ्य मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री के दावों की पोल खोल रही है। यहां तीन वर्षों बाद भी एक अस्थाई रेडियोलोजिस्ट तक की नियुक्त नहीं हो सकी है।
सरकार की इस बेरुखी से क्लीनिक में कार्यरत चिकित्सकों से लेकर मरीज भी हैरान है तो स्वास्थ्य विभाग को ऑनलाइन करने और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिए जाने के दावों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिकारियों से लेकर सरकार तक को यह जानकारी है। इस बीच 16 बार रिमांडर भेजे गए, लेकिन शासन ने समस्या हल करने की जहमत नहीं उठाई। बता दें कि सेक्टर-4 की बेशकीमती जमीन पर करोड़ों रुपये से बने पोली क्लीनिक की शुरुआत वर्ष 2014 में की गई थी। उसी दौरान यहां करीब 12 लाख रुपये की एक्स-रे मशीन भी विभाग ने लगाई है। इसके लिए कक्ष भी बना है। कहने को यहां एक्स-रे मशीन स्थापित है, लेकिन यह भी अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। चिकित्सकों ने बताया कि यहां शहरी क्षेत्र के साथ गांव उमरी, देवीदासपुरा, सुंदरपुर, पलवल आदि गांवों के मरीज भी आते हैं। इस वजह से यहां हर रोज करीब 300 की ओपीडी होती है। इनमें से सामान्य तौर पर करीब 40 मरीजों को एक्स रे की जरूरत होती है। लेकिन, यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। बता दें कि यह पद जिला स्तर पर ही विभाग को भरना है। इसके लिए मंजूरी विभाग के उच्च अधिकारियों से ली जाती है।
एलएनजेपी अस्पताल पर बढ़ रहा दबाव : मलिक
पोली क्लीनिक के चिकित्सक डॉ. जगमिंद्र मलिक का कहना है कि यहां एक्स रे मशीन न होने के कारण मरीजों को एलएनजेपी सिविल अस्पताल ही एक्स-रे करवाने के लिए जाना पड़ता है। इससे न केवल मरीजों के उपचार में बाधा होती है, बल्कि एलएनजेपी सिविल अस्पताल पर भी अधिक मरीजों का दबाव बढ़ रहा है। लाखों रुपये की लागत से यहां तैयार किया गया एक्स रे प्लांट भी ठप हो रहा है।
16 बार भेजे रिमांडर, कोई जवाब तक नहीं आया: इंचार्ज
पोली क्लीनिक के इंचार्ज और सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. ललित कलसन का कहना है कि यहां रेडियोलॉजिस्ट का पद शुरू से ही रिक्त है। यह पद अनुबंधित है, लेकिन इसके लिए आज तक विज्ञापन तक जारी नहीं हुआ है। वह इसके लिए विभाग को तीन वर्षों में 16 बार रिमांइडर भेज चुके है, लेकिन कोई जवाब तक नहीं आया।
जल्द होगी रेडियोग्राफर की नियुक्ति : नैन
जिला सिविल सर्जन एसके नैन ने कहा कि ड्यूटी में लेट लतीफी का मामला संज्ञान में है। ड्यूटी में किसी प्रकार की कोताही सहन नहीं होगी। उन्होंने कहा कि पोली क्लीनिक में रिक्त पड़े रेडियोलोजिस्ट के पद का मामला संज्ञान में है। जल्द इस बारे में प्रक्रिया शुरू की जाएगी और रेडियोग्राफर पद पर नियुक्ति होगी।
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पिपली पीएचसी
साढ़े नौ बजे तक भी नहीं खुला डिस्पेंसरी का ताला, इंचार्ज भी नहीं पहुंचे
