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Karnal News: डाक से सात समुंदर पार भेजा बहना का प्यार
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करनाल। रक्षाबंधन पर डाकघर में गहमागहमी बढ़ जाती है। दूर रह रहे भाई के लिए राखी भेजने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचती हैं। इनमें से कई ऐसी भी होती हैं जो साल में केवल एक बार रक्षाबंधन को ही डाकघर का चक्कर लगाती हैं। दूसरे जिलों, राज्यों के अलावा विदेशी भी राखियां भेजी जा रही हैं।
स्थानीय डाकघर से अब तक राखियों के 1200 से अधिक लिफाफे भेजे जा चुके हैं। डाकघर में इस विशेष सेवा के लिए तैयारियां की गई हैं। स्थानीय मुख्य डाकघर के प्रमुख पोस्ट मास्टर कर्म सिंह झिझोलिया ने बताया कि बड़ी संख्या में विदेशों में राखियां जा रही हैं। करनाल से बड़ी संख्या में युवा विदेश जाते हैं। ऐसे में राखी पर विदेश के लिए डाक अधिक बढ़ जाती है। त्योहारों पर डाक के जरिये अधिक सामान भी भेजा जा रहा है। 22 जुलाई से राज्यों व विदेशों में राखियां पहुंचानी शुरू कर दी गई थीं।
-विदेशों के लिए रोजाना 160 राखियां
डाकघर में रोजाना 160 तक राखियां विदेश भेजी जा रही हैं। सबसे अधिक यूएसए, अस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस और कनाडा और अरेबियन देशों में राखियां भेजी जा रही हैं। एक महीना पहले से ही विदेशों के लिए राखियां भेजनी शुरू कर दिया गया था। भारत के राज्यों में भेजने के लिए रोजाना 400 के करीब राखियां आ रही हैं। हैदराबाद, मुबंई, दिल्ली, असम और उड़ीसा के लिए अधिक राखियां भेजी जा रही हैं।
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डाकघर में बहनों के लिए विशेष सेवा
कर्म सिंह झिझोलिया ने बताया कि दो हफ्ते पहले ही रक्षाबंधन के लिए विशेष तैयारी कर ली गई है। दो विशेष काउंटर बनाए हैं। राखी का विशेष लिफाफा दस रुपये का है। डाकघर में सुबह 8 से लेकर शाम के 8 बजे तक राखियां भेजने की सुविधा दी जा रही है।
फ्रांस में रह रहे भाई को छह साल से भेज रही राखी
-पालम कॉलोनी निवासी सुलोचना ने बताया कि उनका भाई सहज फ्रांस में होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहे हैं। वह पिछले छह साल से वहां हैं। हर साल डाक से राखी भेजती हैं। रक्षाबंधन पर भाई बहुत याद आता है। छह साल से नहीं मिल पाई हूं। भाई की लंबी उम्र, तरक्की के लिए हर रक्षाबंधन पर उसे चांदी की राखी भेजती हूं।
केरल में भाई, पहली बार डाक से भेजा रक्षासूत्र
-सेक्टर-5 की रहने वाली निशा ने बताया कि उनके भाई राकेश केरल में नौकरी करते हैं। अधिक काम होने के कारण इस बार रक्षाबंधन पर नहीं आ पाएंगे। तीन दिन पहले ही डाक के माध्यम से उनको राखी भेजी है। पहली बार अपने भाई को डाक के माध्यम से राखी भेजी है। कुछ अच्छा नहीं लग रहा है। उम्मीद है कि भाई को सही समय पर राखी मिल जाएगी।
घर पर खुद बनाई हुई मिठाइयां भी भेजी हैं साथ
-फूसगढ़ की रहने वाली अर्चना ने बताया कि उनके भाई शुभम कनाडा में रहते हैं। वह वाहन चालक हैं। दो साल पहले पढ़ाई करने के लिए वहां गए थे। बाद में वहीं पर नौकरी लग गई। इस बार मैंने भाई को चांदी की राखी के साथ अपने हाथों की बनी मिठाइयां भी भिजवाई हैं। डाक के माध्यम से दो साल से राखी भेज रही हूं।
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स्थानीय डाकघर से अब तक राखियों के 1200 से अधिक लिफाफे भेजे जा चुके हैं। डाकघर में इस विशेष सेवा के लिए तैयारियां की गई हैं। स्थानीय मुख्य डाकघर के प्रमुख पोस्ट मास्टर कर्म सिंह झिझोलिया ने बताया कि बड़ी संख्या में विदेशों में राखियां जा रही हैं। करनाल से बड़ी संख्या में युवा विदेश जाते हैं। ऐसे में राखी पर विदेश के लिए डाक अधिक बढ़ जाती है। त्योहारों पर डाक के जरिये अधिक सामान भी भेजा जा रहा है। 22 जुलाई से राज्यों व विदेशों में राखियां पहुंचानी शुरू कर दी गई थीं।
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-विदेशों के लिए रोजाना 160 राखियां
डाकघर में रोजाना 160 तक राखियां विदेश भेजी जा रही हैं। सबसे अधिक यूएसए, अस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस और कनाडा और अरेबियन देशों में राखियां भेजी जा रही हैं। एक महीना पहले से ही विदेशों के लिए राखियां भेजनी शुरू कर दिया गया था। भारत के राज्यों में भेजने के लिए रोजाना 400 के करीब राखियां आ रही हैं। हैदराबाद, मुबंई, दिल्ली, असम और उड़ीसा के लिए अधिक राखियां भेजी जा रही हैं।
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डाकघर में बहनों के लिए विशेष सेवा
कर्म सिंह झिझोलिया ने बताया कि दो हफ्ते पहले ही रक्षाबंधन के लिए विशेष तैयारी कर ली गई है। दो विशेष काउंटर बनाए हैं। राखी का विशेष लिफाफा दस रुपये का है। डाकघर में सुबह 8 से लेकर शाम के 8 बजे तक राखियां भेजने की सुविधा दी जा रही है।
फ्रांस में रह रहे भाई को छह साल से भेज रही राखी
-पालम कॉलोनी निवासी सुलोचना ने बताया कि उनका भाई सहज फ्रांस में होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहे हैं। वह पिछले छह साल से वहां हैं। हर साल डाक से राखी भेजती हैं। रक्षाबंधन पर भाई बहुत याद आता है। छह साल से नहीं मिल पाई हूं। भाई की लंबी उम्र, तरक्की के लिए हर रक्षाबंधन पर उसे चांदी की राखी भेजती हूं।
केरल में भाई, पहली बार डाक से भेजा रक्षासूत्र
-सेक्टर-5 की रहने वाली निशा ने बताया कि उनके भाई राकेश केरल में नौकरी करते हैं। अधिक काम होने के कारण इस बार रक्षाबंधन पर नहीं आ पाएंगे। तीन दिन पहले ही डाक के माध्यम से उनको राखी भेजी है। पहली बार अपने भाई को डाक के माध्यम से राखी भेजी है। कुछ अच्छा नहीं लग रहा है। उम्मीद है कि भाई को सही समय पर राखी मिल जाएगी।
घर पर खुद बनाई हुई मिठाइयां भी भेजी हैं साथ
-फूसगढ़ की रहने वाली अर्चना ने बताया कि उनके भाई शुभम कनाडा में रहते हैं। वह वाहन चालक हैं। दो साल पहले पढ़ाई करने के लिए वहां गए थे। बाद में वहीं पर नौकरी लग गई। इस बार मैंने भाई को चांदी की राखी के साथ अपने हाथों की बनी मिठाइयां भी भिजवाई हैं। डाक के माध्यम से दो साल से राखी भेज रही हूं।