फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Witnessing three hundred years old British-Indian architecture will now disappear

तीन सौ साल पुराना ब्रिटिश-भारतीय वास्तुकला का साक्षी अब मिट जाएगा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 22 Sep 2021 02:11 AM IST
विज्ञापन
Witnessing three hundred years old British-Indian architecture will now disappear
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

करनाल। सदियों पूर्व शहर में बना ब्रिटिश व भारतीय वास्तुकला का एक नमूना अब हमेशा के लिए मिट जाएगा, क्योंकि पुरानी कचहरी परिसर स्थित पुराने राजस्व रिकार्ड भवन को तोड़कर मलबा उठाया जा रहा है। यह जमीन कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज को स्थानांतरित हो गई थी, इसलिए खंडहर में तबदील इमारत का तोड़ना भी लाजिमी था। इतिहासकारों का कहना है कि भवन को तो नहीं बचाया जा सकता किंतु इसकी तस्वीरों को सहेजकर रखा जा सकता है ताकि भावी पीढ़ियां वास्तुकला से परिचित हो सकें।
तीन सदियों तक सहेजा राजस्व और न्यायिक रिकार्ड
1834 से ब्रिटिश शासन में इस भवन में राजस्व रिकार्ड कार्यालय संचालित किया गया था। करीब 286 साल इस इमारत में जिले का राजस्व रिकार्ड रखा गया। इस भवन में ज्यूडिशियल कोर्ट का रिकार्ड भी रखा जाता था। न्यायालय परिसर सेक्टर 12 में बनने के बाद वह रिकार्ड यहां से ले जाया गया। इमारत कंडम होने पर राजस्व रिकार्ड कार्यालय को भी 2018-19 में स्थानांतरित कर दिया था। पुराना रिकार्ड अंग्रेजी व उर्दू भाषा में था। जमीनों की जमाबंदी, गिरदावरी, खसरा नंबर व मालिकाना हक इत्यादि रिकार्ड इस भवन में तीन सदियों तक सहेजा गया।
विज्ञापन

सुरक्षा के लिहाज से दी थी मजबूती
भवन की चौड़ी दीवारें, ऊंची छत, ऊंचे गोल मजबूत दरवाजे, बड़े आकार की खिड़कियां यह दर्शाती थी कि किसी जमाने में महत्वपूर्ण रिकार्ड की सुरक्षा के लिहाज से मजबूती के साथ इस भवन का निर्माण किया गया था। दीवारों की चौड़ाई इतनी है कि आज के घरों में इतना चौड़ा बाथरूम बनाया जाता है। अब यह भवन जीर्णशीर्ण हो चुका था।
विज्ञापन
विज्ञापन

गर्मी लगती थी न सर्दी
भवन की तस्वीरें लेकर सहेजी जाएं
यह इमारत समृद्ध वास्तुकला का नमूना थी। ब्रिटिश व भारतीय वास्तुकला तकनीक का यह मिश्रण था। अपनी विशिष्ट उपस्थिति से वर्तमान को आकर्षित करती रही। इसमें न गर्मी लगती थी न सर्दी। भवन निर्माण कला को तस्वीरों के माध्यम से संरक्षित कर देना चाहिए। भविष्य में जरूरत पड़ने पर तकनीक का लाभ लिया जा सकेगा।
-इतिहासकार, प्रो. विनय कुमार डांगी, राजकीय महिला महाविद्यालय, मतलौडा, पानीपत
मेडिकल कॉलेज के जिस प्रभाग के अधीन काम चल रहा है उसे इस पर संज्ञान लेने के लिए कहा जाएगा। भवन की तस्वीरें लेकर सुरक्षित रखी जा सकती हैं।
-डा. जयंत कैरी, प्रवक्ता, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed