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Karnal News: काम निकले तो दिल से निकल जाता है आदमी...
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- कारवाने-अदब करनाल की सजी महफिल, कवियों, शायरों ने सुनाई रचनाएं
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। शहर के जिमखाना क्लब में शायरों की अदबी संस्था कारवाने-अदब करनाल की महफिल सजी तो कवियों, शायरों और साहित्यकारों ने नव वर्ष-2025 के लिए एक-दूसरे को बधाई दी और आपसी भाईचारा कायम होने तथा सुख-समृद्धि की कामना की।
आचार्य महावीर प्रसाद शास्त्री के आशीर्वचन के बाद कवि डाॅ. एसके शर्मा ने कहा, मेरा देश इसी तरह दुनिया में आगे बढ़ता रहे, हम रहें न रहें मेरा देश रहे बस यही तमन्ना है मेरी...। अंजु शर्मा ने कहा, चाहत का गुलिस्ता पेश हो, नगमों की हो महफिल, जहां भी रहो तुम, हर खुशी हो हासिल...। कवि भारत भूषण वर्मा ने आजकल के रिश्तों की सच्चाई बयां की, काम हो तो रिश्ते सब निभाता है आदमी, काम निकले तो दिल से निकल जाता है आदमी...। कवि महावीर शास्त्री ने कहा, हमें हां रोकने होंगे अंधेरे भी लुटेरे भी, तभी झोली में आएंगे, उजाले भी सवेरे भी...।
कवि इकबाल पानीपती ने कहा, नफरत के अंधेरे को दुनियां से मिटाना है...। कवि रामेश्वर देव ने गीता की महत्ता समझाई, गीता हमारे धर्म की सच्ची किताब है, खुशबू है जिसमें प्यार की ये वो गुलाब है...। कवि हरबंस ने अपनी हसरत बताई, सफर वो कैसा सफर जिस सफर में तुम न हो...। कवि दलीप खरेरा ने व्यंग्य किया, बाज आए हम बूतों की इबादत से, चलो पीछा छूटा एक पुरानी सी आदत से...। कवि गुरमुख सिंह वडै़च ने कहा, मुझे तुम नजर से गिरा तो रहे हो, मुझे तुम कभी भी भुला न सकोगे...।
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कवि इकबाल अहमद पानीपती की अध्यक्षता में महफिल में बतौर मुख्य अतिथि कवि कमल रईस और विशिष्ट अतिथि के रूप कवि अशोक मिश्रा और कवि तरलोचन सिंह पहुंचे। मंच संचालन कवि भारत भूषण वर्मा और रामेश्वर देव ने किया।
कवि अशोक मिश्रा ने जीवन की गुत्थी को समझाया, जीवन एक पहेली है इंसान के लिए...। इसके साथ साथ कवि परम पाल, राजपाल, आशीष ताज, अशोक, ममता प्रवीन, डॉ. कमर रईस आदि कई कवियों ने अपनी कविताएं सुनाईं।
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। शहर के जिमखाना क्लब में शायरों की अदबी संस्था कारवाने-अदब करनाल की महफिल सजी तो कवियों, शायरों और साहित्यकारों ने नव वर्ष-2025 के लिए एक-दूसरे को बधाई दी और आपसी भाईचारा कायम होने तथा सुख-समृद्धि की कामना की।
आचार्य महावीर प्रसाद शास्त्री के आशीर्वचन के बाद कवि डाॅ. एसके शर्मा ने कहा, मेरा देश इसी तरह दुनिया में आगे बढ़ता रहे, हम रहें न रहें मेरा देश रहे बस यही तमन्ना है मेरी...। अंजु शर्मा ने कहा, चाहत का गुलिस्ता पेश हो, नगमों की हो महफिल, जहां भी रहो तुम, हर खुशी हो हासिल...। कवि भारत भूषण वर्मा ने आजकल के रिश्तों की सच्चाई बयां की, काम हो तो रिश्ते सब निभाता है आदमी, काम निकले तो दिल से निकल जाता है आदमी...। कवि महावीर शास्त्री ने कहा, हमें हां रोकने होंगे अंधेरे भी लुटेरे भी, तभी झोली में आएंगे, उजाले भी सवेरे भी...।
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कवि इकबाल पानीपती ने कहा, नफरत के अंधेरे को दुनियां से मिटाना है...। कवि रामेश्वर देव ने गीता की महत्ता समझाई, गीता हमारे धर्म की सच्ची किताब है, खुशबू है जिसमें प्यार की ये वो गुलाब है...। कवि हरबंस ने अपनी हसरत बताई, सफर वो कैसा सफर जिस सफर में तुम न हो...। कवि दलीप खरेरा ने व्यंग्य किया, बाज आए हम बूतों की इबादत से, चलो पीछा छूटा एक पुरानी सी आदत से...। कवि गुरमुख सिंह वडै़च ने कहा, मुझे तुम नजर से गिरा तो रहे हो, मुझे तुम कभी भी भुला न सकोगे...।
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कवि इकबाल अहमद पानीपती की अध्यक्षता में महफिल में बतौर मुख्य अतिथि कवि कमल रईस और विशिष्ट अतिथि के रूप कवि अशोक मिश्रा और कवि तरलोचन सिंह पहुंचे। मंच संचालन कवि भारत भूषण वर्मा और रामेश्वर देव ने किया।
कवि अशोक मिश्रा ने जीवन की गुत्थी को समझाया, जीवन एक पहेली है इंसान के लिए...। इसके साथ साथ कवि परम पाल, राजपाल, आशीष ताज, अशोक, ममता प्रवीन, डॉ. कमर रईस आदि कई कवियों ने अपनी कविताएं सुनाईं।