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Karnal News: बिगड़ी टीबी का कम समय में कम गोलियां खाकर होगा इलाज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 10 Jun 2025 02:37 AM IST
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Severe TB will be treated by taking fewer pills in less time
- पहले 18 माह तक चलता था उपचार, 16 के बजाय अब खानी होगी चार गोलियां
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काजल पांचाल

करनाल। जिन टीबी के मरीजों पर सामान्य दवाएं असर नहीं करतीं, उनका इलाज अब आसान हो गया है। एमडीआर टीबी (ड्रग रेजिस्टेंट या बिगड़ी टीबी) के मरीजों का लंबे समय तक इलाज और भारी मात्रा में दवा खाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बीपीएलएम (चार दवाइयों के नाम) तकनीक से अब केवल चार दवाइयों का छह माह तक ही कोर्स चलेगा।

जिला नागरिक अस्पताल से टीबी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप ने बताया कि पहले बिगड़ी टीबी के मरीजों का 18 महीने तक इलाज चलता था और एक बार में 16 गोलियां खानी पड़ती थीं। नई दवाइयों के आने से मरीजों को राहत मिली है क्योंकि पहले मरीज एक बार में ज्यादा गोलियां खाने से घबराते थे। अब केवल चार गोलियां छह महीने तक खानी पड़ेगी।
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डॉ. प्रदीप के अनुसार, ये दवा टीबी के उन बैक्टीरिया को खत्म करती हैं, जिन पर पहले की दवाओं का असर नहीं दिखाता था। जिले में अब तक नौ मरीजों का बीपीएलएम के तहत इलाज शुरू किया गया है। इन मरीजों में संक्रमण कम हो रहा है, वजन बढ़ रहा है और थकान जैसी शिकायतें घट रही हैं। जिले में अब तक एक साल में करीब 150 के करीब बिगड़ी टीबी के मरीज पाए गए हैं।
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इलाज की प्रक्रिया

मरीज को छह महीने तक रोजाना बेडाक्विलिन, प्रिटोमैनिड, लाइनजोलिड और मोक्सीफ्लॉक्सासिन चार दवाएं दी जाती हैं। उसके बाद इलाज की शुरुआत में मरीज को निगरानी में रखा जाता है, ताकि दवाओं के असर और दुष्प्रभाव को देखा जा सके। हर 15 दिन में मरीज की जांच होती है, वजन, थूक की रिपोर्ट और अन्य लक्षणों का मूल्यांकन किया जाता है। छह महीने का कोर्स पूरा होने के बाद पुष्टि जांच (कन्फर्मेटरी टेस्ट) से तय होता है कि मरीज पूरी तरह स्वस्थ हुआ या नहीं। पूरा इलाज सरकारी अस्पतालों और डीआर-टीबी केंद्रों पर नि:शुल्क उपलब्ध है।




वर्जन-
अगर किसी व्यक्ति में लंबे समय तक खांसी, बुखार, वजन कम होना या भूख न लगने जैसे लक्षण हों, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में टीबी की जांच करवाएं। जांच और इलाज पूरी तरह नि:शुल्क है।
डॉ. प्रदीप, टीबी रोग विशेषज्ञ
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