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वादियों सरीखी करनाल की आबोहवा, जीटी बेल्ट में भी सबसे शुद्ध
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कर्णनगरी की एयर क्वालिटी इन दिनों पहाड़ों यानी जम्मू-श्रीनगर की तरह है। आंकड़ों के अनुसार, पहली मई यानी वीकेंड लॉकडाउन से अब तक करनाल का एक्यूआई एक दो दिन को छोड़कर 90 या 80 से कम ही आंका गया है। यह जीटी बेल्ट के जिलों में सबसे बेहतर है। ऑक्सीजन संकट के इस दौर में घटे प्रदूषण स्तर से कम से कम सांस और दमा के रोगियों को हल्की राहत मिलेगी।
केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अनुसार मई में करनाल का एक्यूआई 90 से कम ही आंका गया है, जो लगभग जम्मू और श्रीनगर के बराबर है, जबकि जीटी बेल्ट के सोनीपत और पानीपत जिलों में 200, कुरुक्षेत्र और कैथल में 150 और अंबाला में औसतन 100 से भी ज्यादा एक्यूआई दर्ज किया जा रहा है। फिजिशियन डॉ. एसएल वर्मा का कहना है कि दमा के रोगियों के लिए करनाल की हवा काफी शुद्ध है। उन्हें काफी हद तक तकलीफ से राहत भी मिली है। विदित हो कि करीब दो माह पहले तक करनाल का एक्यूआई 300 से ज्यादा दर्ज किया गया था। वहीं दिवाली के आस पास यह 400 पार पहुंचा गया था। उन दिनों जिले की करीब 16 लाख आबादी का सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था।
प्रदूषण घटाने और एयर क्वालिटी में सुधार की वजह-
1. एनएच से 40 हजार वाहन और शहर में 5 हजार आटो लगभग बंद
नेशनल हाईवे पर प्रति मिनट 42 वाहन गुजरते हैं। बसताड़ा टोल प्लाजा के अनुसार, रोजाना करीब 60 हजार वाहनों की क्रॉसिंग होती है। इनमें से 40 प्रतिशत वाहन इन दिनों कम चल रहे हैं। इसके अलावा सभी छह स्टेट हाईवे पर से गुजरने वाले वाहनों के अलावा शहर में चलने वाले 5 हजार आटो रिक्शा पूरी तरह और अन्य वाहन 50 प्रतिशत तक बंद है।
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2. 900 फैक्ट्रियां, 200 भट्ठों में लेबर न होने से कई बंद
जिले में 900 से ज्यादा फैक्ट्रियां और 200 से ज्यादा ईंट भट्ठे हैं, जहां इन दिनों लॉकडाउन के कारण प्रवासी मजदूर भी नहीं है। ऐसे में यहां भी 50 प्रतिशत काम बंद है। वहीं इंडस्ट्रियल एरिया को मिलाकर अलग-अलग सेक्टरों में मार्केट में जनरेटर भी काम कम होने से इन दिनों कम चलते हैं।
प्रदूषण नियंत्रण सभी की जिम्मेदारी
पर्यावरण संरक्षण समिति के अध्यक्ष एसडी अरोड़ा और समर्पण मानव सेवा समिति के अध्यक्ष दिलबाग कादियान का कहना है कि प्रदूषण को कंट्रोल करना सभी की जिम्मेदारी है। अब जब हवा की स्थिति इतनी सुधरी है, तो लॉकडाउन में ढील के बावजूद भी इसे बरकरार रखना चाहिए।
यूं समझे एयर क्वालिटी इंडेक्स
हवा की क्वालिटी पीएम-10 और पीएम-2.5 से मापते हैं। मात्रा प्रति घन मीटर में। एक घन मीटर एरिया में पीएम-10 की मात्रा 100 माइक्रोग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। पीएम-2.5 की अधिकतम मात्रा 50 होनी चाहिए।
-पीएम-10 में 10 माइक्रोमीटर के धूलकण।
-पीएम-2.5 में 2.5 माइक्रोमीटर के धूलकण।
इस इंडेक्स पर ये होती हवा की स्थिति-
एक्यूआई स्थिति
0-50 अच्छी
51-100 संतोषजनक
101-200 मध्यम
201-300 खराब
301-400 बहुत खराब
401-500 गंभीर
इस दिन यहां इतना रहा एक्यूआई
तिथि करनाल(स्थिति) जम्मू
01 मई 110(+) 53
02 मई 59(-) 94
03 मई 48(-) 91
04 मई 89(-) 98
05 मई 61(-) 63
06 मई 131(+) 76
07 मई 55(-) 72
08 मई 59(-) 92
09 मई 83(-) 87
10 मई 86(-) 101
11 मई 88(+) 55
12 मई 106(+) 51
नोट : (-) का अर्थ करनाल का एक्यूआई जम्मू से कम व (+) का मतलब ज्यादा एक्यूआई से है।
