{"_id":"67e0724c89e42d21aa029ff0","slug":"sins-are-washed-away-by-listening-to-shrimad-bhagwat-katha-acharya-tribhuvan-karnal-news-c-18-knl1008-607993-2025-03-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीमद्भागवत कथा सुन कट जाते हैं पाप : आचार्य त्रिभुवन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीमद्भागवत कथा सुन कट जाते हैं पाप : आचार्य त्रिभुवन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
मूनक। अलावला गांव के शाकुंभरी देवी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में प्रवचन करते हुए आचार्य त्रिभुवन त्रिपाठी ने गोकर्ण व धुंधकारी की कथा सुनाते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने से कई जन्मों के पाप कट जाते हैं। उन्होंने कहा कि राजा के दो पुत्र एक गोकर्ण व दूसरा पुत्र धुंधकारी थे। धुंधकारी बड़ा निर्दयी और कष्ट देने वाला था। गोकर्ण उच्च आचरण और संस्कारी पुत्र था। उनके कर्म के योग के अनुसार धुंधकारी मृत्यु के पश्चात प्रेतकाल की योनि प्राप्त हुई और गोकर्ण को सदाचारी व संस्कारी स्वर्ग की प्राप्ति हुई। परंतु अपने भाई की प्रेतकाल योनि में होने के कारण उसने श्रीमद्भागवत महापुराण का आयोजन किया। जिसमें अपने भाई को मुक्ति दिलाई।
उन्होंने कहा कि कथा सुनने से मनुष्य के पाप कट जाते हैं और जन्म-मृत्यु के चक्कर से बच जाता है। कथा के दौरान महंत श्री ब्रह्मचारी आजाद गिरी जी महाराज, सरपंच अजीत राणा, पंडित राधा कृष्ण , सत्यनारायण शर्मा, कुलदीप नंबरदार ,सूबेदार, सतपाल,कबूल सिंह राणा, नरपाल राणा, विजेंद्र राणा और अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विज्ञापन
मूनक। अलावला गांव के शाकुंभरी देवी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में प्रवचन करते हुए आचार्य त्रिभुवन त्रिपाठी ने गोकर्ण व धुंधकारी की कथा सुनाते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने से कई जन्मों के पाप कट जाते हैं। उन्होंने कहा कि राजा के दो पुत्र एक गोकर्ण व दूसरा पुत्र धुंधकारी थे। धुंधकारी बड़ा निर्दयी और कष्ट देने वाला था। गोकर्ण उच्च आचरण और संस्कारी पुत्र था। उनके कर्म के योग के अनुसार धुंधकारी मृत्यु के पश्चात प्रेतकाल की योनि प्राप्त हुई और गोकर्ण को सदाचारी व संस्कारी स्वर्ग की प्राप्ति हुई। परंतु अपने भाई की प्रेतकाल योनि में होने के कारण उसने श्रीमद्भागवत महापुराण का आयोजन किया। जिसमें अपने भाई को मुक्ति दिलाई।
उन्होंने कहा कि कथा सुनने से मनुष्य के पाप कट जाते हैं और जन्म-मृत्यु के चक्कर से बच जाता है। कथा के दौरान महंत श्री ब्रह्मचारी आजाद गिरी जी महाराज, सरपंच अजीत राणा, पंडित राधा कृष्ण , सत्यनारायण शर्मा, कुलदीप नंबरदार ,सूबेदार, सतपाल,कबूल सिंह राणा, नरपाल राणा, विजेंद्र राणा और अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विज्ञापन