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Karnal News: आवाज उठाने के लिए सही और गलत का पता होना जरूरी
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आवाज उठाने के लिए सही और गलत का पता होना जरूरी
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। डीएसपी संदीप कुमार ने अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित पुलिस की पाठशाला में साइबर सुरक्षा और यातायात नियमों के बारे में बताया। सोमवार को एसडी आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल के दौरान या रास्ते पर चलते हुए हमारे साथ कुछ गलत हो जाता है तो हम सब कहते हैं कि गलत के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। लेकिन इसके लिए हमें यह पता होना जरूरी है कि गलत और सही क्या है। यदि इसका बोध है तो कुछ गलत होने का रोका जा सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रिंसिपल अनिता सचदेवा और स्कूल की गतिविधि प्रभारी आरती शर्मा ने की। मुख्य अतिथि डीएसपी संदीप कुमार रहे। जिला पुलिस के जागरूकता कार्यक्रमों के समन्वयक अजय कुमार ने विशेष रूप से शिरकत की। समन्वयक अजय कुमार ने विद्यार्थियों को नैतिक कर्तव्यों और गुरु व शिष्य की मर्यादाओं के प्रति जागरूक किया।
डीएसपी ने कहा कि हम सभी सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमें इसके नफे और नुकसान का पता ही नहीं है। सभी ने अपनी प्रोफाइल बनाई हुई है। पब्लिक प्रोफाइल में हम अपनी निजी जानकारी साझा करते हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर हैकर्स और साइबर अपराधी भी सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। वे इन साइट से हमारी जानकारी लेकर फेक प्रोफाइल तैयार करके वारदात को अंजाम देते हैं। इसी तरह लिंक भेजकर या एपीके फाइल भेजकर साइबर अपराधी हमारे बैंक खातों में भी सेंध लगाते हैं। इनसे बचने के लिए जागरूक होना बेहद जरूरी है।
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कार्यक्रम में मंच संचालन शिक्षिका मृदुला ने किया। स्कूल अधीक्षक योगेश भारद्वाज, उपाधीक्षक राकेश कुमार और प्रिया मित्तल मौजूद रहे।
फोटो-- 03
डिजिटल अरेस्ट कुछ नहीं होता
पुलिस समन्वयक अजय कुमार ने बताया कि आजकल डिजिटल अरेस्ट काफी चल रहा है। साइबर अपराधियों ने वारदात के लिए यह तरीका अपनाया है। जिसमें वे नकली पुलिस अधिकारी बनकर वारदात को अंजाम देते हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट कुछ नहीं होता है। इसलिए जब भी कोई इस तरह की वारदात को अंजाम देते हुए जानकारी मांगे तो उससे बात न करें। पुलिस कभी भी वीडियो कॉल पर अरेस्ट नहीं करती है। बातचीत के दौरान जिस व्यक्ति के नाम से जानकारी मांगी जा रही है, कॉल को काटकर सबसे पहले उससे बात करके स्थिति स्पष्ट करें। उन्होंने 1930 और 112 नंबर की भी जानकारी दी और विद्यार्थियों को बताया कि यह कैसे काम करता है।
फोटो-- 15
बैंक खाते से संबंधित जानकारी न दें
स्कूल कार्यक्रम प्रभारी आरती शर्मा ने कहा कि साइबर ठग बहुत सक्रिय हैं। वे कई तरीकों से लोगों को बहलाकर उनके बैंक खातों से रुपये ट्रांसफर कर लेते हैं। इसलिए बैंक खाते से संबंधित कोई भी जानकारी और ओटीपी किसी से साझा नहीं करें। साइबर ठग फोन करके घर बैठे रुपये कमाने का लालच दे सकते हैं या फिर बैंक अधिकारी बनकर बात कर सकते हैं।
फोटो-- 06
अनजाने में भी न हो अपराध का शिकार
स्कूल की प्रधानाचार्य अनिता सचदेवा ने कहा कि अक्सर अनजाने में हम किसी अपराध का शिकार होते हैं। इसलिए जागरूक होना जरूरी है। यातायात नियमों व साइबर अपराध से बचने के उपाय परिवार के साथ जरूर साझा करें। उन्होंने कहा कि अक्सर कम पढ़े-लिखे लोग ही साइबर ठगी का शिकार होते हैं। यातायात नियमों का पालन करने की उन्होंने शपथ भी दिलाई।
