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तो ऐसे कैसे होगा औद्योगिक उत्पादन
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पीडब्लूडी रेस्ट हाउस में सीएम मनोहर लाल से मिलने पहुंचे राईस मिलर्स। संवाद
करनाल। प्रदूषण बड़ी समस्या है, इसमें कोई दोराय नहीं। लेकिन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण कमेटी ने एनसीआर में औद्योगिक इकाइयों पर जो प्रतिबंध लगाए हैं, वह उद्यमियों को रास नहीं आ रहे हैं। इनमें शनिवार व रविवार को पूर्ण बंदी के साथ साथ सप्ताह के अन्य दिनों में अप्रूव्ड फ्यूल (कोयला, डीजल आदि ) से संचालित होने वाले उद्यम सिर्फ आठ घंटे चल सकेंगे।
इसमें राइस मिल्स, चीनी मिलें, दुग्ध प्लांट आदि के संचालन में बाधा उत्पन्न हो गई हैं, क्योंकि इनकी प्रोसेसिंग ही करीब 24 घंटे की है। ऐसे में बड़ी दिक्कत यह है कि यह इंडस्ट्री सिर्फ आठ घंटे कैसे चलाएं ? ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रधान सहित कई पदाधिकारियों ने शनिवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिलकर अपनी समस्याएं उनके सामने रखीं। हालांकि कोई तात्कालिक समाधान नहीं निकल सका है। मुख्यमंत्री ने इतना जरूर कहा कि यह प्रतिबंध केंद्रीय कमेटी द्वारा लगाए गए हैं, वह उद्यमियों की बात को केंद्र के सामने रखेंगे।
मुख्यमंत्री से मिलने के लिए विश्राम गृह तो करीब 40 राइस मिलर्स व अन्य उद्यमी पहुंचे लेकिन इनमें से ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रधान नाथीराम गुप्ता, पूर्व प्रधान विजय सेतिया, सुशील जैन, सुरेंद्र गुप्ता, सतीश गुप्ता ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिलकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण कमेटी के आदेशों के क्रम में लगाए गए प्रतिबंधों से उत्पन्न दुश्वारियों को साझा किया। राइस एक्सपोर्टर्स ने कहा कि चावल की प्रोसेसिंग ही 24 घंटे की हैं। इसमें 10 घंटे भिगोना होता है, दो घंटे स्टीम देनी होती है, 12 घंटे सुखाना होता है। ऐसे में सिर्फ आठ घंटे राइस मिल चलाकर कैसे प्रोसेसिंग पूरी होगी। इसी तरह चीनी मिल या दुग्ध प्लांट को हर आठ घंटे बाद बंद करना संभव नहीं है। जिसने भी यह नियम बनाएं हैं, उन्हें इंडस्ट्री संचालन का सही ज्ञान नहीं है। इससे तो इंडस्ट्ी चल ही नहीं पाएगी। ऐसे में बड़ी आर्थिक क्षति होगी। चावल निर्यात भी प्रभावित होगा। जिसे में करीब 500 राइस मिल, 20 दुग्ध प्लांट, तीन चीनी मिलें हैं।
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- सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के क्रम में कोयला, डीजल आदि प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन से संचालित औद्योगिक इकाइयों को शनिवार व रविवार को पूर्णत: बंद रखने, अन्य दिनों में सिर्फ आठ घंटे संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि सीएनजी, पीएनजी, एलपीजी आदि अन्य ईंधन से संचालित ऐसे उद्यम जो वायु प्रदूषण को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं के संचालन पर कोई रोक नहीं होगी।
शैलेंद्र अरोड़ा, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करनाल।
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प्रदूषण को लेकर जो पाबंदियां लगाई गई हैं, वह व्यावहारिक नहीं हैं। 24 घंटे प्रोसेसिंग में आठ घंटे बाद राइस मिल्स या अन्य इंडस्ट्री बंद करना संभव नहीं है। सीएनजी, पीएनजी से संचालित उद्यमों पर रोक नहीं लगाई गई है, जबकि इससे संचालित उद्यमों का पार्ट पर मिलियन 589 हैं और राइस मिल का सिर्फ 17 लेकिन फिर भी राइस मिलों पर चौबीस घंटे में सिर्फ आठ घंटे संचालन व दो दिन बंदी की पाबंदी थोप दी गई है। मुख्यमंत्री से मिले थे, दिक्कतें भी बताईं, लेकिन उन्होंने कहा कि यह तो केंद्र का मामला है, वह उद्यमियों की बात को केंद्र तक पहुंचा देंगे।
-विजय सेतिया, पूर्व प्रधान ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन।
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इसमें राइस मिल्स, चीनी मिलें, दुग्ध प्लांट आदि के संचालन में बाधा उत्पन्न हो गई हैं, क्योंकि इनकी प्रोसेसिंग ही करीब 24 घंटे की है। ऐसे में बड़ी दिक्कत यह है कि यह इंडस्ट्री सिर्फ आठ घंटे कैसे चलाएं ? ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रधान सहित कई पदाधिकारियों ने शनिवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिलकर अपनी समस्याएं उनके सामने रखीं। हालांकि कोई तात्कालिक समाधान नहीं निकल सका है। मुख्यमंत्री ने इतना जरूर कहा कि यह प्रतिबंध केंद्रीय कमेटी द्वारा लगाए गए हैं, वह उद्यमियों की बात को केंद्र के सामने रखेंगे।
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मुख्यमंत्री से मिलने के लिए विश्राम गृह तो करीब 40 राइस मिलर्स व अन्य उद्यमी पहुंचे लेकिन इनमें से ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रधान नाथीराम गुप्ता, पूर्व प्रधान विजय सेतिया, सुशील जैन, सुरेंद्र गुप्ता, सतीश गुप्ता ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिलकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण कमेटी के आदेशों के क्रम में लगाए गए प्रतिबंधों से उत्पन्न दुश्वारियों को साझा किया। राइस एक्सपोर्टर्स ने कहा कि चावल की प्रोसेसिंग ही 24 घंटे की हैं। इसमें 10 घंटे भिगोना होता है, दो घंटे स्टीम देनी होती है, 12 घंटे सुखाना होता है। ऐसे में सिर्फ आठ घंटे राइस मिल चलाकर कैसे प्रोसेसिंग पूरी होगी। इसी तरह चीनी मिल या दुग्ध प्लांट को हर आठ घंटे बाद बंद करना संभव नहीं है। जिसने भी यह नियम बनाएं हैं, उन्हें इंडस्ट्री संचालन का सही ज्ञान नहीं है। इससे तो इंडस्ट्ी चल ही नहीं पाएगी। ऐसे में बड़ी आर्थिक क्षति होगी। चावल निर्यात भी प्रभावित होगा। जिसे में करीब 500 राइस मिल, 20 दुग्ध प्लांट, तीन चीनी मिलें हैं।
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- सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के क्रम में कोयला, डीजल आदि प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन से संचालित औद्योगिक इकाइयों को शनिवार व रविवार को पूर्णत: बंद रखने, अन्य दिनों में सिर्फ आठ घंटे संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि सीएनजी, पीएनजी, एलपीजी आदि अन्य ईंधन से संचालित ऐसे उद्यम जो वायु प्रदूषण को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं के संचालन पर कोई रोक नहीं होगी।
शैलेंद्र अरोड़ा, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करनाल।
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प्रदूषण को लेकर जो पाबंदियां लगाई गई हैं, वह व्यावहारिक नहीं हैं। 24 घंटे प्रोसेसिंग में आठ घंटे बाद राइस मिल्स या अन्य इंडस्ट्री बंद करना संभव नहीं है। सीएनजी, पीएनजी से संचालित उद्यमों पर रोक नहीं लगाई गई है, जबकि इससे संचालित उद्यमों का पार्ट पर मिलियन 589 हैं और राइस मिल का सिर्फ 17 लेकिन फिर भी राइस मिलों पर चौबीस घंटे में सिर्फ आठ घंटे संचालन व दो दिन बंदी की पाबंदी थोप दी गई है। मुख्यमंत्री से मिले थे, दिक्कतें भी बताईं, लेकिन उन्होंने कहा कि यह तो केंद्र का मामला है, वह उद्यमियों की बात को केंद्र तक पहुंचा देंगे।
-विजय सेतिया, पूर्व प्रधान ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन।