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Karnal News: प्रदेश के आढ़तियों की कमीशन सहित 140 करोड़ रुपये की मजदूरी अटकी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 19 Jun 2023 02:22 AM IST
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Wages worth Rs 140 crore stuck including commission of jobbers of the state
- आढ़तियों का गेहूं खरीद कमीशन 86.23 करोड़ और श्रमिकों की मजदूरी है करीब 54.58 करोड़ रुपये
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- अधिकतर मजदूर बिहार और उत्तर प्रदेश के, जो बिना मजदूरी अपने राज्य लौट चुके
- हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन ने ब्याजसहित भुगतान की मांग की

देव शर्मा
करनाल। गेहूं की खरीद बंद हुए एक महीने से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन हरियाणा के करीब 35 हजार से अधिक आढ़तियों और दो लाख से अधिक श्रमिकों को उनकी मजदूरी अब तक नहीं मिली है। हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के अनुसार कुल गेहूं खरीद पर आढ़तियों के कमीशन व मजदूरी मिलाकर करीब 140 करोड़ रुपये बकाया है। बिहार, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों से बड़ी संख्या में श्रमिक आकर हरियाणा की अनाज मंडियों में मजदूरी करते हैं, लेकिन इस बार समय पर मजदूरी नहीं मिल पाने के कारण उन्हें खाली हाथ ही अपने राज्यों को लौटना पड़ा है।
करनाल अनाज मंडी में ही करीब 4500 श्रमिक मजदूरी करते हैं, इसी तरह से हरियाणा की करीब 110 अनाज मंडियों के साथ-साथ गेहूं क्रय केंद्रों आदि पर बड़ी संख्या में श्रमिकों ने गेहूं खरीद सीजन में पूरे समय मजदूरी की है। जिससे तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद बेहतर तरीके से गेहूं की खरीद हो सकी है। इस बार आढ़तियों ने भी किसी तरह का आंदोलन नहीं किया था। आढ़तियों की 2.5 प्रतिशत आढ़ती की मांग भी पीछे छूट गई थी। सरकार द्वारा निर्धारित 46 रुपये प्रति क्विंटल को ही आधार मानकर खरीद की गई। इस बार गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2125 रुपये प्रति क्विंटल रहा। इस बार हैफेड की खरीद खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग से अधिक रही।
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हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के स्टेट चेयरमैन रजनीश चौधरी ने बताया कि खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अनुसार प्रदेश में गेहूं की कुल खरीद 18745853.5 क्विंटल हुई है, उसके अनुसार प्रदेशभर के आढ़तियों की कुल आढ़त 46 रुपये प्रति क्विंटल के अनुसार 86 करोड़ 23 लाख नौ हजार 261 रुपये होती है। जबकि प्रदेश की सभी मंडियों की कुल खरीद के अनुसार 54 करोड़ 58 लाख 79 हजार 253 रुपये की मजदूरी बनती है। गेहूं की खरीद 15 मई को बंद हो चुकी है, लेकिन अभी किसी भी आढ़ती या श्रमिक को मजदूरी नहीं मिल सकी है।
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आढ़तियों से उधार लेकर लौटे श्रमिक
राष्ट्रीय कामगार संघ के प्रदेशाध्यक्ष जंगबहादुर यादव ने बताया कि नरवाना, उंचाना, डबवाली, कैथल, जींद आदि कुछ अनाज मंडियों में अधिकतर स्थानीय यानी हरियाणा के श्रमिक रहते हैं, लेकिन प्रदेश की अन्य अधिकांश मंडियों में सर्वाधिक बिहार, इसके बाद यूपी आदि के श्रमिक ही हैं, जिनकी संख्या एक लाख से भी अधिक है। ये सीजन शुरू होने पर हरियाणा में आते हैं और सीजन खत्म होने के बाद इकट्ठी मजदूरी लेकर अपने राज्य लौटते हैं, क्योंकि शादी ब्याह, भवन निर्माण आदि कई तरह के कार्य करने होते हैं लेकिन अभी तक श्रमिकों को मजदूरी नहीं मिली है, जिसके कारण अपने आढ़तियों से ही धन उधार लेकर अपने राज्यों को लौटे हैं।
ब्याज सहित दिया जाए कमीशन और मजदूरी
हरियाणा सरकार ने वादा किया था कि गेहूं खरीद समाप्त होने के एक सप्ताह के बाद ही सभी आढ़तियों का कमीशन व मजदूरी दे दी जाएगी, अन्यथा की स्थिति में उस पर ब्याज दिया जाएगा। ज्यादातर श्रमिक प्रवासी हैं, जो धन नहीं मिलने के कारण थोड़ा उधार लेकर खाली हाथ अपने राज्यों को लौट चुके हैं। अब सरकार को अपने वादे के मुताबिक बकाया कमीशन व मजदूरी को ब्याज सहित देना चाहिए।

- रजनीश चौधरी, स्टेट चेयरमैन हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने सरकार से अनुमति ले ली है, बजट भी आ गया है। एक-दो दिन में ही आढ़तियों का कमीशन व श्रमिकों की मजदूरी का भुगतान शुरू कर दिया जाएगा। इसमें किसी तरह की समस्या नहीं है।
-अनिल कुमार कालरा, डीएफएससी करनाल
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