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चकबंदी पीड़ितों की चेतावनी, मुख्यमंत्री मिले, नहीं तो करेंगे चंडीगढ़ का घेराव

Mon, 06 Mar 2017 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल Updated Mon, 06 Mar 2017 12:07 AM IST
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Warning consolidation victims, met Chief Minister, will then lay siege to Chandigarh, Karnal
चकबंदी पीड़ितों की चेतावनी, मुख्यमंत्री मिले, नहीं तो करेंगे चंडीगढ़ का घेराव - फोटो : Amar Ujala

गांव भरतपुर में अपनी मांगों को लेकर रविवार को चकबंदी पीड़ित किसानों ने महापंचायत की। जिसमें पांच गांवों के सैकड़ों चकबंदी पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन के प्रति रोष व्यक्त किया। पीड़ित किसानों का कहना है कि प्रदेश मुख्यमंत्री ने तीन माह में पूरा मामला क्लीयर करने का आश्वासन दिया था, लेकिन छह माह के बाद भी पीड़ित किसानों की कोई सुध नहीं ली गई।

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यदि किसान मुख्यमंत्री से मिलने भी जाते है तो जिला प्रशासनिक अधिकारी किसानों को मुख्यमंत्री से मिलने नहीं देते। चकबंदी पीड़ित किसानों ने चेताया कि यदि जिला प्रशासन ने 15 मार्च तक उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री से नहीं करवाई तो वे बिना किसी पूर्व सूचना के सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रालियों में अपने घरों का सामान लादकर व अपने पूरे परिवार के साथ चंडीगढ़ सीएम हाउस पर कूच करेंगे। रविवार को गांव भरतपुर में चकबंदी पीड़ित किसान संघर्ष कमेटी के नेतृत्व में आयोजित पांच गांवों कालरम, अराईपुरा, भरतपुर, लालुपुरा और अमृतपुर की किसान महापंचायत में चकबंदी पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन के प्रति रोष जाहिर किया।
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किसान नेता प्रदीप मराठा, राजबल राणा, नकली राणा, महीपाल राणा, जल सिंह राणा, सतपाल सिंह, कृष्ण कुमार, रोशन लाल, ईश्वर जोगी, रामनिवास, रुला सिंह, कविता देवी, राजबाला देवी, नीलम देवी, रेखा, रीना आदि का कहना है कि जिला प्रशासन ने चकबंदी पीड़ित किसानों की मुश्किलों को हमेशा बढ़ाया है, जब भी किसान अपनी मांगों को लेकर चंडीगढ़ कूच करते है तो जिला प्रशासन बीच में अपने आश्वासनों का बस्ता लेकर पहुंच जाता है लेकिन अब किसान जिला प्रशासन की किसी भी बात या आश्वासन का विश्वास नही करेगा। पीड़ित किसानों का कहना है कि अक्तूबर-2016 में मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने किसान संघर्ष कमेटी के साथ बैठक कर चारों मुकदमे वापस लिए थे।
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जिनमें से भूमाफियाओं के साथ मारपीट व रेलवे एक्ट के तहत दर्ज मामले रद्द हो गए थे, लेकिन डिस्ट्रिक अटोर्नी की लापरवाही के कारण भूमाफियाओं द्वारा दर्ज करवाए गए तोड़फोड़ के दो मामले आज तक भी खारिज नहीं किए गए, जिससे किसानों को लगातार कोर्ट के चक्कर काटकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन सभी मुकदमों को पुख्ता जांच के बाद ही खारिज करने के आदेश दिए थे, लेकिन दो मामले अभी भी ठंडे बस्ते है।


चकबंदी पीड़ित किसानों की मांगें
1. भ्रष्टाचार से की गई तकसीम को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए।
2. 1938-39 में बुजुर्गों द्वारा खरीदी गई जमीन को वापिस किया जाए।
3. सरकारी रिकार्ड में कटिंग/ओवर राइटिंग करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाए।
4. चकबंदी पीड़ित किसानों के खिलाफ दायर दोनों झूठे मुकद्मों को वापिस लिया जाए।

बोलेंगे नहीं... सिर्फ करेंगे
महापंचायत में चकबंदी पीड़ित किसानों ने फैसला लिया है कि पहले वे पूर्व सूचना के आधार पर दिल्ली/चंडीगढ़ कूच करते थे, लेकिन अबकी बार वे किसी प्रकार की कोई सूचना नही देंगे, यदि प्रशासन किसानों की 15 मार्च तक मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर से मुलाकात नहीं करवाता है, तो वे 15 मार्च के बाद कभी भी बिना किसी सूचना के चंडीगढ़ सीएम हाउस पर कूच कर जाएंगे, चाहे दिन हो या रात।

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