पिपली पीएचसी नेशनल हाईवे पर स्थित है। इसके बावजूद यहां मुख्य चिकित्सक से लेकर लैब इंचार्ज और अन्य कर्मियों की मनमानी चलती है। सुबह 9 बजकर 22 मिनट तक पीएचसी के इंचार्ज डॉ. मनोज रंगा शुक्रवार को पीएचसी पर नहीं पहुंचे थे। यहां दवा स्टोर का ताला भी इस समय तक नहीं खुला था। यहां चिकित्सकों से पहले देवीदासपुरा में कार्यरत आशा वर्कर कुसुमलता टीकाकरण के लिए सुबह नौ बजे दवा लेने पहुंची थीं। अधीक्षक आशा रानी भी नौ बजे पहुंच गई थीं। एंबुलेंस के लिए तैनात फार्मासिस्ट कमल भी समय पर पहुंचे चुके थे। स्टाफ नर्स पूजा करनाल से सुबह सवा नौ बजे पहुंची तो फार्मासिस्ट कैलाश देवी नौ बजकर 18 मिनट पर पहुंचीं। यहां चिकित्सक से लेकर अन्य कर्मियों की लेटतीफी में खराब पड़ी बायोमेट्रिक मशीन भी साथ दे रही है। फार्मासिस्ट कैलाश देवी ने बताया कि यहां हर रोज करीब 125 की ओपीडी होती है। दवा आदि का भी पूरा प्रबंध है।
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पोली क्लीनिक में 10 बजे तक जलरता हीटर करता है इंचार्ज का इंतजार
सेक्टर-4 में स्थित पोली क्लीनिक में 9 बजकर 36 मिनट तक आठ मरीज पंजीकरण करा चुके थे, लेकिन क्लीनिक इंचार्ज और सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. ललित कलसन यहां सुबह 10 बजे के बाद पहुंचे। उनकी खाली कुर्सी के पास जलता हीटर भी उनकी राह देखता रहा। उनके कार्यालय में ही तैनात कर्मी कुछ मिनट में उनके आने के दावे करते रहे। पौने 10 बजे तक दंत चिकित्सक भी नहीं पहुंची थी। यहां कई मरीज सुबह सवा नौ बजे से ही उनका इंतजार कर रहे थे। चिकित्सकों की जानकारी देने वाला भी कोई नहीं था। दूसरी ओर सवा नौ बजे पंजीकरण काउंटर पर दो महिला कर्मी तैनात थीं। नेत्र चिकित्सक अपने कक्ष में सीट पर बैठी थीं, लेकिन करीब साढ़े 9 बजे तक उनके पास कोई मरीज नहीं पहुंचा था। डॉ. जगमिंद्र मलिक सुबह साढ़े नौ बजे मरीजों की जांच में जुटे थे। यहां आने वाले मरीज पहले ही अनुबंधित मेडिकल ऑफिसर, एक स्टाफ सिस्टर, एक डेंटल एसिस्टेंट, एक स्थाई लेखाकार के न होने से परेशान होते हैं। चिकित्सकों की लेटलतीफी उनकी परेशानी को और भी बढ़ा रही है।
मथाना सीएचसी में मरीज झेल रहे चिकित्सकों की लेट-लतीफी
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गांव मथाना स्थित 30 बेड के सीएचसी में मेडिकल ऑफिसर के चार पदों में से केवल दो ही भरे हुए हैं, जबकि दो रिक्त हैं। रिक्त में से एक पोस्ट के लिए हाल ही में आर्डर होना बताया जा रहा है, लेकिन ज्वॉइनिंग का अभी इंतजार है। खास बात कि सीएचसी की करीब 50 लोगों की टीम में अधिकांश स्टाफ सदस्य समय पर ड्यूटी देने में पिछड़े हुए हैं। इनमें एमओ, डेंटल सर्जन, फिजियोथेरेपिस्ट आदि कर्मी भी शामिल हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर अमर उजाला टीम ने शुक्रवार को सीएचसी मथाना का दौरा किया तो चिकित्सकों की लेट-लतीफी सामने आई। अस्पताल प्रबंधन ने ओपीडी के लिए सुबह नौ से शाम चार बजे तक समय है, लेकिन यहां डेंटल सर्जन रूम नंबर-8 में नौ बजकर 20 मिनट तक तो एमओ के रूम नंबर-6 में करीब दस बजे तक चिकित्सक नहीं पहुंचे थे। फिजियोथेरेपिस्ट के रूम नंबर-5 का ताला पौने दस बजे के करीब खुला। डेंटल, सर्जन, एमओ और फिजियोथेरेपिस्ट रूम के बाहर सुबह नौ बजे से ओपीडी के लिए मरीजों का आना शुरू हो गया था। लेकिन, इनके देर आने