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Kurukshetra News: 135 पार्ट-टाइम शिक्षकों को नियमित होने की उम्मीद जगी
Sun, 22 Mar 2026 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 22 Mar 2026 01:21 AM IST
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में कार्यरत पार्ट-टाइम शिक्षकों को नियमित करने के मुद्दे पर सरकार ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र भेजकर छह महीने के भीतर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
विवि में करीब 135 पार्ट-टाइम शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि पूरे हरियाणा में इनकी संख्या लगभग 800 के आसपास बताई जा रही है। हुप्टा इस मांग के लिए लंबे समय से प्रदर्शन कर रही है और हाल ही में यह मुद्दा विधानसभा में भी उठाया गया। कुछ महीने पहले शिक्षकों ने कुलसचिव को मांग पत्र सौंपकर समान काम के लिए समान वेतन, सेवा सुरक्षा और नियमितीकरण की मांग उठाई थी।
हुप्टा के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. सोमपाल ने बताया कि वर्तमान में प्रति लेक्चर 750 रुपये दिए जाते हैं और अधिकतम मासिक वेतन 34 हजार रुपये तक सीमित है। यदि लेक्चर कम होते हैं तो वेतन भी घट जाता है, जबकि अधिक कार्य करने पर भी निर्धारित सीमा से अधिक भुगतान नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया स्थायी शिक्षकों के समान होती है जिसमें नेट और पीएचडी अनिवार्य है लेकिन सुविधाएं नहीं मिलतीं।
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उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षकों को साल में केवल 9 महीने ही काम मिलता है जबकि 3 महीने बिना नियमित वेतन के रहना पड़ता है। इस दौरान केवल परीक्षा ड्यूटी का भुगतान मिलता है। इससे आर्थिक अस्थिरता बनी रहती है।
शिक्षकों का कहना है कि सरकार ने वेतन को 57,700 रुपये करने की बात कही है जिससे उन्हें स्थायी शिक्षकों के बराबर लाभ मिल सके। ऐसे में अब सभी की नजर सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
इसके अलावा विवि में 140 से अधिक कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर असिस्टेंट प्रोफेसर भी कार्यरत हैं। इनमें अधिकतर नियुक्तियां वर्ष 2014 से 2016 के बीच की गई हैं। इनमें जनरल, एससी और बीसी सहित विभिन्न श्रेणियों के शिक्षक शामिल हैं।
कानून के हिसाब से शिक्षकों के हित में उचित निर्णय लिया जाएगा : महासिंह
डीपीआर महासिंह ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को पत्र भेजकर पार्ट-टाइम शिक्षकों के मामले में छह महीने के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इस पर नियमानुसार जल्द कार्रवाई की जाएगी और राज्य सरकार के नियमों के अनुसार शिक्षकों के हित में उचित निर्णय लिया जाएगा।
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विवि में करीब 135 पार्ट-टाइम शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि पूरे हरियाणा में इनकी संख्या लगभग 800 के आसपास बताई जा रही है। हुप्टा इस मांग के लिए लंबे समय से प्रदर्शन कर रही है और हाल ही में यह मुद्दा विधानसभा में भी उठाया गया। कुछ महीने पहले शिक्षकों ने कुलसचिव को मांग पत्र सौंपकर समान काम के लिए समान वेतन, सेवा सुरक्षा और नियमितीकरण की मांग उठाई थी।
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हुप्टा के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. सोमपाल ने बताया कि वर्तमान में प्रति लेक्चर 750 रुपये दिए जाते हैं और अधिकतम मासिक वेतन 34 हजार रुपये तक सीमित है। यदि लेक्चर कम होते हैं तो वेतन भी घट जाता है, जबकि अधिक कार्य करने पर भी निर्धारित सीमा से अधिक भुगतान नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया स्थायी शिक्षकों के समान होती है जिसमें नेट और पीएचडी अनिवार्य है लेकिन सुविधाएं नहीं मिलतीं।
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उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षकों को साल में केवल 9 महीने ही काम मिलता है जबकि 3 महीने बिना नियमित वेतन के रहना पड़ता है। इस दौरान केवल परीक्षा ड्यूटी का भुगतान मिलता है। इससे आर्थिक अस्थिरता बनी रहती है।
शिक्षकों का कहना है कि सरकार ने वेतन को 57,700 रुपये करने की बात कही है जिससे उन्हें स्थायी शिक्षकों के बराबर लाभ मिल सके। ऐसे में अब सभी की नजर सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
इसके अलावा विवि में 140 से अधिक कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर असिस्टेंट प्रोफेसर भी कार्यरत हैं। इनमें अधिकतर नियुक्तियां वर्ष 2014 से 2016 के बीच की गई हैं। इनमें जनरल, एससी और बीसी सहित विभिन्न श्रेणियों के शिक्षक शामिल हैं।
कानून के हिसाब से शिक्षकों के हित में उचित निर्णय लिया जाएगा : महासिंह
डीपीआर महासिंह ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को पत्र भेजकर पार्ट-टाइम शिक्षकों के मामले में छह महीने के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इस पर नियमानुसार जल्द कार्रवाई की जाएगी और राज्य सरकार के नियमों के अनुसार शिक्षकों के हित में उचित निर्णय लिया जाएगा।