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Karnal News: 400 एकड़ फसल बर्बाद कर उतरा सोम का पानी
Sun, 31 Aug 2025 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sun, 31 Aug 2025 01:17 AM IST
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पानी उतरने के बाद फसलों के ऊपर जमी गाद। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर/यमुनानगर। दो दिन हुई बारिश से उफान पर आई सोम नदी अब शांत है। लेकिन, शुक्रवार को नदी में आए 23 हजार क्यूसेक पानी क्षेत्र में बर्बादी का मंजर छोड़ गया। करीब 400 एकड़ से अधिक फसलें पानी में तो डूबी, परंतु जब पानी उतरा तो दो-दो फीट तक रेत और मिट्टी की गाद जम गई। ऐसे में खेतों में लहराने वाली फसलें खराब होने के कगार पर पहुंच गईं हैं।
फसलों के ऊपर गाद व रेत देखकर किसान चिंतित हैं। वहीं, अब यदि और बारिश हुई तो जो बची फसलें है, वो भी खराब हो जाएंगे। ऐसे में किसानों के पास कुछ नहीं बचेगा। जिससे किसानों को काफी नुकसान होगा। शुक्रवार को सोम नदी के उफान पर आने से रामपुर, बिहटा, मलिकपुर बांगर, रूकाली, बसातियांवाला सहित अन्य गांवों की फसल इससे प्रभावित हुई है।
ग्रामीण जय कुमार, मोहन लाल, रमेश कुमार, प्रेम चंद का कहना है कि सोम नदी के बहाव के पास वन विभाग की 20 एकड़ भूमि लगती है। उसके साथ ही उनकी खेती योग्य भूमि भी है।
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प्रशासन की तरफ से प्रत्येक साल नदी के समीप भूमि पर तटबंध बचाने का कार्य किया जाता है, लेकिन कार्य समय से नहीं हो पाया। ऐसे में जब बाढ़ आई तो फसलों को तबाह कर गई। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। गाद के कारण फसलें खराब हो गई हैं।
चारा भी हुआ खराब
किसानों का कहना है बाढ़ का पानी तो आगे निकल गया, लेकिन रेत व गाद फसलों के अलावा चारा में भी जम गया है। ऐसे में पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा गया है। गाद के कारण आगामी सरसों व पशुओं के चारे की फसल की बिजाई भी समय से नहीं हो पाएगी। ग्रामीणों की मांग प्रदेश सरकार को सबसे पहले सोम नदी के समीप चार हजार फीट का तटबंध का निर्माण करवाना चाहिए तथा नदी के पानी से खराब हुई फसलों की भरपाई के लिए विशेष गिरदावरी करवा कर मुआवजा दे। इसके साथ साथ वन विभाग के द्वारा नदी के समीप विभाग की भूमि पर बाढ़ राहत के लिए किए गए कार्यों की जांच होनी चाहिए ताकि आगामी बाढ़ में किसानों को नुकसान न उठाना पड़े।
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व्यासपुर/यमुनानगर। दो दिन हुई बारिश से उफान पर आई सोम नदी अब शांत है। लेकिन, शुक्रवार को नदी में आए 23 हजार क्यूसेक पानी क्षेत्र में बर्बादी का मंजर छोड़ गया। करीब 400 एकड़ से अधिक फसलें पानी में तो डूबी, परंतु जब पानी उतरा तो दो-दो फीट तक रेत और मिट्टी की गाद जम गई। ऐसे में खेतों में लहराने वाली फसलें खराब होने के कगार पर पहुंच गईं हैं।
फसलों के ऊपर गाद व रेत देखकर किसान चिंतित हैं। वहीं, अब यदि और बारिश हुई तो जो बची फसलें है, वो भी खराब हो जाएंगे। ऐसे में किसानों के पास कुछ नहीं बचेगा। जिससे किसानों को काफी नुकसान होगा। शुक्रवार को सोम नदी के उफान पर आने से रामपुर, बिहटा, मलिकपुर बांगर, रूकाली, बसातियांवाला सहित अन्य गांवों की फसल इससे प्रभावित हुई है।
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ग्रामीण जय कुमार, मोहन लाल, रमेश कुमार, प्रेम चंद का कहना है कि सोम नदी के बहाव के पास वन विभाग की 20 एकड़ भूमि लगती है। उसके साथ ही उनकी खेती योग्य भूमि भी है।
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प्रशासन की तरफ से प्रत्येक साल नदी के समीप भूमि पर तटबंध बचाने का कार्य किया जाता है, लेकिन कार्य समय से नहीं हो पाया। ऐसे में जब बाढ़ आई तो फसलों को तबाह कर गई। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। गाद के कारण फसलें खराब हो गई हैं।
चारा भी हुआ खराब
किसानों का कहना है बाढ़ का पानी तो आगे निकल गया, लेकिन रेत व गाद फसलों के अलावा चारा में भी जम गया है। ऐसे में पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा गया है। गाद के कारण आगामी सरसों व पशुओं के चारे की फसल की बिजाई भी समय से नहीं हो पाएगी। ग्रामीणों की मांग प्रदेश सरकार को सबसे पहले सोम नदी के समीप चार हजार फीट का तटबंध का निर्माण करवाना चाहिए तथा नदी के पानी से खराब हुई फसलों की भरपाई के लिए विशेष गिरदावरी करवा कर मुआवजा दे। इसके साथ साथ वन विभाग के द्वारा नदी के समीप विभाग की भूमि पर बाढ़ राहत के लिए किए गए कार्यों की जांच होनी चाहिए ताकि आगामी बाढ़ में किसानों को नुकसान न उठाना पड़े।

पानी उतरने के बाद फसलों के ऊपर जमी गाद। संवाद