करनाल की हवा में सुधार आया है। हवा में पीएम-10 की स्थिति यदि 100 है तो इसे संतोषजनक माना जाता है, लेकिन करनाल में इससे भी काफी कम दर्ज हो रही है। -शैलेंद्र अरोड़ा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण विभाग करनाल।
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केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अनुसार मई में करनाल का एक्यूआई 90 से कम ही आंका गया है, जो लगभग जम्मू और श्रीनगर के बराबर है, जबकि जीटी बेल्ट के सोनीपत और पानीपत जिलों में 200, कुरुक्षेत्र और कैथल में 150 और अंबाला में औसतन 100 से भी ज्यादा एक्यूआई दर्ज किया जा रहा है। फिजिशियन डॉ. एसएल वर्मा का कहना है कि दमा के रोगियों के लिए करनाल की हवा काफी शुद्ध है। उन्हें काफी हद तक तकलीफ से राहत भी मिली है। विदित हो कि करीब दो माह पहले तक करनाल का एक्यूआई 300 से ज्यादा दर्ज किया गया था। वहीं दिवाली के आस पास यह 400 पार पहुंचा गया था। उन दिनों जिले की करीब 16 लाख आबादी का सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था।
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प्रदूषण घटाने और एयर क्वालिटी में सुधार की वजह-
1. एनएच से 40 हजार वाहन और शहर में 5 हजार आटो लगभग बंद
नेशनल हाईवे पर प्रति मिनट 42 वाहन गुजरते हैं। बसताड़ा टोल प्लाजा के अनुसार, रोजाना करीब 60 हजार वाहनों की क्रॉसिंग होती है। इनमें से 40 प्रतिशत वाहन इन दिनों कम चल रहे हैं। इसके अलावा सभी छह स्टेट हाईवे पर से गुजरने वाले वाहनों के अलावा शहर में चलने वाले 5 हजार आटो रिक्शा पूरी तरह और अन्य वाहन 50 प्रतिशत तक बंद है।
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2. 900 फैक्ट्रियां, 200 भट्ठों में लेबर न होने से कई बंद
जिले में 900 से ज्यादा फैक्ट्रियां और 200 से ज्यादा ईंट भट्ठे हैं, जहां इन दिनों लॉकडाउन के कारण प्रवासी मजदूर भी नहीं है। ऐसे में यहां भी 50 प्रतिशत काम बंद है। वहीं इंडस्ट्रियल एरिया को मिलाकर अलग-अलग सेक्टरों में मार्केट में जनरेटर भी काम कम होने से इन दिनों कम चलते हैं।
प्रदूषण नियंत्रण सभी की जिम्मेदारी
पर्यावरण संरक्षण समिति के अध्यक्ष एसडी अरोड़ा और समर्पण मानव सेवा समिति के अध्यक्ष दिलबाग कादियान का कहना है कि प्रदूषण को कंट्रोल करना सभी की जिम्मेदारी है। अब जब हवा की स्थिति इतनी सुधरी है, तो लॉकडाउन में ढील के बावजूद भी इसे बरकरार रखना चाहिए।
यूं समझे एयर क्वालिटी इंडेक्स
हवा की क्वालिटी पीएम-10 और पीएम-2.5 से मापते हैं। मात्रा प्रति घन मीटर में। एक घन मीटर एरिया में पीएम-10 की मात्रा 100 माइक्रोग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। पीएम-2.5 की अधिकतम मात्रा 50 होनी चाहिए।
-पीएम-10 में 10 माइक्रोमीटर के धूलकण।
-पीएम-2.5 में 2.5 माइक्रोमीटर के धूलकण।
इस इंडेक्स पर ये होती हवा की स्थिति-
एक्यूआई स्थिति
0-50 अच्छी
51-100 संतोषजनक
101-200 मध्यम
201-300 खराब
301-400 बहुत खराब
401-500 गंभीर
इस दिन यहां इतना रहा एक्यूआई
तिथि करनाल(स्थिति) जम्मू
01 मई 110(+) 53
02 मई 59(-) 94
03 मई 48(-) 91
04 मई 89(-) 98
05 मई 61(-) 63
06 मई 131(+) 76
07 मई 55(-) 72
08 मई 59(-) 92
09 मई 83(-) 87
10 मई 86(-) 101
11 मई 88(+) 55
12 मई 106(+) 51
नोट : (-) का अर्थ करनाल का एक्यूआई जम्मू से कम व (+) का मतलब ज्यादा एक्यूआई से है।
करनाल की हवा में सुधार आया है। हवा में पीएम-10 की स्थिति यदि 100 है तो इसे संतोषजनक माना जाता है, लेकिन करनाल में इससे भी काफी कम दर्ज हो रही है। -शैलेंद्र अरोड़ा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण विभाग करनाल।