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युवा गए सात समुंदर पार, ईब कौन करें मतदान...
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। ग्रामीण क्षेत्रों से शिक्षा और रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में युवा विदेशों में हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव के दौरान जहां एक-एक वोट की मारामारी रही, वहीं प्रत्याशियों में उनकी कमी खलती दिखी। यही नहीं कई गांवों में प्रचार अभियान और प्रत्याशियों के बस्तों की कमान भी बच्चों और महिलाओं के हाथों में दिखी।
कुंजपुरा खंड के गांव नगला रोडान के ग्रामीणों ने बताया की पिछले कुछ वर्षो में 100 से ज्यादा युवा विदेशों में चले गए। यह स्थिति और भी कई गांवों में देखी गई। जैसे कुंजपुरा, नेवल, घीड़, बड़ा गांव के भी काफी संख्या में युवा विदेश जा चुके हैं। नेवल गांव के ग्रामीण बोधराज और सुभाष चंद ने बताया कि मतदाता सूची में युवाओं के नाम तो हैं, जिससे प्रत्याशी अपने धडे़ के वोटों की गिनती करता है। कई बार उनके वोट डलवाने के भी प्रयास किए जाते हैं, लेकिन सरपंच के चुनाव में यह मुश्किल इसलिए हो जाता है कि सभी प्रत्याशी और समर्थक गांव के अधिकतर ग्रामीणों को अच्छी तरह से जानते पहचानते हैं। ब्यूरो
पांच गांवों में कम हो गए एक हजार वोट
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। विधानसभा क्षेत्र नीलोखेड़ी में बड़ी संख्या में युवाओं के विदेश चले जाने से सूची में मतदाताओं की संख्या कम हो गई है, जिससे गांवों में होने वाले मतदान पर भी असर पड़ा है। पांच गांवों की अगर बात करें तो करीब आठ हजार से अधिक वोट थे, लेकिन अब करीब सात हजार रह गए हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि जो लोग विदेश में रह रहे हैं। उनकी वोट से भी मतदान पर असर पड़ा है। इस बार करीब एक हजार वोटर कम हुए हैं। वोट कम होने से उम्मीदवारों की हार-जीत पर भी असर पड़ेगा। अंजनथली, नीलोखेड़ी, पखाना, ग्रामीणों ने बताया कि पंच-सरपंच के उम्मीदवारों ने अपने-अपने परिचितों से वोट के लिए अपील की थी। इग्लैंड, लंदन, कनाडा, अमेरिका आदि देशों में रहने वालों से बातचीत की, मगर वे लोग वोट डालने नहीं आ सके। ऐसे में उम्मीदवारों को निराश होना पड़ा। इसके अलावा उम्मीदवार और उनके समर्थक पोलिंग बूथों पर खड़े होकर लोगों से वोट मांगते नजर आए।
कामकाज छोड़ पहले डाला वोट
महिलाओं ने घर का कामकाज छोड़ पहले वोट डालकर अपनी जिम्मेदारी पूरी की। सात बजते ही पोलिंग बूथों पर लंबी कतार लगी दिखाई दी। वोट डालने के बाद ही वे अपने घरेलू कामकाज में जुटीं। महिलाएं बच्चों को लेकर वोट डालने पहुंची।
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करनाल। ग्रामीण क्षेत्रों से शिक्षा और रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में युवा विदेशों में हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव के दौरान जहां एक-एक वोट की मारामारी रही, वहीं प्रत्याशियों में उनकी कमी खलती दिखी। यही नहीं कई गांवों में प्रचार अभियान और प्रत्याशियों के बस्तों की कमान भी बच्चों और महिलाओं के हाथों में दिखी।
कुंजपुरा खंड के गांव नगला रोडान के ग्रामीणों ने बताया की पिछले कुछ वर्षो में 100 से ज्यादा युवा विदेशों में चले गए। यह स्थिति और भी कई गांवों में देखी गई। जैसे कुंजपुरा, नेवल, घीड़, बड़ा गांव के भी काफी संख्या में युवा विदेश जा चुके हैं। नेवल गांव के ग्रामीण बोधराज और सुभाष चंद ने बताया कि मतदाता सूची में युवाओं के नाम तो हैं, जिससे प्रत्याशी अपने धडे़ के वोटों की गिनती करता है। कई बार उनके वोट डलवाने के भी प्रयास किए जाते हैं, लेकिन सरपंच के चुनाव में यह मुश्किल इसलिए हो जाता है कि सभी प्रत्याशी और समर्थक गांव के अधिकतर ग्रामीणों को अच्छी तरह से जानते पहचानते हैं। ब्यूरो
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पांच गांवों में कम हो गए एक हजार वोट
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। विधानसभा क्षेत्र नीलोखेड़ी में बड़ी संख्या में युवाओं के विदेश चले जाने से सूची में मतदाताओं की संख्या कम हो गई है, जिससे गांवों में होने वाले मतदान पर भी असर पड़ा है। पांच गांवों की अगर बात करें तो करीब आठ हजार से अधिक वोट थे, लेकिन अब करीब सात हजार रह गए हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि जो लोग विदेश में रह रहे हैं। उनकी वोट से भी मतदान पर असर पड़ा है। इस बार करीब एक हजार वोटर कम हुए हैं। वोट कम होने से उम्मीदवारों की हार-जीत पर भी असर पड़ेगा। अंजनथली, नीलोखेड़ी, पखाना, ग्रामीणों ने बताया कि पंच-सरपंच के उम्मीदवारों ने अपने-अपने परिचितों से वोट के लिए अपील की थी। इग्लैंड, लंदन, कनाडा, अमेरिका आदि देशों में रहने वालों से बातचीत की, मगर वे लोग वोट डालने नहीं आ सके। ऐसे में उम्मीदवारों को निराश होना पड़ा। इसके अलावा उम्मीदवार और उनके समर्थक पोलिंग बूथों पर खड़े होकर लोगों से वोट मांगते नजर आए।
कामकाज छोड़ पहले डाला वोट
महिलाओं ने घर का कामकाज छोड़ पहले वोट डालकर अपनी जिम्मेदारी पूरी की। सात बजते ही पोलिंग बूथों पर लंबी कतार लगी दिखाई दी। वोट डालने के बाद ही वे अपने घरेलू कामकाज में जुटीं। महिलाएं बच्चों को लेकर वोट डालने पहुंची।