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अच्छे कर्मों का फल व्यर्थ नहीं जाता : हरिहर मुद्गल
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श्री बजरंग सेवा दल की ओर से पितृ पक्ष के अवसर पर श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
नीलोखेड़ी। श्री बजरंग सेवा दल की ओर से पितृ पक्ष के अवसर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा में प्रवचन करते हुए हरिहर मुद्गल महाराज ने कहा कि मनुष्य द्वारा किए गए अच्छे कर्मों का फल कभी व्यर्थ नहीं जाता है, अच्छे कर्मों का फल तो समय आने पर ही आवश्यकतानुसार मिलता है। इसलिए हमें अच्छे कर्म निरंतर जारी रखने चाहिए।
उन्होंने कहा कि भगवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि बिना फल की चिंता किए कर्म करो और इसका परिणाम और फल प्रभु की इच्छा पर छोड़ दें। उन्होंने मन चल वृंदावन की ओर... भजन गाकर सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण के जन्म होने की सूचना मिलने पर कंस ने पूतना को क्षेत्र के सभी नवजात शिशुओं की हत्या करने के लिए भेजा। जिसके बाद पूतना ने जब अपने स्तनों पर जहर लगाकर श्रीकृष्ण को दूध पिलाना चाहा तो कृष्ण ने पूतना के प्राण लेकर उसका उद्धार कर मोक्ष प्रदान किया।
ऐसे दयालु प्रभु की शरण में जाने से ही मनुष्य का कल्याण संभव है। जब पूतना का शरीर जलाया जा रहा था तो उसकी चिता में से भी सुगंध आ रही थी। क्योंकि कृष्ण ने जब पूतना की छाती को छूआ और स्तनों को अपने मुंह में लिया तो उसके शरीर का भी उद्धार कर दिया। ऐसे दयालु भगवान की लीलाओं को सुनने और मनन करने से ही कल्याण संभव है। मौके पर सभा के प्रधान वेद कटारिया सहित लछमन दास अरोड़ा, रविन्द्र कत्याल, बलवन्त सिंह, प्रवीन मैहता, तिलक चावला, सुभाष वधवा, सतपाल गांधी, ललित शर्मा, विजय अरोड़ा तथा संजय कटारिया आदि भी सदस्य मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नीलोखेड़ी। श्री बजरंग सेवा दल की ओर से पितृ पक्ष के अवसर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा में प्रवचन करते हुए हरिहर मुद्गल महाराज ने कहा कि मनुष्य द्वारा किए गए अच्छे कर्मों का फल कभी व्यर्थ नहीं जाता है, अच्छे कर्मों का फल तो समय आने पर ही आवश्यकतानुसार मिलता है। इसलिए हमें अच्छे कर्म निरंतर जारी रखने चाहिए।
उन्होंने कहा कि भगवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि बिना फल की चिंता किए कर्म करो और इसका परिणाम और फल प्रभु की इच्छा पर छोड़ दें। उन्होंने मन चल वृंदावन की ओर... भजन गाकर सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण के जन्म होने की सूचना मिलने पर कंस ने पूतना को क्षेत्र के सभी नवजात शिशुओं की हत्या करने के लिए भेजा। जिसके बाद पूतना ने जब अपने स्तनों पर जहर लगाकर श्रीकृष्ण को दूध पिलाना चाहा तो कृष्ण ने पूतना के प्राण लेकर उसका उद्धार कर मोक्ष प्रदान किया।
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ऐसे दयालु प्रभु की शरण में जाने से ही मनुष्य का कल्याण संभव है। जब पूतना का शरीर जलाया जा रहा था तो उसकी चिता में से भी सुगंध आ रही थी। क्योंकि कृष्ण ने जब पूतना की छाती को छूआ और स्तनों को अपने मुंह में लिया तो उसके शरीर का भी उद्धार कर दिया। ऐसे दयालु भगवान की लीलाओं को सुनने और मनन करने से ही कल्याण संभव है। मौके पर सभा के प्रधान वेद कटारिया सहित लछमन दास अरोड़ा, रविन्द्र कत्याल, बलवन्त सिंह, प्रवीन मैहता, तिलक चावला, सुभाष वधवा, सतपाल गांधी, ललित शर्मा, विजय अरोड़ा तथा संजय कटारिया आदि भी सदस्य मौजूद रहे।
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