{"_id":"68e813ed713fe3f4ee0e5c69","slug":"today-married-women-will-do-sixteen-adornments-and-observe-a-fast-for-the-long-life-of-their-moon-karnal-news-c-18-knl1008-756133-2025-10-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: आज सोलह शृंगार कर अपने चांद की दीर्घायु के लिए व्रत रखेंगी सुहागिनें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: आज सोलह शृंगार कर अपने चांद की दीर्घायु के लिए व्रत रखेंगी सुहागिनें
Fri, 10 Oct 2025 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Fri, 10 Oct 2025 01:28 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। करवाचौथ का पर्व आज है, हर सुहागिन अपने चांद (पति) की दीर्घायु के लिए व्रत रखेगी और शाम को चांद का दीदार कर अपने पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत पूर्ण करेंगी। सनातन धर्म में चंद्रमा की पूजा का आध्यात्मिक महत्व है, क्योंकि चंद्रमा को मन, शांति, समृद्धि और भावनात्मक स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। चंद्रमा की पूजा से नकारात्मक विचारों से मुक्ति, स्वास्थ्य लाभ, और जीवन में शुभता व इच्छाओं की पूर्ति होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया है, जिससे उसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
माना जाता था कि सबसे पहले माता पार्वती ने इस व्रत की शुरुआत की थी। ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि आधुनिकता की चकाचौंध के बीच पर्व को मनाने में बाजारीकरण हावी हो गया लेकिन इस पर्व में सुहागिन का पूर्ण शृंगार करने का उल्लेख धर्मग्रंथों में भी मिलता है। सुबह चार से पहले व्रती सुगाहिनें सरगी खाएंगी, इसके बाद स्नान आदि करके भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा करके अपने पति की दीर्घायु के लिए व्रत की स्वीकार्यता के लिए संकल्प करेंगी। इसके बाद दोपहर को करवा चौथ व्रत की कथा सुनेंगी और शाम को चंद्रदर्शन के बाद प्रसाद ग्रहण करके अपना व्रत पूरा करेंगी।
पूजा का शुभ समय
- पूजा का शुभ समय सुबह 9:15 से 10:40 बजे तक रहेगा। इसके बाद दोपहर 1:35 बजे तक व्रत कथा सुनी जा सकती है।
चंद्रोदय का समय
- करवा चौथ की रात को करनाल में चंद्र का उदय समय 8:17 बजे है। इसके बाद सुहागिनें चंद्रदर्शन कर अपना व्रत संपन्न कर सकेंगी।
विज्ञापन
करनाल। करवाचौथ का पर्व आज है, हर सुहागिन अपने चांद (पति) की दीर्घायु के लिए व्रत रखेगी और शाम को चांद का दीदार कर अपने पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत पूर्ण करेंगी। सनातन धर्म में चंद्रमा की पूजा का आध्यात्मिक महत्व है, क्योंकि चंद्रमा को मन, शांति, समृद्धि और भावनात्मक स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। चंद्रमा की पूजा से नकारात्मक विचारों से मुक्ति, स्वास्थ्य लाभ, और जीवन में शुभता व इच्छाओं की पूर्ति होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया है, जिससे उसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
माना जाता था कि सबसे पहले माता पार्वती ने इस व्रत की शुरुआत की थी। ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि आधुनिकता की चकाचौंध के बीच पर्व को मनाने में बाजारीकरण हावी हो गया लेकिन इस पर्व में सुहागिन का पूर्ण शृंगार करने का उल्लेख धर्मग्रंथों में भी मिलता है। सुबह चार से पहले व्रती सुगाहिनें सरगी खाएंगी, इसके बाद स्नान आदि करके भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा करके अपने पति की दीर्घायु के लिए व्रत की स्वीकार्यता के लिए संकल्प करेंगी। इसके बाद दोपहर को करवा चौथ व्रत की कथा सुनेंगी और शाम को चंद्रदर्शन के बाद प्रसाद ग्रहण करके अपना व्रत पूरा करेंगी।
विज्ञापन
पूजा का शुभ समय
- पूजा का शुभ समय सुबह 9:15 से 10:40 बजे तक रहेगा। इसके बाद दोपहर 1:35 बजे तक व्रत कथा सुनी जा सकती है।
चंद्रोदय का समय
- करवा चौथ की रात को करनाल में चंद्र का उदय समय 8:17 बजे है। इसके बाद सुहागिनें चंद्रदर्शन कर अपना व्रत संपन्न कर सकेंगी।