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Karnal News: श्री हरकृष्ण धियाइये जिस डिठे सब दुख जाए
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अंबाला। श्री हरकृष्ण धियाइये जिस डिठे सब दुख जाए शब्द सुनकर संगत भावविभोर हो गई। आठवीं पातशाही बाला प्रीतम गुरु हरकृष्ण साहिब महाराज जी की चरण स्पर्श धरती गुरुद्वारा श्री पंजोखरा साहिब में रविवार को कथा-कीर्तन समागम के दौरान यह अलौकिक नजारा देखने को मिला।
संगत ने वाहेगुरु जी का जाप करते हुए गुरु चरणों में माथा टेका और सरबत के भले की अरदास की। समागम श्रद्धा व धूमधाम से मनाया गया। समागम को लेकर गुरुद्वारा साहिब को फूलों से सुशोभित किया गया था। वहीं बीच रास्ते सहित परिसर को भी रंग-बिरंगी लड़ियों से सजाया गया। गुरुद्वारा साहिब के आसपास मेले जैसा माहौल था। गुरु महाराज के मुख्य स्थान पर माथा टेककर लोग समागम स्थल भाई छज्जु जी दीवान हाल में नतमस्तक होते और इलाहीबाणी के जाप करते नजर आए। इस मौके पर सेवादारों ने भी पूरी निष्ठा के साथ सहयोग किया। वहीं गुरुद्वारा प्रबंधक भी लगातार समागम पर नजर बनाए रहे।
इस दौरान अमृतसर श्री दरबार साहिब से आए कीर्तनी जत्थे भाई सतिंदर बीर सिंह, भाई जगजीत सिंह बबीहा, भाई अमनदीप सिंह खालसा सहित भाई जसकरन सिंह पटियाला, ज्ञानी जसवंत सिंह कथा वाचक, भाई सिमरनजीत सिंह खालसा, भाई सिमरप्रीत सिंह, भाई निरभय सिंह आदि ने गुरबाणी शब्द गायन किए और गुरु की महिमा का बखान किया। उन्होंने अपनी वाणी में बताया कि गुरु हरराय साहिब जी महाराज और माता किशन कौर जी के दूसरे पुत्र गुरु हरकृष्ण साहिब जी महाराज थे।
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मात्र पांच साल की आयु में गुरु साहिब को गुरु का पद प्रदान किया गया था। गुरु हरकृष्ण साहिब जी महाराज ने बहुत ही कम समय में जनता के साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार करके लोकप्रियता हासिल की थी। उन्होंने ऊंच-नीच और जाति का भेदभाव मिटाकर सेवा का अभियान चलाया। उन्होंने संगत को संदेश दिया कि गुरु धारण किए बगैर हमारा जीवन अधूरा है। गुरु चरणों में अरदास उपरांत देर रात लगभग 11 बजे विधिवत तरीके से तीन दिवसीय समागम का समापन किया गया।
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संगत ने वाहेगुरु जी का जाप करते हुए गुरु चरणों में माथा टेका और सरबत के भले की अरदास की। समागम श्रद्धा व धूमधाम से मनाया गया। समागम को लेकर गुरुद्वारा साहिब को फूलों से सुशोभित किया गया था। वहीं बीच रास्ते सहित परिसर को भी रंग-बिरंगी लड़ियों से सजाया गया। गुरुद्वारा साहिब के आसपास मेले जैसा माहौल था। गुरु महाराज के मुख्य स्थान पर माथा टेककर लोग समागम स्थल भाई छज्जु जी दीवान हाल में नतमस्तक होते और इलाहीबाणी के जाप करते नजर आए। इस मौके पर सेवादारों ने भी पूरी निष्ठा के साथ सहयोग किया। वहीं गुरुद्वारा प्रबंधक भी लगातार समागम पर नजर बनाए रहे।
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इस दौरान अमृतसर श्री दरबार साहिब से आए कीर्तनी जत्थे भाई सतिंदर बीर सिंह, भाई जगजीत सिंह बबीहा, भाई अमनदीप सिंह खालसा सहित भाई जसकरन सिंह पटियाला, ज्ञानी जसवंत सिंह कथा वाचक, भाई सिमरनजीत सिंह खालसा, भाई सिमरप्रीत सिंह, भाई निरभय सिंह आदि ने गुरबाणी शब्द गायन किए और गुरु की महिमा का बखान किया। उन्होंने अपनी वाणी में बताया कि गुरु हरराय साहिब जी महाराज और माता किशन कौर जी के दूसरे पुत्र गुरु हरकृष्ण साहिब जी महाराज थे।
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मात्र पांच साल की आयु में गुरु साहिब को गुरु का पद प्रदान किया गया था। गुरु हरकृष्ण साहिब जी महाराज ने बहुत ही कम समय में जनता के साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार करके लोकप्रियता हासिल की थी। उन्होंने ऊंच-नीच और जाति का भेदभाव मिटाकर सेवा का अभियान चलाया। उन्होंने संगत को संदेश दिया कि गुरु धारण किए बगैर हमारा जीवन अधूरा है। गुरु चरणों में अरदास उपरांत देर रात लगभग 11 बजे विधिवत तरीके से तीन दिवसीय समागम का समापन किया गया।