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शरीर, मन व आत्मा को बेचैन होने से रोकना ही तप : प्रो. एससी जैन
Thu, 04 Sep 2025 02:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Thu, 04 Sep 2025 02:08 AM IST
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18.... जैन मंदिर में भगवान जी का अभिषेक करते श्रद्धालु। स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। श्री दिगंबर जैन मंदिर में बुधवार सुबह पंडित रत्नेश शास्त्री ने श्रद्धालुओं से मंत्र उच्चारण के साथ भगवान का अभिषेक करवाया। वहीं, दूसरी ओर से उत्तम तप धर्म का महत्व समझाते हुए प्रो. एससी जैन ने कहा कि इच्छाओं के विरोध को तप कहते हैं। विषय कषायों का निग्रह करके अपने पुरुषार्थ द्वारा प्रतिकूल परिस्थितियों में शरीर, मन व आत्मा को बेचैन होने से रोकना तप कहलाता है।
उन्होंने कहा कि भूख लगने पर अनशन करना अथवा अल्प आहार ग्रहण करना अर्थात ऊनोदरी बाह्य तप का रूप है। ऐसे तप धर्म क्षेत्र में किये जाते हैं। विद्यार्थी परीक्षा के दिनों में नींद आने पर भी पढ़ाई में लगे रहकर तप करते हैं। सैनिक पहाड़ों पर हड्डियों को गला देने वाली पड़ रही बर्फ के बीच भी देश की सीमाओं की रक्षा करके तप धर्म का पालन करते हैं। मुनिजन व साध्वी गर्मी-सर्दी में सदैव मार्ग पर नंगे पैर चलकर जीवों की रक्षा करते हुए घंटों एक आसन में ध्यानपूर्वक बैठ अथवा खड़े रहकर तप धर्म का पालन करते हैं। बीमार बच्चे की देखभाल में माता-पिता दिन-रात एक कर देते हैं। यह सब निस्वार्थ भाव से होने पर उत्तम तप धर्म कहलाता है। भगवान की वाणी में उत्तम तप धर्म के लिए कहा कि जिसमें जितनी शक्ति हैं तप धर्म का पालन करना चाहिए क्योंकि तप धर्म का पालन केवल मनुष्य गति में संभव है। इस अवसर पर विरेश जैन अध्यक्ष, सौरभ जैन, मोहित जैन, विनय जैन, आशू जैन, गौरव जैन, दिनेश जैन, रत्नेश जैन, सुमित शास्त्री, प्रयंग सुंदरी, अल्का, सुधा, सुषमा, रेखा, वीना, कमल के साथ अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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करनाल। श्री दिगंबर जैन मंदिर में बुधवार सुबह पंडित रत्नेश शास्त्री ने श्रद्धालुओं से मंत्र उच्चारण के साथ भगवान का अभिषेक करवाया। वहीं, दूसरी ओर से उत्तम तप धर्म का महत्व समझाते हुए प्रो. एससी जैन ने कहा कि इच्छाओं के विरोध को तप कहते हैं। विषय कषायों का निग्रह करके अपने पुरुषार्थ द्वारा प्रतिकूल परिस्थितियों में शरीर, मन व आत्मा को बेचैन होने से रोकना तप कहलाता है।
उन्होंने कहा कि भूख लगने पर अनशन करना अथवा अल्प आहार ग्रहण करना अर्थात ऊनोदरी बाह्य तप का रूप है। ऐसे तप धर्म क्षेत्र में किये जाते हैं। विद्यार्थी परीक्षा के दिनों में नींद आने पर भी पढ़ाई में लगे रहकर तप करते हैं। सैनिक पहाड़ों पर हड्डियों को गला देने वाली पड़ रही बर्फ के बीच भी देश की सीमाओं की रक्षा करके तप धर्म का पालन करते हैं। मुनिजन व साध्वी गर्मी-सर्दी में सदैव मार्ग पर नंगे पैर चलकर जीवों की रक्षा करते हुए घंटों एक आसन में ध्यानपूर्वक बैठ अथवा खड़े रहकर तप धर्म का पालन करते हैं। बीमार बच्चे की देखभाल में माता-पिता दिन-रात एक कर देते हैं। यह सब निस्वार्थ भाव से होने पर उत्तम तप धर्म कहलाता है। भगवान की वाणी में उत्तम तप धर्म के लिए कहा कि जिसमें जितनी शक्ति हैं तप धर्म का पालन करना चाहिए क्योंकि तप धर्म का पालन केवल मनुष्य गति में संभव है। इस अवसर पर विरेश जैन अध्यक्ष, सौरभ जैन, मोहित जैन, विनय जैन, आशू जैन, गौरव जैन, दिनेश जैन, रत्नेश जैन, सुमित शास्त्री, प्रयंग सुंदरी, अल्का, सुधा, सुषमा, रेखा, वीना, कमल के साथ अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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