फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Tarawadi's Sheeshganj Sahib is among the historical gurdwaras.

Karnal News: ऐतिहासिक गुरुद्वारों में है तरावड़ी का शीशगंज साहिब

Tue, 25 Nov 2025 02:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Tue, 25 Nov 2025 02:05 AM IST
विज्ञापन
Tarawadi's Sheeshganj Sahib is among the historical gurdwaras.
तरावड़ी लाइटों से सजा ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री शीशगंज साहिब। संवाद
राजकुमार खुराना
विज्ञापन


तरावड़ी। ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री शीशगंज साहिब का इतिहास में विशेष स्थान है। यह भारत के गुरुदारों में श्री गुरु तेग बहादुर शीशगंज के नाम से प्रसिद्ध है। तरावड़ी जीटी रोड से लगभग तीन किलोमीटर अंदर काटजू नगर के पास स्थित गुरुद्वारा में दिल्ली से आनंदपुर जाते समय एक रात के लिये धोबी देवा राम के घर पर गुरु जी का शीश विश्राम करने के रखा गया था।
तब इस स्थान पर छोटा सा गुरुद्वारा बनाया गया था। जिसका नाम शीशगंज गुरुद्वारा रखा गया। खास बात यह है कि यहां पर एक सरोवर भी है, इस पवित्र सरोवर में स्नान करने से शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा यहां पर हर माह गुरु की याद में पंचमी तिथि पर मेला लगता है। दूर-दूर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां आकर माथा टेकते हैं और सरोवर में स्नान करते हैं। गुरुद्वारा में बड़ा लंगर हाल बना हुआ है, जहां 24 घंटे गुरु का लंगर बरताया जाता है और पूरे दिन में हजारों श्रद्धालु लंगर प्रसाद छकते हैं। संवाद
विज्ञापन




भाई जैता जी लेकर चले थे शीश

गुरुद्वारा प्रबंधकों के अनुसार, जब गुरु तेग बहादुर साहिब को दिल्ली के चांदनी चौक में शहीद कर दिया गया तो किसी की हिम्मत नहीं हुई कि गुरु साहिब का शरीर या शीश उठा सकें। पर अकालपुरख की मर्जी के साथ बहुत तेज आंधी चली और उस आंधी और अंधेरे की आड़ में भाई जैताजी गुरु साहिब का शीश उठाने में कामयाब हो गए। भाई लखी शाह गुरु साहिब का शरीर अपने साथ ले गए और संस्कार अपने घर में किया। क्योंकि सामूहिक तौर पर संस्कार करना खतरे से भरा था।
विज्ञापन
विज्ञापन




अगली सुबह ही आनंदपुर साहिब गए

भाई जैता जी गुरु साहिब का शीश लेकर तरावड़ी पहुंचे। तरावड़ी के भाई देवा राम धोबी श्री गुरु तेग बहादुर साहिब का हाल जानने के लिए उत्सुक थे। जब भाई जैता जी पहुंचे तो उन्होंने गुरु साहिब के बारे में पूछा। दिल्ली के घटनाक्रम के बारे में पता चलने पर वह भाई जैता जी और गुरु साहिब के शीश साहिब को अपने घर ले आए। उन्होंने लंगर के साथ भाई जैता जी की सेवा की और उन्हें आराम करने के लिए कहा। एक रात यहां गुजारने के बाद भाई जैता जी दूसरे दिन आनंदपुर साहिब के लिए चल दिए। अंबाला और जीरकपुर होते हुए शीश लेकर भाई जैता जी श्री आनंदपुर साहिब पहुंचे।

----
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed