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Karnal News: चीनी मिल से गन्ना किसानों को मिलेगी हार्वेस्टिंग मशीन
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। दि सहकारी चीनी मिल करनाल बोर्ड की आम सभा की बैठक में किसानों के हित में कई फैसले लिए गए। पिछले तीन सालों में व्यय और आमदनी पर संतोष व्यक्त हुए चीनी मिल के बड़े मुनाफे के साथ आत्मनिर्भर होने की ओर अग्रसर होने पर खुशी व्यक्त की गई। वहीं, अंशधारक, निदेशकों और किसानों की मांग पर प्रबंध निदेशक हितेंद्र कुमार ने लेबर न मिलने की समस्या से निजात दिलाने के लिए गन्ना हार्वेस्टिंग मशीन उपलब्ध कराने की भी हामी भर दी।
उन्होंने कहा कि दो दिन के अंदर किसान उन्हें अपनी राय से लिखित रूप में अवगत करा दें तो वह चीनी मिल किसानों को ये मशीनें भी उपलब्ध कराने को तैयार है। चीनी मिल परिसर में चीनी मिल बोर्ड निदेशकों, अंशधारकों की मौजूदगी में शुरू हुई आम सभा की बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ निदेशख सुरेंद्र शर्मा बड़ौता को दी गई। राजपाल लाठर ने पिछले तीन सालों का चीनी मिलों के आय-व्यय की समीक्षात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसका बोर्ड सदस्यों ने अनुमोदन किया।
निदेशक ओमपाल मढ़ान ने चीनी मिल के बड़े मुनाफे और टोकन सिस्टम, कैंटीन आदि शुरू करके किसानों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए एमडी हितेंद्र कुमार की सराहना करते हुए कहा कि जब घाटे में किसानों से सहायता ली जाती है, तो मुनाफे में भी किसानों को हिस्सेदारी देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को तीसरे दिन भुगतान करने की मांग करते हुए गन्ना किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या लेबर की है। इसके लिए चीनी मिल को हार्वेस्टिग मशीन मुहैया करानी चाहिए।
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किसान नेता श्याम सिंह राणा ने अपने साथियों के साथ प्रबंध निदेशक को ज्ञापन सौंपा, इसमें कहा कि चीनी मिल 12 नवंबर तक शुरू की जाए, बांड से कम गन्ना देने पर जुर्माना न हो, पूर्व शेयर धारकों का अंश उनके परिजनों को दिए जाए। किसानों को भी मिल कर्मचारियों की तरह सस्ते रेट पर चीनी दी जाए।
प्रबंध निदेशक हितेंद्र शर्मा ने किसानों की मांग पर कहा कि मिल हार्वेस्टिंग मशीन देने को तैयार है, एक मशीन करीब दो करोड़ तक आती है, किसान दो दिन के अंदर अपनी राय लिखित रूप में दे दें, मशीन उपलब्ध करा दी जाएगी। भुगतान भी तीन दिन के अंदर देने का प्रयास किया जाएगा। चीनी मिल 19 नवंबर से पेराई सत्र शुरू करेगी।
नेट मुनाफे में मिल 38.50 करोड़ रुपये के घाटे में है लेकिन एक साल की बात करें तो कैश रूप में मिल 60 करोड़ के मुनाफे में हैं। जहां तक किसानों को कर्मचारियों की तरह चीनी देने की बात है तो अगले चौबीस घंटे के अंदर इसका प्रस्ताव वह सरकार को भेज देंगे, स्वीकृति मिलने पर किसानों को सस्ते रेट पर चीनी दी जाएगी। अध्यक्षता कर रहे सुरेंद्र शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए एमडी को आश्वस्त किया कि किसान, निदेशक और अंशधारक किसान और मिल हित में पूर्ण सहयोग करेंगे।
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करनाल। दि सहकारी चीनी मिल करनाल बोर्ड की आम सभा की बैठक में किसानों के हित में कई फैसले लिए गए। पिछले तीन सालों में व्यय और आमदनी पर संतोष व्यक्त हुए चीनी मिल के बड़े मुनाफे के साथ आत्मनिर्भर होने की ओर अग्रसर होने पर खुशी व्यक्त की गई। वहीं, अंशधारक, निदेशकों और किसानों की मांग पर प्रबंध निदेशक हितेंद्र कुमार ने लेबर न मिलने की समस्या से निजात दिलाने के लिए गन्ना हार्वेस्टिंग मशीन उपलब्ध कराने की भी हामी भर दी।
उन्होंने कहा कि दो दिन के अंदर किसान उन्हें अपनी राय से लिखित रूप में अवगत करा दें तो वह चीनी मिल किसानों को ये मशीनें भी उपलब्ध कराने को तैयार है। चीनी मिल परिसर में चीनी मिल बोर्ड निदेशकों, अंशधारकों की मौजूदगी में शुरू हुई आम सभा की बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ निदेशख सुरेंद्र शर्मा बड़ौता को दी गई। राजपाल लाठर ने पिछले तीन सालों का चीनी मिलों के आय-व्यय की समीक्षात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसका बोर्ड सदस्यों ने अनुमोदन किया।
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निदेशक ओमपाल मढ़ान ने चीनी मिल के बड़े मुनाफे और टोकन सिस्टम, कैंटीन आदि शुरू करके किसानों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए एमडी हितेंद्र कुमार की सराहना करते हुए कहा कि जब घाटे में किसानों से सहायता ली जाती है, तो मुनाफे में भी किसानों को हिस्सेदारी देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को तीसरे दिन भुगतान करने की मांग करते हुए गन्ना किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या लेबर की है। इसके लिए चीनी मिल को हार्वेस्टिग मशीन मुहैया करानी चाहिए।
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किसान नेता श्याम सिंह राणा ने अपने साथियों के साथ प्रबंध निदेशक को ज्ञापन सौंपा, इसमें कहा कि चीनी मिल 12 नवंबर तक शुरू की जाए, बांड से कम गन्ना देने पर जुर्माना न हो, पूर्व शेयर धारकों का अंश उनके परिजनों को दिए जाए। किसानों को भी मिल कर्मचारियों की तरह सस्ते रेट पर चीनी दी जाए।
प्रबंध निदेशक हितेंद्र शर्मा ने किसानों की मांग पर कहा कि मिल हार्वेस्टिंग मशीन देने को तैयार है, एक मशीन करीब दो करोड़ तक आती है, किसान दो दिन के अंदर अपनी राय लिखित रूप में दे दें, मशीन उपलब्ध करा दी जाएगी। भुगतान भी तीन दिन के अंदर देने का प्रयास किया जाएगा। चीनी मिल 19 नवंबर से पेराई सत्र शुरू करेगी।
नेट मुनाफे में मिल 38.50 करोड़ रुपये के घाटे में है लेकिन एक साल की बात करें तो कैश रूप में मिल 60 करोड़ के मुनाफे में हैं। जहां तक किसानों को कर्मचारियों की तरह चीनी देने की बात है तो अगले चौबीस घंटे के अंदर इसका प्रस्ताव वह सरकार को भेज देंगे, स्वीकृति मिलने पर किसानों को सस्ते रेट पर चीनी दी जाएगी। अध्यक्षता कर रहे सुरेंद्र शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए एमडी को आश्वस्त किया कि किसान, निदेशक और अंशधारक किसान और मिल हित में पूर्ण सहयोग करेंगे।