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Karnal News: खेल मंत्री के आदेश पर भी नहीं सुधरे खेल मैदान के हालात
Thu, 09 Oct 2025 01:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Thu, 09 Oct 2025 01:38 AM IST
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खेल मंत्री के आदेश पर भी नहीं सुधरे खेल मैदान के हालात
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। बसताड़ा गांव में स्थित राजीव गांधी खेल मैदान की हालत खराब है। खेल मंत्री के आदेश के बाद भी मैदान की हालत नहीं सुधरी। दाैड़ के अभ्यास के लिए ट्रैक को सुधारा गया लेकिन मैदान की दूसरी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। मैदान में बास्केटबॉल के पोल टूटे पड़े हैं। लावारिस पशु घूमते रहते हैं। लोग अपनी भेड़-बकरियों को चराने मैदान में आ जाते हैं।
मैदान जगह-जगह से ऊबड़-खाबड़ हो चुका है। ट्रैक के बीच में बड़ी-बड़ी घास उगी है, इस कारण से खिलाड़ी मैदान में जाने से भी कतराने लगे हैं। अप्रैल माह में खेल मंत्री गौरव गौतम ने मैदान का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने खेल विभाग के अधिकारियों को खेल परिसर को ठीक कराने के निर्देश दिए थे। पांच महीने बीतने के बाद भी मैदान में कोई सुधार नहीं हुआ है। यहां बनी इमारत जर्जर हो चुकी है। गेट पर हमेशा ताला लगा रहता है। दरवाजे व खिड़कियों पर लगी जालियां टूट चुकी हैं।
मैदान में पीने के पानी की व्यवस्था तक नहीं है। शौचालय की हालत इतनी खराब है कि उनको उपयोग नहीं किया जा सकता। खिलाड़ियों का कहना है कि वे अभ्यास के लिए आते हैं, लेकिन अव्यवस्था होने के कारण जल्द ही लौट जाते हैं। रात के समय मैदान की देखरेख के लिए कोई चौकीदार नहीं है और न ही साफ-सफाई के लिए कोई कर्मचारी। लोग दिन में अपने पशुओं को लेकर मैदान में आ जाते है।
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चार साल पहले बजट हुआ था पास
ग्रामीणों अजय का कहना है कि चार साल पहले खेल मैदान के सुधार के लिए बजट पास किया गया था। अभी तक इसका कायाकल्प नहीं हो पाया है। खिलाड़ियों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द खेल मैदान की मरम्मत और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
देखरेख के अभाव में हुआ बुरा हाल
पिछले माह विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण मैदान पर आयोजित एक खेल प्रतियोगिता में पहुंचे थे। उनको दिखाने के लिए खेल परिसर में साफ-सफाई और बेंच लगाए गए थे। करीब चार साल पहले भी खेल विभाग की ओर से पंचायती राज विभाग को बसताड़ा के खेल परिसर के कायाकल्प का जिम्मा सौंपा गया था। देखरेख के अभाव में मैदान का बुरा हाल हो गया है।
-- -- -- जिले के राजीव गांधी खेल परिसरों के कायाकल्प का कार्य मुख्यालय की ओर से पीडब्ल्यूडी के माध्यम से कराया जाना है। असंध खंड के जयसिंहपुरा गांव में राजीव गांधी खेल परिसर का कार्य कराया जा रहा है। कार्य की स्वीकृति पहले मिल गई थी। खेल परिसरों के कायाकल्प की स्वीकृति मिलते ही यहां भी कार्य शुरु करवा दिया जाएगा। - राजबीर सिंह रंगा, जिला खेल अधिकारी, करनाल
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करनाल। बसताड़ा गांव में स्थित राजीव गांधी खेल मैदान की हालत खराब है। खेल मंत्री के आदेश के बाद भी मैदान की हालत नहीं सुधरी। दाैड़ के अभ्यास के लिए ट्रैक को सुधारा गया लेकिन मैदान की दूसरी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। मैदान में बास्केटबॉल के पोल टूटे पड़े हैं। लावारिस पशु घूमते रहते हैं। लोग अपनी भेड़-बकरियों को चराने मैदान में आ जाते हैं।
मैदान जगह-जगह से ऊबड़-खाबड़ हो चुका है। ट्रैक के बीच में बड़ी-बड़ी घास उगी है, इस कारण से खिलाड़ी मैदान में जाने से भी कतराने लगे हैं। अप्रैल माह में खेल मंत्री गौरव गौतम ने मैदान का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने खेल विभाग के अधिकारियों को खेल परिसर को ठीक कराने के निर्देश दिए थे। पांच महीने बीतने के बाद भी मैदान में कोई सुधार नहीं हुआ है। यहां बनी इमारत जर्जर हो चुकी है। गेट पर हमेशा ताला लगा रहता है। दरवाजे व खिड़कियों पर लगी जालियां टूट चुकी हैं।
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मैदान में पीने के पानी की व्यवस्था तक नहीं है। शौचालय की हालत इतनी खराब है कि उनको उपयोग नहीं किया जा सकता। खिलाड़ियों का कहना है कि वे अभ्यास के लिए आते हैं, लेकिन अव्यवस्था होने के कारण जल्द ही लौट जाते हैं। रात के समय मैदान की देखरेख के लिए कोई चौकीदार नहीं है और न ही साफ-सफाई के लिए कोई कर्मचारी। लोग दिन में अपने पशुओं को लेकर मैदान में आ जाते है।
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चार साल पहले बजट हुआ था पास
ग्रामीणों अजय का कहना है कि चार साल पहले खेल मैदान के सुधार के लिए बजट पास किया गया था। अभी तक इसका कायाकल्प नहीं हो पाया है। खिलाड़ियों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द खेल मैदान की मरम्मत और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
देखरेख के अभाव में हुआ बुरा हाल
पिछले माह विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण मैदान पर आयोजित एक खेल प्रतियोगिता में पहुंचे थे। उनको दिखाने के लिए खेल परिसर में साफ-सफाई और बेंच लगाए गए थे। करीब चार साल पहले भी खेल विभाग की ओर से पंचायती राज विभाग को बसताड़ा के खेल परिसर के कायाकल्प का जिम्मा सौंपा गया था। देखरेख के अभाव में मैदान का बुरा हाल हो गया है।