फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Whether it's drought or frost, mustard yields will be high.

Karnal News: सूखा हो या पाला, सरसों की पैदावार होगी आला

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 24 Sep 2025 01:32 AM IST
विज्ञापन
Whether it's drought or frost, mustard yields will be high.
1002 खेत में खड़ी सरसों की नई किस्म सीएस-68।
देव शर्मा
विज्ञापन

करनाल। केंद्रीय मृदा एवं लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) करनाल के वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन के समय में सरसों की एक ऐसी किस्म सीएस-68 तैयार की है, जो बहुतनाव (मल्टीस्ट्रेस) सहनशील है। ये किस्म लवणीय मिट्टी के साथ सूखा, उच्च तापमान और पाले में भी लहलहाएगी।
खास बात ये है कि देश में मौजूद किस्मों में इसकी पैदावार सर्वाधिक होगी। ये कई रोगों के प्रति प्रतिरोधी है। भारत सरकार की किस्म पहचान समिति (बीआईसी) ने इसे रिलीज कर दिया है। किसानों को बीज अगले साल वर्ष 2026 में उपलब्ध करा दिया जाएगा। सीएस-68 किस्म को मुख्य रूप से हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मध्यप्रदेश राज्यों के लिए रिलीज किया गया है। इस किस्म को विकसित करने वाले वैज्ञानिकों में डॉ. विजयता सिंह, डॉ. जोगिंद्र सिंह, डॉ. आरके यादव (निदेशक सीएसएसआरआई), डॉ. प्रबोधचंद्र शर्मा , डॉ. रवि किरण केटी (लखनऊ), डॉ. राम प्रकाश (हिसार), डॉ. मुदस्सिर अहमद खान व डॉ. चंपा लाल खटीक (फतेहपुर शेखावाटी, राजस्थान) शामिल हैं।
विज्ञापन

ये हैं विशेषताएं
डॉ. विजयता सिंह ने बताया कि सीएस-68 में कई विशेषताएं हैं। सामान्य भूमि में उपज 28 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। लवणीय भूमि में उपज 22 से 24 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। सामान्य किस्मों में सामान्य भूमि में पैदावार 20 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। लवणीय भूमि में सरसों पैदा ही नहीं होती, यदि हो भी जाए पैदावार छह से आठ क्विंटल तक ही होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

- ये बहुतनाव सहनशील (मौसम में बदलाव को सहने की क्षमता) होने के साथ इसमें 9 से 13 डेसी साइमन प्रति मीटर तक लवणता सहन करने की क्षमता है। 9 से 9.4 पीएच मान तक क्षारीयता को भी बर्दाश्त कर सकती है। अन्य किस्में 6 से 10 डेसी साइमन की लवणता और 8.5 पीएच मान क्षारीय सहन करने की क्षमता ही रखती हैं।
जल्द मिलती है उपज : इस किस्म में तेल की मात्रा 41 से 42 प्रतिशत है। अन्य में 38-40 प्रतिशत रहती है। ये किस्म 128 से 131 दिन के अंदर पक जाती है। अन्य किस्में 130-140 दिन में पकती हैं। पौधे की ऊंचाई 185 सेमी हैं और 1000 दानों का भार 5.2 ग्राम है। इस किस्म की बुवाई का समय 01 से 31 अक्तूबर तक रहेगा।

रोग प्रतिरोधी : वैज्ञानिक डॉ. विजयता सिंह ने बताया कि नई किस्म सीएस-68 पत्ती झुलसा (अल्टरनेरिया ब्लाइट), सफेद रतुआ, चूर्मिल अर्शिता (पावडर मिल्डस) और जड़ तना गलन रोग के प्रति रोधी हैं। इसके अलावा चैंपा रोग भी न्यूनतम ही रहेगा।

1002 खेत में खड़ी सरसों की नई किस्म सीएस-68।

1002 खेत में खड़ी सरसों की नई किस्म सीएस-68।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed