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Karnal News: मेडिकल विश्वविद्यालय कुटैल के एडमिन ब्लॉक पर ठेकेदार ने जड़ा ताला
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- इस ब्लॉक में बैठते हैं ऑडिट, लेखाजोखा और जांच करने वाले अधिकारी, कंपनी का दावा- अब तक हैंडओवर नहीं की गई इमारत
- हर माह 30 लाख रुपये का बिल भर रहा स्वास्थ्य विभाग
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। पंडित दीन दयाल उपाध्याय मेडिकल यूनिवर्सिटी कुटैल अभी शुरू नहीं हुई थी कि इसके एडमिन ब्लॉक पर ताला लगा दिया गया है। जिसकी वजह से पैरामेडिकल स्टाफ, ऑडिट और लेखाजोखा शाखा के अधिकारियों से लेकर इसके निर्माण की जांच करने वाले अधिकारियों को भी बाहर होना पड़ रहा है। वीरवार को इस विश्वविद्यालय का निर्माण करने वाली कंपनी के ठेकेदार ने फिर से एडमिन ब्लॉक की इमारत पर ताला जड़ दिया। कंपनी का दावा है कि अभी तक इसे आधिकारिक तौर पर स्वास्थ्य विभाग को नहीं सौंपा गया है। जबकि इससे विश्वविद्यालय निर्माण की जांच से लेकर लेखाजोखा रखने का पूरा काम प्रभावित हो रहा है।
एडमिन ब्लॉक के दूसरे और तीसरे तल पर बैठने वाले अधिकारियों का कहना है कि जब जमीन सरकार की है, निर्माण सरकार करा रही है, वे भी सरकार का ही काम कर रहे हैं तो उनके कार्यालय पर ताला कैसे लगाया जा सकता है। उनका पूरा रिकॉर्ड भी इमारत के अंदर ही है। वहीं, इस इमारत के संचालन पर हर माह करीब 30 लाख रुपये की बिजली भी खर्च हो रही है। अगर कंपनी की ही सब जिम्मेदारी है तो ये बिजली का बिल भी निर्माण कंपनी को ही भुगतना चाहिए। हालांकि वीरवार को बाद में कंपनी की ओर से ताला खोल दिया गया।
करीब 2000 करोड़ के मेडिकल यूनिवर्सिटी के इस प्रोजेक्ट में करीब 850 करोड़ की लागत से सिर्फ इमारतों का निर्माण कराया गया है। ये निर्माण लगभग पूरा हो चुका है लेकिन अभी तक यूनिवर्सिटी शुरू नहीं हो पाई है। इसकी एक विंग में एडमिन ब्लॉक की इमारत बनाई गई है। इसके दूसरे और तीसरे तल पर इसकी देखरेख करने और लेखा जोखा करने वाले अधिकारियों की ड्यूटी लगा उनके कार्यालय बनाए गए हैं। अब अचानक सुरक्षा का हवाला देकर कंपनी की ओर से एडमिन ब्लॉक को ही बंद किया जा रहा है। जिससे वित्तीय विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सकते में हैं।
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सरकार ने देखरेख की दी है जिम्मेदारी
अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने इस विश्वविद्यालय की देखरेख, इसकी जांच और कमियां बताने के लिए एक कमेटी बनाई थी। एडमिन ब्लॉक पर ताला लगने से अब वे भी बाहर हो जाएंगे। इसमें निदेशक से लेकर वित्त नियंत्रक और एक्सईएन पीडब्लयूडी, इलेक्टि्रकल और जनस्वास्थ्य विभाग तक के अधिकारी शामिल किए गए थे। यहां तीसरे तल पर वित्त नियंत्रक का कार्यालय भी है। अगर स्थायी तौर पर यहां ताला लगता है तो ये अधिकारी भी विश्वविद्यालय की इमारत से बाहर हो जाएंगे।
वर्जन:
अभी तक विश्वविद्यालय की इमारत को आधिकारिक तौर पर हैंडओवर नहीं किया गया है। इस इमारत में पूरी सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। ठेकेदार की ओर से इस वजह से ताला लगाया गया है ताकि वहां से कोई सामान चोरी न हो जाए। जब तक वहां पर पूरी सुरक्षा नहीं होती तब तक इसकी जिम्मेदारी भी ठेकेदार कंपनी की है। अगर कोई सामान इत्यादि चोरी होता है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। ताला लगाना या न लगाना ये पूरी ठेकेदार एवं कंपनी पक्ष की ही जिम्मेदारी है। बैठने वाले अधिकारी तो शाम को चार बजे निकल जाते हैं।
