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Karnal News: बच्चों को सिखाने का पंचपदी सिद्धांत बताया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 11 Dec 2024 05:07 AM IST
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Told the Panchapadi principle of teaching children
- प्रशिक्षण कार्यशाला में जेबीटी सीख रहे पढ़ाने के नए तरीके
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- 550 शिक्षक ले रहे प्रशिक्षण, प्रदेश स्तरीय टीम ने किया निरीक्षण

माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। बालवाटिका बच्चों के भविष्य की नींव है। इस दौरान उनकी पढ़ाई में रुचि बनेगी तो वे भविष्य में विषयों को भी रुचि लेकर पढ़ेंगे और उनका पढ़ाई में मन लगेगा। इसलिए पढ़ाने के ऐसे तरीके तैयार करें, जिसमें खेल के साथ-साथ सीखाने की पद्धति भी हो। यह कहना है अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञों का। मौका है बालवाटिका के जेबीटी के लिए चल रहे प्रशिक्षण शिविर का।

जिसका आयोजन पीएमश्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के सभागार में किया जा रहा है। जिले के करीब 550 जेबीटी यह प्रशिक्षण ले रहे हैं। पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन स्टेट निपुण सदस्य मोक्षित जैन और निपुण जिला समन्वयक विपिन कुमार ने निरीक्षण किया। विपिन कुमार ने कहा कि 3 से 8 वर्ष के बच्चों का बुनियादी चरण सबसे महत्वपूर्ण है। मास्टर ट्रेनर विकास और शोभा ने पंचकोषीय विकास के बारे में विस्तार से बताया। मास्टर ट्रेनर विजय एवं हेमा ने बच्चों को सिखाने का पंचपदी के सिद्धांत के बारे में विस्तार से बताया। मास्टर ट्रेनर मंजीत और विनोद ने बताया कि बच्चे कैसे सीखते हैं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर मास्टर ट्रेनर बलजीत सिंह, दलीप सिंह, कुसुम, विनोद, मंजीत सिंह और अनुप सिंह ने विषय पर प्रकाश डाला।
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प्रशिक्षण उपरांत प्रमाणपत्र करना होगा अपलोड
विदित हो कि राजकीय विद्यालयों में चल रही बालवाटिका के शिक्षक खंड स्तर पर और मॉडल संस्कृति विद्यालयों के शिक्षकों के लिए अलग से जिला स्तर पर शिविर आयोजित किया गया है। प्रत्येक बालवाटिका शिक्षक के लिए प्रशिक्षण अनिवार्य किया है। इसके लिए स्कूल मुखिया की जिम्मेदारी तय की गई है। प्रशिक्षण उपरांत शिक्षकों को अपने प्रमाणपत्र भी पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। विभाग की ओर से प्रदेश भर के शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के लिए अक्तूबर माह में केआरपी यानी की रिसोर्स पर्सन तैयार किए गए थे। अब दो-दो केआरपी शिक्षकों को पढ़ाई में बदलते तरीके और विद्यार्थियों की रुचि बनाने जैसे गुर दे रहे हैं।
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