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कंडम हुई रोडवेज व्यवस्था, सवारियां भटकने को मजबूर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 02 Oct 2022 03:00 AM IST
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The arrangement of roadways became condoned, the passengers were forced to wander
ऐंकर
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फोटो- 101 और 102
सफर कैसे होगा पूरा, बसों की बेड़ा है अधूरा
त्योहारों से पहले रोडवेज की व्यवस्था कंडम, भटक रहीं सवारियां, चार साल में आधी रह गई बसें, सात और हुई ऑफ रोड
नौ इंटर स्टेट और 24 स्थानीय मार्ग प्रभावित, दिल्ली, रोहतक, पिल्लूखेड़ा, जींद मार्ग से घटाई बसें, बैजनाथ-धर्मशाला मार्ग बंद
गगन तलवार
करनाल। प्रशासनिक उदासीनता के चलते हरियाणा रोडवेज की व्यवस्था चरमरा रही है। हालात यह हैं कि पिछले चार साल में रोडवेज के करनाल डिपो के बेड़े में बसों की संख्या आधी रह गई है। बसों का बेड़ा अधूरा होने से यात्री भटकने के लिए मजबूर हैं। 10 साल चलने के बाद इस सप्ताह सात बसें और कंडम हो गई हैं। बसों के ऑफ रोड होने के चलते नौ इंटर स्टेट और 24 से ज्यादा स्थानीय मार्गों पर बस सुविधा प्रभावित हुई है।
बड़े त्योहारों से पहले सात बसें और ऑफ रोड होने के बाद करनाल डिपो की ओर से दिल्ली, सोनीपत, रोहतक, पिल्लूखेड़ा और जींद सहित अन्य मार्गों से बसें घटाई गई हैं। बैजनाथ, मनाली, जयपुर, होशियारपुर (पंजाब), अयोध्या और धर्मशाला के लिए सीधी बस सेवा बंद है। इन मार्गों की बसों को स्थानीय ग्रामीण मार्गों पर चलाई जा रही हैं। उल्लेखनीय है कि जो सात बसें कंडम हुई हैं, ये इंद्री, कुंजपुरा, सोनीपत, गोहाना और रोहतक मार्ग पर चलती थीं।
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नियम के अनुसार, एनसीआर क्षेत्र में 10 साल पुरानी हो चुकी बस का संचालन नहीं हो सकता है। ऐसे में 10 साल पूरे कर चुकी बस को ऑफ रोड कर दिया जाता है। करनाल डिपो की क्षमता और जिले की 16.5 लाख आबादी के हिसाब से 350 बसों की जरूरत है। 2015 के मानक के अनुसार डिपो में 250 बसें होनी चाहिए। 2018 में डिपो में 175 बसें थी, जो कि घटकर अब महज 99 रह गई हैं। इनमें भी 10 बसें किलोमीटर स्कीम की हैं। 2018 से लेकर अब तक केवल दो नई बसें ही बेड़े में शामिल हुई हैं। इनमें भी एक बस 15 दिन पहले ही करनाल डिपो को मिली हैं। ऐसे में बसों की संख्या घटने से यात्रियों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है।
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बस सुविधा से वंचित हैं 50 से ज्यादा गांव
2022 में ही 25 बसें कंडम हुई हैं। इस कारण हालात यह हैं कि जिले के 442 गांवों में 50 से ज्यादा गांव ऐसे हैं, जहां रोडवेज की बस जाती ही नहीं। जनवरी 2022 तक चल रही 124 बसों पर 16 लाख आबादी के हिसाब से 13.5 हजार की आबादी एक बस पर निर्भर थी। अब 99 बसें रह जाने पर प्रत्येक बस पर करीब तीन हजार आबादी की निर्भरता और बढ़ी है। अब 16.5 हजार की आबादी एक बस पर निर्भर रहेगी। बसें घटने से कई स्थानीय मार्गों पर केवल सुबह और शाम की बस सुविधा रहेगी।
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सुगम व्यवस्था के लिए 151 बसें और चाहिए
मानक के अनुसार, करनाल डिपो को 250 बसों की जरूरत है। यानी 151 बसें और चाहिए। यदि ये सभी बसें मिल जाएं तो बंद हो चुके नौ इंटर स्टेट 50 से ज्यादा गांवों पर बस सेवा बहाल होगी। इसके साथ ही खाटू श्याम, बाला जी, नौ देवियां, राजस्थान, मनाली आदि के लिए भी नई बस सेवा शुरू हो सकती है, क्योंकि इन सभी बसों को चलाने के लिए डिपो में 550 के करीब चालक-परिचालक पर्याप्त हैं।

फोटो-- 102
करनाल डिपो के लिए विभाग की ओर से 45 बसें स्वीकृत हैं। अभी तक केवल एक बस आई है, जिसे सिरसा मार्ग पर चलाया जा रहा है। 14 बसों की राशि विभाग की ओर से कंपनी को जमा करा दी गई है। उम्मीद है जल्द बसें आएंगी। बसें आते ही लंबे मार्गों की सेवा शुरू की जाएगी। हर मार्ग पर बेहतर सुविधा देने का प्रयास कर रहे हैं। - कुलदीप सिंह, जीएम, रोडवेज करनाल डिपो
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