- डॉ. एमके गर्ग, निदेशक, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज एवं विश्वविद्यालय कुटैल
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- हर माह 30 लाख रुपये का बिल भर रहा स्वास्थ्य विभाग
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। पंडित दीन दयाल उपाध्याय मेडिकल यूनिवर्सिटी कुटैल अभी शुरू नहीं हुई थी कि इसके एडमिन ब्लॉक पर ताला लगा दिया गया है। जिसकी वजह से पैरामेडिकल स्टाफ, ऑडिट और लेखाजोखा शाखा के अधिकारियों से लेकर इसके निर्माण की जांच करने वाले अधिकारियों को भी बाहर होना पड़ रहा है। वीरवार को इस विश्वविद्यालय का निर्माण करने वाली कंपनी के ठेकेदार ने फिर से एडमिन ब्लॉक की इमारत पर ताला जड़ दिया। कंपनी का दावा है कि अभी तक इसे आधिकारिक तौर पर स्वास्थ्य विभाग को नहीं सौंपा गया है। जबकि इससे विश्वविद्यालय निर्माण की जांच से लेकर लेखाजोखा रखने का पूरा काम प्रभावित हो रहा है।
एडमिन ब्लॉक के दूसरे और तीसरे तल पर बैठने वाले अधिकारियों का कहना है कि जब जमीन सरकार की है, निर्माण सरकार करा रही है, वे भी सरकार का ही काम कर रहे हैं तो उनके कार्यालय पर ताला कैसे लगाया जा सकता है। उनका पूरा रिकॉर्ड भी इमारत के अंदर ही है। वहीं, इस इमारत के संचालन पर हर माह करीब 30 लाख रुपये की बिजली भी खर्च हो रही है। अगर कंपनी की ही सब जिम्मेदारी है तो ये बिजली का बिल भी निर्माण कंपनी को ही भुगतना चाहिए। हालांकि वीरवार को बाद में कंपनी की ओर से ताला खोल दिया गया।
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करीब 2000 करोड़ के मेडिकल यूनिवर्सिटी के इस प्रोजेक्ट में करीब 850 करोड़ की लागत से सिर्फ इमारतों का निर्माण कराया गया है। ये निर्माण लगभग पूरा हो चुका है लेकिन अभी तक यूनिवर्सिटी शुरू नहीं हो पाई है। इसकी एक विंग में एडमिन ब्लॉक की इमारत बनाई गई है। इसके दूसरे और तीसरे तल पर इसकी देखरेख करने और लेखा जोखा करने वाले अधिकारियों की ड्यूटी लगा उनके कार्यालय बनाए गए हैं। अब अचानक सुरक्षा का हवाला देकर कंपनी की ओर से एडमिन ब्लॉक को ही बंद किया जा रहा है। जिससे वित्तीय विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सकते में हैं।
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सरकार ने देखरेख की दी है जिम्मेदारी
अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने इस विश्वविद्यालय की देखरेख, इसकी जांच और कमियां बताने के लिए एक कमेटी बनाई थी। एडमिन ब्लॉक पर ताला लगने से अब वे भी बाहर हो जाएंगे। इसमें निदेशक से लेकर वित्त नियंत्रक और एक्सईएन पीडब्लयूडी, इलेक्टि्रकल और जनस्वास्थ्य विभाग तक के अधिकारी शामिल किए गए थे। यहां तीसरे तल पर वित्त नियंत्रक का कार्यालय भी है। अगर स्थायी तौर पर यहां ताला लगता है तो ये अधिकारी भी विश्वविद्यालय की इमारत से बाहर हो जाएंगे।
वर्जन:
अभी तक विश्वविद्यालय की इमारत को आधिकारिक तौर पर हैंडओवर नहीं किया गया है। इस इमारत में पूरी सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। ठेकेदार की ओर से इस वजह से ताला लगाया गया है ताकि वहां से कोई सामान चोरी न हो जाए। जब तक वहां पर पूरी सुरक्षा नहीं होती तब तक इसकी जिम्मेदारी भी ठेकेदार कंपनी की है। अगर कोई सामान इत्यादि चोरी होता है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। ताला लगाना या न लगाना ये पूरी ठेकेदार एवं कंपनी पक्ष की ही जिम्मेदारी है। बैठने वाले अधिकारी तो शाम को चार बजे निकल जाते हैं।
- डॉ. एमके गर्ग, निदेशक, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज एवं विश्वविद्यालय कुटैल