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बेटा स्कूल में बैठा पूछा रहा पापा कहां हैं, क्या जवाब दूंगी...
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कैंटीन में फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त करने के इरादे से ही रणजीत सुबह घर से आया था। इसके लिए वह बुधवार को सुबह एक घंटे पहले स्कूल आया। परिजनों के अनुसार रोजाना वह सुबह सात बजे स्कूल पहुंचता था, जबकि बुधवार सुबह छह बजे ही घर से निकल गया। पत्नी ने जब जल्दी जाने का कारण पूछा तो उसने कैंटीन का सामान खरीदने का बहाना बनाया।
जब मौत की सूचना मिली तो पत्नी नूर और परिवार के अन्य सदस्य मौके पर पहुंचे। रोते बिलखते हुए वह बोली कि बेटा स्कूल में बैठा पूछा रहा है मेरा पापा कहां है, उसे क्या जवाब दूं। कर्ज देने वाले को तो कर्ज का पैसा मिल जाएगा। पर बेटे को पिता कहां से लाकर दूं। मुझसे तो बात कर लेता। मुझे कर्ज के बारे में नहीं पता था, न लेने वाले ने बताया न देने वाले ने। परेशानी बताते तो समाधान करते। सुबह कैंटीन का सामान लेने की बात कहकर वह घर से निकले थे। मैंने कहा था कि पैसे नहीं हैं तो सामान कहां से लाओगे। उन्होंने जवाब दिया कि दुकानदार से मेरी बात हो गई है मैं सामान ले आऊंगा। मुझे क्या पता था वह ऐसा कदम उठाएंगे।
पत्नी नूर का कहना है कि जिनकी वजह से मेरे पति ने आत्महत्या की है उन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन लोगों ने मेरे पति को इतना प्रताड़ित किया कि मजबूर होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है। पत्नी के अलावा माता-पिता का रो-रो कर बुरा हाल था।
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परिवार में अकेला कमाने वाला था
रणजीत के गांव वालों ने बताया कि वह शरीफ और इमानदार था। रणजीत आठ साल पहले पंजाब के राजपुरा से काछवा आया था, इस समय चड्ढा कॉलोनी में किराए के मकान में रहता था। उसका छह साल का बेटा भी इसी स्कूल में पढ़ता था, जहां वह कैंटीन चलाता था। रणजीत की मां ने बताया कि परिवार के पास अब खाने का भी संकट है। वह अकेला कमाने वाला था, उसी के सहारे परिवार चल रहा था।
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जब मौत की सूचना मिली तो पत्नी नूर और परिवार के अन्य सदस्य मौके पर पहुंचे। रोते बिलखते हुए वह बोली कि बेटा स्कूल में बैठा पूछा रहा है मेरा पापा कहां है, उसे क्या जवाब दूं। कर्ज देने वाले को तो कर्ज का पैसा मिल जाएगा। पर बेटे को पिता कहां से लाकर दूं। मुझसे तो बात कर लेता। मुझे कर्ज के बारे में नहीं पता था, न लेने वाले ने बताया न देने वाले ने। परेशानी बताते तो समाधान करते। सुबह कैंटीन का सामान लेने की बात कहकर वह घर से निकले थे। मैंने कहा था कि पैसे नहीं हैं तो सामान कहां से लाओगे। उन्होंने जवाब दिया कि दुकानदार से मेरी बात हो गई है मैं सामान ले आऊंगा। मुझे क्या पता था वह ऐसा कदम उठाएंगे।
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पत्नी नूर का कहना है कि जिनकी वजह से मेरे पति ने आत्महत्या की है उन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन लोगों ने मेरे पति को इतना प्रताड़ित किया कि मजबूर होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है। पत्नी के अलावा माता-पिता का रो-रो कर बुरा हाल था।
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परिवार में अकेला कमाने वाला था
रणजीत के गांव वालों ने बताया कि वह शरीफ और इमानदार था। रणजीत आठ साल पहले पंजाब के राजपुरा से काछवा आया था, इस समय चड्ढा कॉलोनी में किराए के मकान में रहता था। उसका छह साल का बेटा भी इसी स्कूल में पढ़ता था, जहां वह कैंटीन चलाता था। रणजीत की मां ने बताया कि परिवार के पास अब खाने का भी संकट है। वह अकेला कमाने वाला था, उसी के सहारे परिवार चल रहा था।