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विश्व कॉफी दिवस : दूध-चीनी छूटी... ब्लैक कॉफी बनी पसंद
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एआई निर्मित तस्वीर।
करनाल। कभी सुबह की नींद भगाने वाली कॉफी अब स्वाद के साथ लाइफस्टाइल का हिस्सा बन रही है। खासकर युवाओं के बीच। दूध और चीनी वाली पारंपरिक कॉफी के बजाय अब ब्लैक कॉफी की मांग अधिक है। अमेरिकानो, कैपुचिनो, लाते, मोका, फ्रेंच प्रेस और अलग-अलग तरह की कोल्ड कॉफी भी लोगों को पसंद आ रही हैं। स्थानीय बाजार में कॉफी के एक कप की कीमत करीब 30 रुपये से शुरू होकर 430 रुपये तक है।
कॉफी विक्रेताओं के अनुसार, पहले ग्राहक मुख्य रूप से दूध वाली कॉफी मांगते थे लेकिन अब युवा ब्लैक कॉफी के बारे में विशेष रूप से पूछते हैं। नगर निगम कार्यालय के पास कॉफी बेचने वाले प्रदीप शर्मा बताते हैं कि उनकी दुकान पर अब ब्लैक कॉफी की मांग लगातार बढ़ी है। पहले दूध वाली कॉफी की बिक्री अधिक रहती थी लेकिन अब कई युवा ब्लैक कॉफी पसंद कर रहे हैं।
तर्क है कि ब्लैक कॉफी में दूध और अतिरिक्त चीनी नहीं होती। ऐसे में दूध-चीनी वाली कॉफी की तुलना में इसमें अतिरिक्त कैलोरी कम हो सकती है। यही वजह है कि अपनी दिनचर्या और खानपान पर ध्यान देने वाले लोग भी इसे पसंद कर रहे हैं।
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जिला नागरिक अस्पताल की जनरल फिजिशियन डॉ. प्रिया दलाल और डॉ. बीरेंद्र नाथ के अनुसार, ब्लैक कॉफी का सीमित मात्रा में सेवन स्वास्थ्य के लिहाज से कुछ लाभ दे सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अधिक कॉफी पीने से अधिक फायदा होगा। कॉफी में मौजूद कैफीन की मात्रा को देखते हुए सेवन सीमित रखना जरूरी है।
लिवर के लिए भी फायदा
कॉफी और लिवर स्वास्थ्य के बीच संबंध को लेकर भी कई अध्ययन सामने आए हैं। डॉ. प्रिया के अनुसार, वर्ष 2021 की एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज़ वाले मरीजों में कॉफी का सेवन लिवर फाइब्रोसिस के कम जोखिम से जुड़ा पाया गया था। उन्होंने कहा कि हालांकि इन अध्ययनों को कॉफी को किसी बीमारी का इलाज मानने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
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कॉफी विक्रेताओं के अनुसार, पहले ग्राहक मुख्य रूप से दूध वाली कॉफी मांगते थे लेकिन अब युवा ब्लैक कॉफी के बारे में विशेष रूप से पूछते हैं। नगर निगम कार्यालय के पास कॉफी बेचने वाले प्रदीप शर्मा बताते हैं कि उनकी दुकान पर अब ब्लैक कॉफी की मांग लगातार बढ़ी है। पहले दूध वाली कॉफी की बिक्री अधिक रहती थी लेकिन अब कई युवा ब्लैक कॉफी पसंद कर रहे हैं।
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तर्क है कि ब्लैक कॉफी में दूध और अतिरिक्त चीनी नहीं होती। ऐसे में दूध-चीनी वाली कॉफी की तुलना में इसमें अतिरिक्त कैलोरी कम हो सकती है। यही वजह है कि अपनी दिनचर्या और खानपान पर ध्यान देने वाले लोग भी इसे पसंद कर रहे हैं।
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जिला नागरिक अस्पताल की जनरल फिजिशियन डॉ. प्रिया दलाल और डॉ. बीरेंद्र नाथ के अनुसार, ब्लैक कॉफी का सीमित मात्रा में सेवन स्वास्थ्य के लिहाज से कुछ लाभ दे सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अधिक कॉफी पीने से अधिक फायदा होगा। कॉफी में मौजूद कैफीन की मात्रा को देखते हुए सेवन सीमित रखना जरूरी है।
लिवर के लिए भी फायदा
कॉफी और लिवर स्वास्थ्य के बीच संबंध को लेकर भी कई अध्ययन सामने आए हैं। डॉ. प्रिया के अनुसार, वर्ष 2021 की एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज़ वाले मरीजों में कॉफी का सेवन लिवर फाइब्रोसिस के कम जोखिम से जुड़ा पाया गया था। उन्होंने कहा कि हालांकि इन अध्ययनों को कॉफी को किसी बीमारी का इलाज मानने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।