के कारण उन्हें समय पर सेवाएं नहीं मिल सकीं। रेडियोग्राफर न होने के कारण यहां लंबे समय से एक्सरे रूम के बाहर ताला लटका है। सीएचसी प्रभारी ने दावा किया कि सभी बेड सही कंडीशन में है। जबकि असलियत जांचते वक्त कई बेड दयनीय स्थिति में नजर आए। किसी पर चादर नहीं थी तो कई फटे हुए थे। कुछ के तो गद्दे ही गायब थे। मथाना सीएचसी की एसएमओ डॉ. अनुपमा सैनी ने कहा कि यहां अस्पताल में बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं। सभी 30 बेड बेहतर स्थिति में हैं और चिकित्सक समय पर पहुंचते हैं। यदि कोई लेट या छुट्टी पर होता है तो उसकी जानकारी दी जाती है।
लाडवा में भी स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल
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अमर उजाला ब्यूरो
लाडवा।
लाडवा में भी स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाडवा में एक एसएमओ के अलावा सात पद मेडिकल आफिसर के हैं। इनमें से चार पद खाली हैं। लाडवा के साथ बाबैन ब्लॉक के गांव भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत आते हैं। इस वजह से हजारों लोग स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इस स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं। लाडवा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा अधिकारी से लेकर सफाई कर्मचारी तक के पद खाली हैं। इन पदों को भरने में कोई रुचि नहीं ले रहा। हालत यह है कि रोजाना 400 से अधिक मरीजों को देखने का काम केवल तीन डाक्टर कर रहे हैं। इनमें से एक खुद केंद्र की एसएमओ हैं। इस वजह से मरीजों को अपनी बारी के लिए घंटों बैठना पड़ता है। स्वास्थ्य केंद्र में वर्षों से कोई भी जनरल सर्जरी, हड्डी रोग, बालरोग, नेत्ररोग या हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। स्वास्थ्य केंद्र के एक्स-रे रूम में रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण ताला लगा रहता है। पिछले कुछ दिनों से स्वास्थ्य केंद्र में सप्ताह में केवल दो दिन के लिए ही एलएनजेपी कुरुक्षेत्र से एक रेडियोलोजिस्ट की व्यवस्था की गई है। केंद्र की एंबुलेंस भी पुरानी हो चुकी है। यहां कार्यालय में स्टेनो, लिपिक और अकाउंटेंट के पद खाली पड़े हैं।
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पिहोवा में एंबुलेंस की हालत खस्ता
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिहोवा में लंबे समय समय से एमएमओ और दो मेडिकल ऑफिसर के पद खाली हैं। मरीजों के लिए उपलब्ध कराई गईं दो एंबुलेंस खस्ता हाल हो चुकी हैं। एंबुलेंस पर एक ड्राइवर, हेल्पर और ईएमटी का स्टाफ होता है, लेकिन यहां एक इमर्जेंसी मेडिसन ट्रेनर (ईएमटी) की कमी है। कई महीनों से सरकारी अस्पताल में खांसी की दवा (सीरप) नहीं है। पिहोवा सीएचसी में एक एसएमओ के अलावा सात सात पद मेडिकल आफिसर के हैं। इनमें एसएमओ, दो मेडिकल ऑफिसर के पद खाली हैं। यहां एक ही ओपीडी में दो डॉक्टरों के बैठने की व्यवस्था है। इस कारण ओपीडी के बाहर मरीजों की लाइन लगी रहती है। अस्पताल में दो ओपीडी होने के बावजूद डॉक्टर एक ही रूम में बैठकर मरीजों की जांच करते है।