फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Smoke spreads in Civil Hospital's neonatal ward due to a short circuit; chaos ensues.

Karnal News: नागरिक अस्पताल के नवजात वार्ड में शॉर्ट-सर्किट से फैला धुआं, मची अफरा-तफरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 20 Sep 2026 02:12 AM IST
विज्ञापन
Smoke spreads in Civil Hospital's neonatal ward due to a short circuit; chaos ensues.
बच्चो को लेकर बाहर जाते परिजन स्वयं
करनाल। जिला नागरिक अस्पताल में शनिवार को नवजात शिशु वार्ड के एक पॉइंट पर शॉर्ट सर्किट होने से धुआं फैल गया। धुआं उठते ही वार्ड में अफरा-तफरी मच गई। स्टाफ ने तुरंत वार्ड में मौजूद नवजात बच्चों को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इस दौरान कई परिजन भी अपने बच्चों को गोद में लेकर वार्ड से बाहर निकलते दिखाई दिए।
विज्ञापन

बच्चों की पूर्व की स्थिति के तौर पर चार को कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में शिफ्ट किया गया। जबकि वार्ड में भर्ती अन्य छह का दूसरे वार्ड में अभी भी इलाज चल रहा है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार सभी बच्चे सुरक्षित हैं।
विज्ञापन


परिजन रिजन रमेश, सुल्तान, प्रदीप और सुशीला व व अन्य ने बताया कि अचानक वार्ड में शॉर्ट सर्किट होने की जानकारी मिली। इसके बाद वहां धुआं फैलने लगा और लोग घबरा गए। स्टाफ ने बिना देरी किए बच्चों को वार्ड से बाहर निकालना शुरू कर दिया। परिजन भी अपने नवजात बच्चों को गोद में लेकर सुरक्षित जगह जाते नजर आए।
विज्ञापन
विज्ञापन


दमकल के आने से पहले नियंत्रण में आई स्थिति
अस्पताल की पीएमओ डॉ. सरिता ने बताया कि नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में एक पॉइंट पर शॉर्ट सर्किट हुआ था। इससे धुआं फैल गया। घटना की सूचना फायर ब्रिगेड को दी गई और संबंधित स्टाफ को मौके पर बुलाया गया। इसके बाद बच्चों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया। दमकल के आने से पहले ही स्थिति पर नियंत्रण पा लिया गया।

अस्पताल के पास नहीं फायर एनओसी.. केवल अग्निशमन संयंत्र टांग खानापूर्ति
- प्रबंधन का दावा, पीडब्ल्यूडी के माध्यम से चल रही है प्रक्रिया,
करनाल। करीब 115 साल पुराने जिला नागरिक अस्पताल में सुरक्षा इंतजामों की पोल एक बार फिर खुल गई है। शनिवार शाम नवजात शिशु वार्ड में अचानक आग लगने की घटना के बाद अस्पताल की फायर सेफ्टी व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल के पास अभी तक फायर एनओसी तक उपलब्ध नहीं है, जबकि यहां रोजाना करीब ढाई हजार मरीजों का इलाज होता है।
अस्पताल परिसर में अग्निशमन सिलिंडर लगाए तो गए हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार ये पर्याप्त नहीं हैं। सुरक्षा मानकों के अभाव में यदि बड़ी आग लगती तो स्थिति भयावह हो सकती थी। अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग और भीड़भाड़ वाले वार्डों को देखते हुए आपात स्थिति से निपटने की तैयारियां कमजोर नजर आती हैं।
बढ़ती सुविधाएं लेकिन सुरक्षा इंतजाम अधूरे

अस्पताल अंग्रेजों के जमाने से है। शिशु वार्ड का भवन भी करीब 30 साल पुराना है लेकिन समय के साथ जहां इलाज सुविधाएं बढ़ी हैं, वहीं सुरक्षा व्यवस्था पीछे रह गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आग जैसी घटनाओं से निपटने के लिए फूल प्रूफ सिस्टम होना जरूरी है, लेकिन अस्पताल में केवल दमकल विभाग पर निर्भरता बनी हुई है।



फायर एनओसी की प्रक्रिया जारी, पीडब्ल्यूडी के जरिये हो रहा काम

पीएमओ डॉ. सरिता का दावा है कि फायर एनओसी लेने की प्रक्रिया पीडब्ल्यूडी विभाग के माध्यम से चल रही है और जल्द ही सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। उनका यह भी कहना है कि अग्निशमन उपकरण लगाए गए हैं और स्टाफ को समय-समय पर आग बुझाने का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।




ये उठ रहे सवाल-

अगर आग फैलती तो कौन जिम्मेदार होता? क्या बिना फायर एनओसी के अस्पताल चलाना नियमों के अनुरूप है? नवजात वार्ड में आग लगने की स्थिति में निकासी की क्या व्यवस्था है? क्या सिर्फ अग्निशमन सिलिंडरों के भरोसे है पूरा अस्पताल? क्या प्रशासन बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed