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Karnal News: शिव पुराण सुनकर पवित्र हो जाता है मन
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- श्री खाटू श्याम मंदिर में श्री शिव पुराण कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। श्री खाटू श्याम मंदिर में श्री शिव पुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा व्यास आशीष सागर स्नेही बंधु ने कहा कि जिस प्रकार भागीरथी गंगा में स्नान करने से पवित्रता आती है उसी तरह शिव पुराण रूपी गंगा में गोते लगाने से मन पवित्र हो जाता है। शिव पुराण की कथा सुनने से सभी प्रकार के दुख दूर होते हैं। भोले बाबा थोड़ी पूजा में ही प्रसन्न हो जाते हैं। हमें माया को छोड़ प्रभु से प्रेम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी संस्कृति के बारे में पढ़ना लिखना चाहिए ताकि वो संस्कारवान बन सके। उन्होंने कहा कि जो आनंद माता-पिता बोलने में है वो मॉम डेड बोलने में नहीं इसलिए युवाओं को पश्चिमी सभ्यता के पीछे नहीं भागना चाहिए। उन्होंने पतिव्रता धर्म क्या हैं ये बताते हुए कहा कि शंकर जी के विवाह के बाद विदाई के समय मैना जो कि पार्वती की मां हैं एक ब्राह्मणी को बुलवाकर पति व्रत धर्म के नियम पार्वती को सुनवातीं हैं।
महिला को संध्या के समय कभी भी घर की दहलीज पर नहीं बैठना चाहिए, क्योंकि संध्या के समय दहलीज पर भगवान नरसिंह बैठते हैं। कभी भी झाडू पर पैर नहीं लगाना चाहिए और घर के अंदर रखे ओखल पर भी पैर नहीं लगना चाहिए अगर गलती से पैर लग भी जाए तो उसे छू कर माफी मांगनी चाहिए। कथा का आयोजन गोयल परिवार की ओर से किया जा रहा है। इस अवसर पर रामधन गोयल, राधे श्याम, नरेश, नीरज, दीपक, अंजु, आरूषी और पुष्कर सिंगला के साथ अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। श्री खाटू श्याम मंदिर में श्री शिव पुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा व्यास आशीष सागर स्नेही बंधु ने कहा कि जिस प्रकार भागीरथी गंगा में स्नान करने से पवित्रता आती है उसी तरह शिव पुराण रूपी गंगा में गोते लगाने से मन पवित्र हो जाता है। शिव पुराण की कथा सुनने से सभी प्रकार के दुख दूर होते हैं। भोले बाबा थोड़ी पूजा में ही प्रसन्न हो जाते हैं। हमें माया को छोड़ प्रभु से प्रेम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी संस्कृति के बारे में पढ़ना लिखना चाहिए ताकि वो संस्कारवान बन सके। उन्होंने कहा कि जो आनंद माता-पिता बोलने में है वो मॉम डेड बोलने में नहीं इसलिए युवाओं को पश्चिमी सभ्यता के पीछे नहीं भागना चाहिए। उन्होंने पतिव्रता धर्म क्या हैं ये बताते हुए कहा कि शंकर जी के विवाह के बाद विदाई के समय मैना जो कि पार्वती की मां हैं एक ब्राह्मणी को बुलवाकर पति व्रत धर्म के नियम पार्वती को सुनवातीं हैं।
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महिला को संध्या के समय कभी भी घर की दहलीज पर नहीं बैठना चाहिए, क्योंकि संध्या के समय दहलीज पर भगवान नरसिंह बैठते हैं। कभी भी झाडू पर पैर नहीं लगाना चाहिए और घर के अंदर रखे ओखल पर भी पैर नहीं लगना चाहिए अगर गलती से पैर लग भी जाए तो उसे छू कर माफी मांगनी चाहिए। कथा का आयोजन गोयल परिवार की ओर से किया जा रहा है। इस अवसर पर रामधन गोयल, राधे श्याम, नरेश, नीरज, दीपक, अंजु, आरूषी और पुष्कर सिंगला के साथ अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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