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करनाल। डीएसपी संदीप कुमार ने अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित पुलिस की पाठशाला में साइबर सुरक्षा और यातायात नियमों के बारे में बताया। सोमवार को एसडी आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल के दौरान या रास्ते पर चलते हुए हमारे साथ कुछ गलत हो जाता है तो हम सब कहते हैं कि गलत के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। लेकिन इसके लिए हमें यह पता होना जरूरी है कि गलत और सही क्या है। यदि इसका बोध है तो कुछ गलत होने का रोका जा सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रिंसिपल अनिता सचदेवा और स्कूल की गतिविधि प्रभारी आरती शर्मा ने की। मुख्य अतिथि डीएसपी संदीप कुमार रहे। जिला पुलिस के जागरूकता कार्यक्रमों के समन्वयक अजय कुमार ने विशेष रूप से शिरकत की। समन्वयक अजय कुमार ने विद्यार्थियों को नैतिक कर्तव्यों और गुरु व शिष्य की मर्यादाओं के प्रति जागरूक किया।
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डीएसपी ने कहा कि हम सभी सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमें इसके नफे और नुकसान का पता ही नहीं है। सभी ने अपनी प्रोफाइल बनाई हुई है। पब्लिक प्रोफाइल में हम अपनी निजी जानकारी साझा करते हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर हैकर्स और साइबर अपराधी भी सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। वे इन साइट से हमारी जानकारी लेकर फेक प्रोफाइल तैयार करके वारदात को अंजाम देते हैं। इसी तरह लिंक भेजकर या एपीके फाइल भेजकर साइबर अपराधी हमारे बैंक खातों में भी सेंध लगाते हैं। इनसे बचने के लिए जागरूक होना बेहद जरूरी है।
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कार्यक्रम में मंच संचालन शिक्षिका मृदुला ने किया। स्कूल अधीक्षक योगेश भारद्वाज, उपाधीक्षक राकेश कुमार और प्रिया मित्तल मौजूद रहे।
फोटो
डिजिटल अरेस्ट कुछ नहीं होता
पुलिस समन्वयक अजय कुमार ने बताया कि आजकल डिजिटल अरेस्ट काफी चल रहा है। साइबर अपराधियों ने वारदात के लिए यह तरीका अपनाया है। जिसमें वे नकली पुलिस अधिकारी बनकर वारदात को अंजाम देते हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट कुछ नहीं होता है। इसलिए जब भी कोई इस तरह की वारदात को अंजाम देते हुए जानकारी मांगे तो उससे बात न करें। पुलिस कभी भी वीडियो कॉल पर अरेस्ट नहीं करती है। बातचीत के दौरान जिस व्यक्ति के नाम से जानकारी मांगी जा रही है, कॉल को काटकर सबसे पहले उससे बात करके स्थिति स्पष्ट करें। उन्होंने 1930 और 112 नंबर की भी जानकारी दी और विद्यार्थियों को बताया कि यह कैसे काम करता है।
फोटो
बैंक खाते से संबंधित जानकारी न दें
स्कूल कार्यक्रम प्रभारी आरती शर्मा ने कहा कि साइबर ठग बहुत सक्रिय हैं। वे कई तरीकों से लोगों को बहलाकर उनके बैंक खातों से रुपये ट्रांसफर कर लेते हैं। इसलिए बैंक खाते से संबंधित कोई भी जानकारी और ओटीपी किसी से साझा नहीं करें। साइबर ठग फोन करके घर बैठे रुपये कमाने का लालच दे सकते हैं या फिर बैंक अधिकारी बनकर बात कर सकते हैं।
फोटो
अनजाने में भी न हो अपराध का शिकार
स्कूल की प्रधानाचार्य अनिता सचदेवा ने कहा कि अक्सर अनजाने में हम किसी अपराध का शिकार होते हैं। इसलिए जागरूक होना जरूरी है। यातायात नियमों व साइबर अपराध से बचने के उपाय परिवार के साथ जरूर साझा करें। उन्होंने कहा कि अक्सर कम पढ़े-लिखे लोग ही साइबर ठगी का शिकार होते हैं। यातायात नियमों का पालन करने की उन्होंने शपथ भी दिलाई।

आवाज उठाने के लिए सही और गलत का पता होना जरूरी