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Karnal News: बिना डिग्री मेडिकल स्टोर पर किया जा रहा था इलाज
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संवाद न्यूज एजेंसी
घरौंडा। फुरलक रोड स्थित एक मेडिकल स्टोर पर वीरवार को स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने दबिश दी। स्टोर संचालक बिना वैध मेडिकल डिग्री के मरीजों को ड्रिप चढ़ाता था। मौके पर छह मरीज मिले, जिनमें चार को पहली मंजिल पर अलग कमरे में ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा था।
टीम ने मौके से इलाज से संबंधित दवाइयां व ग्लूकोज की बोतलें जब्त कर ली हैं जबकि मेडिकल स्टोर को बंद करा दिया। जांच के दौरान संचालक मुकेश कुमार के पास डी-फार्मा की डिग्री पाई गई है जो केवल डॉक्टर की पर्ची पर दवा देने के लिए वैध होती है, इलाज के लिए नहीं।
पीएनडीटी डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. शीनू चौधरी ने बताया कि मेडिकल स्टोर पर इलाज की पूर्ण व्यवस्था थी और पहली मंजिल पर अलग कमरा बनाकर मरीजों को ड्रिप लगाई जा रही थी। यह पूरी तरह अवैध है और स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस को शिकायत सौंपी है। एसएमओ डॉ. मुनेश गोयल ने पुष्टि की कि बिना योग्यता के इलाज किया जा रहा था, जो कानूनन गलत है। मेडिकल स्टोर संचालक मुकेश कुमार ने बताया कि उनके पास डी-फार्मा का लाइसेंस है और वह सिर्फ प्राथमिक उपचार करते हैं। उनका दावा है कि मरीज उनके जानकार थे और डॉक्टर की पर्ची पर ही ड्रिप लगाई जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी ने रंजिशन शिकायत की है, फिर भी वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
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जांच अधिकारी जयभगवान ने बताया कि मेडिकल स्टोर पर बिना अनुमति के इलाज किया जा रहा था। स्वास्थ्य विभाग ने उपचार में इस्तेमाल हो रही दवाइयां जब्त की हैं, हालांकि कोई प्रतिबंधित या नशीली दवा नहीं मिली है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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घरौंडा। फुरलक रोड स्थित एक मेडिकल स्टोर पर वीरवार को स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने दबिश दी। स्टोर संचालक बिना वैध मेडिकल डिग्री के मरीजों को ड्रिप चढ़ाता था। मौके पर छह मरीज मिले, जिनमें चार को पहली मंजिल पर अलग कमरे में ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा था।
टीम ने मौके से इलाज से संबंधित दवाइयां व ग्लूकोज की बोतलें जब्त कर ली हैं जबकि मेडिकल स्टोर को बंद करा दिया। जांच के दौरान संचालक मुकेश कुमार के पास डी-फार्मा की डिग्री पाई गई है जो केवल डॉक्टर की पर्ची पर दवा देने के लिए वैध होती है, इलाज के लिए नहीं।
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पीएनडीटी डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. शीनू चौधरी ने बताया कि मेडिकल स्टोर पर इलाज की पूर्ण व्यवस्था थी और पहली मंजिल पर अलग कमरा बनाकर मरीजों को ड्रिप लगाई जा रही थी। यह पूरी तरह अवैध है और स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस को शिकायत सौंपी है। एसएमओ डॉ. मुनेश गोयल ने पुष्टि की कि बिना योग्यता के इलाज किया जा रहा था, जो कानूनन गलत है। मेडिकल स्टोर संचालक मुकेश कुमार ने बताया कि उनके पास डी-फार्मा का लाइसेंस है और वह सिर्फ प्राथमिक उपचार करते हैं। उनका दावा है कि मरीज उनके जानकार थे और डॉक्टर की पर्ची पर ही ड्रिप लगाई जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी ने रंजिशन शिकायत की है, फिर भी वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
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जांच अधिकारी जयभगवान ने बताया कि मेडिकल स्टोर पर बिना अनुमति के इलाज किया जा रहा था। स्वास्थ्य विभाग ने उपचार में इस्तेमाल हो रही दवाइयां जब्त की हैं, हालांकि कोई प्रतिबंधित या नशीली दवा नहीं मिली है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।