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Karnal News: तीसरे मेयर के समक्ष होंगी चुनौतियां, 14 साल पुराने मुद्दे आज भी कायम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Mar 2025 02:25 AM IST
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The third mayor will face challenges, 14 year old issues still persist
- पहले कार्यकाल से अटका डेयरी शिफ्टिंग, पुराने निगम भवन, सब्जी मंडी स्थल पर मल्टी स्टोरी पार्किंग का मुद्दा, स्वच्छता रैंकिंग भी लुढ़की
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- सफाई, संपत्ति कर आईडी और एनडीसी की समस्याओं से लोगों परेशान, आज जारी होगा चुनाव परिणाम, रेणु और वधवा में टक्कर



गगन तलवार

करनाल। नगर निगम चुनाव के परिणामों के साथ ही बुधवार को शहर के लोगों को बुधवार को तीसरा मेयर मिल जाएगा। मेयर पद के लिए तीसरी पारी पूर्व मेयर रेणू बाला गुप्ता शुरू करेंगी या पूर्व डिप्टी मेयर मनोज वधवा, यह तो परिणामों के बाद स्पष्ट होगा। लेकिन जो भी मेयर बनेगा, उसके समक्ष शहर के विकास के साथ-साथ यहां की समस्याओं के समाधान करना भी बड़ी चुनौती रहेगी।

क्योंकि नगर निगम के गठन के बाद तीसरी पारी तो शुरू हो रही है, लेकिन जो मसले गठन के समय थे, आज भी वे मौजूद हैं। कई ऐसे मामले हैं, जिनके समाधान के लिए योजनाएं भी बनीं, सपने भी दिखाए गए, वादे भी हुए पर ये योजनाएं सिरे नहीं चढ़ पाई। कई मामलों में विभागीय अड़चनें आईं तो कुछ मामले अधिकारियों की लापरवाही के कारण हल नहीं हो पाए।
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ऐसे में शहर के लोग परेशानियां झेल रहे हैं। अब तो आबादी बढ़ने के साथ ही सड़कों का ट्रैफिक और दबाव भी बढ़ा है। अब इन समस्याओं कार हल करना भी जरूरी है। इसके अलावा स्वच्छ सर्वेक्षण में जहां करनाल प्रदेश और देश में अग्रणी था, वो खोई साख भी वापस लाने के लिए बड़े प्रयासों की जरूरत है।
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इसके अलावा बरसाती पानी की निकासी, सफाई, सड़कों के गड्ढे, नई कॉलोनियों में विकास, डेयरी शिफ्टिंग, बेसहारा पशु, संपत्ति आईडी, सड़कों पर लटकती तारों का जाल, स्ट्रीट लाइटें, कुत्ते, बंदरों का आतंक, सार्वजनिक शौचालयों की बदहाली सहित अन्य समस्याओं से निजात दिलाने के लिए भी शहर की सरकार को काम करना होगा।



तीसरे मेयर के समक्ष ये रहेंगी 10 चुनौतियां-

डेयरी 13 वर्ष में महज 10 प्रतिशत हुई शिफ्ट : यह प्रोजेक्ट नगर निगम के गठन के समय 2012 का है। पिंगली स्थित डेयरी स्थल पर 231 प्लॉट हैं। पिछले 13 वर्षों में महज 141 अलॉट और केवल 26 में डेयरी शिफ्ट हुईं। डेयरियों से निकलने वाली गंदगी सीवरेज चोक करती है और नगर निगम इन्हें शिफ्ट करने में फेल साबित हुआ है।

कच्ची कॉलोनियों में विकास की आस : अमरूत के तहत स्टोम वाटर लाइन, सीवरेज लाइन, एसटीपी, आईपीएस (इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन), रेन वाटर हार्वेस्टर आदि कार्य होने हैं। 2017 की इस प्लानिंग का काफी कार्य अधर में है। कई कॉलोनियां वैध हो चुकी हैं, तब भी यहां समस्याओं से निजात नहीं मिली।

पुराना नगर निगम भवन : 2017 में यहां से नगर निगम शिफ्ट हो गया था। यहां पर 2015 से मल्टी स्टोरी पार्किंग या मॉल बनाने की योजना है, यह कार्य भी शुरू नहीं हुआ।

मल्टी स्टोरी पार्किंग : 2016 में पुरानी सब्जी मंडी को नई अनाज मंडी के पास शिफ्ट किया था। यहां पर मल्टी स्टोरी पार्किंग व मॉल बनाने की योजना भी अधर में है।

आठ वर्ष से नहीं बन पाए वेंडिंग जोन : शहर में सब्जी व फल की रेहड़ी-फड़ी को कैथल रोड और काछवा रोड स्थित रेलवे ओवरब्रिज के नीचे सहित अन्य जगहों पर शिफ्ट करने का प्रोजेक्ट 2017 से लटका है।

स्वच्छता रैंकिंग में 17वें से 115वें पायदान पर आए : स्वच्छ सर्वेक्षण-2017 से 2020 तक करनाल प्रदेश में नंबर वन रहा। 2020 में राष्ट्रीय रैंकिंग भी 17 रही। 2021 के बाद रैंकिंग 17 से बड़ी गिरावट के साथ 86 पर आ गई। 2022 में 85वीं रैंकिंग आई और प्रदेश में चौथे नंबर पर चला गया। 2023 में राष्ट्रीय रैंकिंग में पिछड़ा, लेकिन हरियाणा के 20 शहरों में दूसरे स्थान पर आए।

बेसहारा पशु, कुत्ते और बंदर ले रहे जान : शहर में सड़कों पर बेसहारा पशु गोवंश विधानसभा चुनाव का भी मुद्दा बने, लेकिन पशुओं को हटाने में निगम पिछले 10 साल से फेल साबित हुआ है। इसके अलावा कुत्ते और बंदरों के आतंक से भी हर साल कई लोगों की जान जाती है, लेकिन इसका समाधान महज अभियान चलाने तक ही सिमटा।

बरसात के साथ बहे करोड़ों रुपये : बरसाती पानी की निकासी बड़ा मुद्दा है। पिछले 10 वर्षों में इसके समाधान और नाले व सीवरेज की सफाई पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च हुए फिर भी बरसात में शहर की सड़कें डूबीं। लाइनपार क्षेत्र में लोगों के घरों में भी पानी जमा होता है।

प्रॉपर्टी आईडी की गलतियां : पिछले चार वर्ष से लोग संपत्ति आईडी की गलतियों से परेशान हैं। रोजाना नगर निगम कार्यालय में सैकड़ों शिकायतें आती हैं। कहीं संपत्ति का क्षेत्र, मालिक का नाम, पता और मोबाइल नंबर गलत है तो कहीं लोगों को आईडी अलग कराने में परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसकी एवज में हजारों रुपये भी खर्च हो रहे हैं।


जमीन पर कब्जे और यातायात जाम : बाजार के अलावा कॉलोनियों में भी निगम की जमीन पर कब्जे हैं, इन्हें हटाया नहीं जा सका। सड़कों पर अतिक्रमण का समाधान भी नहीं हो पाया। लिहाजा शहर जाम से जूझता रहा। हालांकि टी-फ्लाईओवर से जाम से निजात दिलाने का दावा है पर अतिक्रमण पर कार्रवाई महज औपचारिकता ही है।
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