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Karnal News: बैठ ठाकुर के चरणों में... भजनों पर झूमे श्रद्धालु
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जुंडला गेट के श्री बांके बिहारी मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को श्रद्धा की बयार बही। आचार्य आशीष सागर महाराज ने आके बैठ जरा ठाकुर जी के चरणों में, जग एक सपना है यहां कोई नहीं अपना है भजन गाकर सभी को भाव-विभोर कर दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रभु को पाना है तो उनका होना पड़ेगा, ध्यान लगाना पड़ेगा। आशीष सागर महाराज ने श्री कृष्ण की रासलीला का वर्णन करते हुए कहा कि शरद पूर्णिमा की रात को श्री कृष्ण ने बांसुरी बजाई तो सभी गोपियां चाहे वो आटा गूंथ रही थी वो आटे के हाथ लेकर दौड़ पड़ी, तो कोई घर की पुताई करती हुई दौड़ पड़ी। शृंगार कर रही गोपी ने तो होंठों पर लगाने वाली वस्तु को मुंह पर लगा लिया, सभी कन्हैया जी की मुरली सुनने को दौड़ पड़ी।
एक गोपी को उसके पति ने कमरे में बंद कर दिया तो उसने अपने प्राण त्याग दिए और आत्मा उनके पास पहुंच गई। रासलीला, कृष्ण और गोपियों के बीच का एक दिव्य प्रेम है। रास का अर्थ है अमृत और लीला का अर्थ है नृत्य या क्रीड़ा। रासलीला में कृष्ण अलौकिक रूप से एक कल्प की लंबाई तक समय बढ़ा देते हैं। वृंदावन के निधिवन में हर रात रासलीला होती है। निधिवन के पेड़ों की मान्यता है कि ये रात में गोपियां बन जाते हैं और कृष्ण और राधा के साथ नृत्य करते हैं। रासलीला में कृष्ण को छोड़ कर किसी अन्य मर्द का वहां जाना निषेध था। भगवान शिव ने महिला के वेश में रास के दर्शन किए थे। रासलीला को मनुष्य तो क्या पशु-पक्षियां भी नहीं देखते। मंगलवार 24 दिसंबर को सुबह हवन में आहुतियां डालकर कथा को विश्राम दिया जाएगा।
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करनाल। जुंडला गेट के श्री बांके बिहारी मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को श्रद्धा की बयार बही। आचार्य आशीष सागर महाराज ने आके बैठ जरा ठाकुर जी के चरणों में, जग एक सपना है यहां कोई नहीं अपना है भजन गाकर सभी को भाव-विभोर कर दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रभु को पाना है तो उनका होना पड़ेगा, ध्यान लगाना पड़ेगा। आशीष सागर महाराज ने श्री कृष्ण की रासलीला का वर्णन करते हुए कहा कि शरद पूर्णिमा की रात को श्री कृष्ण ने बांसुरी बजाई तो सभी गोपियां चाहे वो आटा गूंथ रही थी वो आटे के हाथ लेकर दौड़ पड़ी, तो कोई घर की पुताई करती हुई दौड़ पड़ी। शृंगार कर रही गोपी ने तो होंठों पर लगाने वाली वस्तु को मुंह पर लगा लिया, सभी कन्हैया जी की मुरली सुनने को दौड़ पड़ी।
एक गोपी को उसके पति ने कमरे में बंद कर दिया तो उसने अपने प्राण त्याग दिए और आत्मा उनके पास पहुंच गई। रासलीला, कृष्ण और गोपियों के बीच का एक दिव्य प्रेम है। रास का अर्थ है अमृत और लीला का अर्थ है नृत्य या क्रीड़ा। रासलीला में कृष्ण अलौकिक रूप से एक कल्प की लंबाई तक समय बढ़ा देते हैं। वृंदावन के निधिवन में हर रात रासलीला होती है। निधिवन के पेड़ों की मान्यता है कि ये रात में गोपियां बन जाते हैं और कृष्ण और राधा के साथ नृत्य करते हैं। रासलीला में कृष्ण को छोड़ कर किसी अन्य मर्द का वहां जाना निषेध था। भगवान शिव ने महिला के वेश में रास के दर्शन किए थे। रासलीला को मनुष्य तो क्या पशु-पक्षियां भी नहीं देखते। मंगलवार 24 दिसंबर को सुबह हवन में आहुतियां डालकर कथा को विश्राम दिया जाएगा।
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