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Karnal News: फुटबॉल से की शुरुआत, एथलेटिक्स में चमकीं... 25 खिलाड़ियों की कोच
Sat, 17 Jan 2026 02:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 17 Jan 2026 02:18 AM IST
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कोच पायल
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। उचाना गांव में बनी खेल नर्सरी में एथलेटिक्स के खिलाड़ी निरंतर अभ्यास कर रहे हैं। कोच पायल हैं। वह पिछले आठ महीने से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रही हैं। कोच की एक बात उन्हें खास बनाती है। उन्होंने वर्ष 2014 में फुटबॉल से खेल जगत में अपनी यात्रा शुरू की थी। दो साल तक फुटबॉल की खिलाड़ी रहीं। इसके बाद एक बार कर्ण स्टेडियम में आयोजित 400 मीटर दौड़ में भाग लिया। स्पर्धा में वह प्रथम आईं। तब से पीछे मुड़कर नहीं देखा।
कोच पायल ने बताया कि इसके बाद वह एथलेटिक्स की खिलाड़ी बन गईं। खेलने के साथ उन्होंने कोच का डिप्लोमा किया। अब कोच हैं और करीब 25 खिलाड़ी उनके पास अभ्यास के लिए आते हैं। उन्होंने बताया कि जिस स्टेडियम से उन्होंने पदक लाने की शुरुआत की थी। आज उसी स्टेडियम से उनके छात्र भी पदक जीत रहे हैं। कोच पायल को एथलेटिक फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से उचाना गांव में बनी खेल नर्सरी में कोच के तौर पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने बताया कि पिता प्रदीप कुमार का निधन हो चुका है। माता उर्मिला देवी के संघर्ष ने उनको आगे बढ़ाया।
उपलब्धियां
वर्ष 2016 में सोनीपत में 800 मीटर में स्वर्ण और 1500 मीटर में रजत पदक अपने नाम किया।
वर्ष 2016 ओपन 10 किलोमीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रथम आईं।
-ऑल इंडिया हाफ मैराथन में 51,000 नकद पुरस्कार मिला। हाफ मैराथन यूनिवर्सिटी में तीन पदक जीते।
-21 किलोमीटर ऑल इंडिया टाइम क्वालीफाई किया।
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करनाल। उचाना गांव में बनी खेल नर्सरी में एथलेटिक्स के खिलाड़ी निरंतर अभ्यास कर रहे हैं। कोच पायल हैं। वह पिछले आठ महीने से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रही हैं। कोच की एक बात उन्हें खास बनाती है। उन्होंने वर्ष 2014 में फुटबॉल से खेल जगत में अपनी यात्रा शुरू की थी। दो साल तक फुटबॉल की खिलाड़ी रहीं। इसके बाद एक बार कर्ण स्टेडियम में आयोजित 400 मीटर दौड़ में भाग लिया। स्पर्धा में वह प्रथम आईं। तब से पीछे मुड़कर नहीं देखा।
कोच पायल ने बताया कि इसके बाद वह एथलेटिक्स की खिलाड़ी बन गईं। खेलने के साथ उन्होंने कोच का डिप्लोमा किया। अब कोच हैं और करीब 25 खिलाड़ी उनके पास अभ्यास के लिए आते हैं। उन्होंने बताया कि जिस स्टेडियम से उन्होंने पदक लाने की शुरुआत की थी। आज उसी स्टेडियम से उनके छात्र भी पदक जीत रहे हैं। कोच पायल को एथलेटिक फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से उचाना गांव में बनी खेल नर्सरी में कोच के तौर पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने बताया कि पिता प्रदीप कुमार का निधन हो चुका है। माता उर्मिला देवी के संघर्ष ने उनको आगे बढ़ाया।
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उपलब्धियां
वर्ष 2016 में सोनीपत में 800 मीटर में स्वर्ण और 1500 मीटर में रजत पदक अपने नाम किया।
वर्ष 2016 ओपन 10 किलोमीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रथम आईं।
-ऑल इंडिया हाफ मैराथन में 51,000 नकद पुरस्कार मिला। हाफ मैराथन यूनिवर्सिटी में तीन पदक जीते।
-21 किलोमीटर ऑल इंडिया टाइम क्वालीफाई किया।