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करवाचौथ व्रत विधि

Sat, 07 Oct 2017 11:31 PM IST
Updated Sat, 07 Oct 2017 11:31 PM IST
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करवाचौथ व्रत विधि
अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र।
कॉस्मिक एस्ट्रो पिपली (कुरुक्षेत्र) के डायरेक्टर डा. सुरेश मिश्रा ने श्री बताया कि हिंदू धर्म में करवा चौथ नारी के जीवन का सबसे अहम दिन होता है। इसमें वे पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखकर चंद्रमा की पूजा-अर्चना करती हैं। इस दौरान चंद्र भगवान से अपने पति की लंबी आयु का वरदान मांगती हैं। स्त्रियों के लिए यह व्रत सुबह ब्रह्म मुहूर्त से शुरू होकर रात्रि में चद्रमा दर्शन के साथ पूर्ण होता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के साथ दिन भर निर्जला उपवास रखती हैं। करवा चौथ से संबंधित कथाएं सुनाती हैं। रात में चंद्र उदय होने पर उसकी पूजा कर पति के हाथों से पानी का घूंट पीकर उपवास पूर्ण करती हैं। इस दिन गौरी मां की पूजा की जाती है।
करवाचौथ व्रत विधि
सूरज के उदय होने से पहले नहाकर व्रत का संकल्प लें और घर के बड़ों द्वारा दी गई सरगी खाएं। सरगी में मिठाई, फल, सेंवई, पूड़ी और साज-शृंगार का सामान दिया जाता है। सरगी में प्याज और लहसुन से बना भोजन बिल्कुल भी न खाएं। सरगी के बाद करवाचौथ का निर्जला व्रत आरंभ हो जाता है। माता पार्वती, भगवान शिव और गणेश जी का ध्यान करते रहना चाहिए। दिढार पर गेरु से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा बनाएं। इस कला को करवा धरना कहा जाता है। यह एक पौराणिक परंपरा है। पूजन के समय पीली मिट्टी से मां गौरी और गणेश जी का स्वरूप बनाएं। मां गौरी की गोद में भगवान गणेश का स्वरूप बैठाएं। इन स्वरूपों की पूजा शाम के समय की जाती है। पूजा के समय माता गौरी को लकड़ी के सिंहासन पर बैठाएं और लाल रंग की चुन्नी पहनाएं। उनका शृंगार भी करें। इसके बाद उनकी मूर्ति के सामने जल से भरा कलश रख दें।
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इस तरह करें पूजन
गौरी और गणेश के स्वरूपों की पूजा करें। इसके साथ ही नम: शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम। प्रयच्छ भक्तियुक्तनां नारीणां हरवल्लभे।। का जाप करें। अधिकतर महिलाएं अपने परिवार में प्रचलित प्रथा के अनुसार ही पूजा करती हैं। इसके बाद करवाचौथ की कहानी सुननी चाहिए। कथा सुनने के बाद घर के सभी बड़ों का आशीर्वाद लेना चाहिए। चांद निकलने के बाद छन्नी के सहारे चांद को देखना चाहिए और अर्घ्य देना चाहिए। फिर पति के हाथ से जल ग्रहण कर अपना व्रत खोलना चाहिए।
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यह रहेगा समय
करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि में रखा जाता है। चतुर्थी तिथि का प्रारंभ आठ अक्तूबर 2017 को शाम 4.58 मिनट पर होगा। इस तिथि का समापन नौ अक्तूबर को मध्याह्न 2.16 मिनट पर होगा। इस बार चंद्रोदय आठ अक्तूबर 2017 को रात्रि 8.10 मिनट पर हो रहा है। करवा चौथ पर पूजा का मुहूर्त शाम 5.54 मिनट से शाम 7.10 मिनट तक शुभ रहेगा।
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