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Karnal News: सदन में 103 अवैध कॉलोनियों पर हंगामा, नियमितीकरण लटका, पहले होगा सर्वे
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। नगर निगम की बजटीय बैठक हंगामेदार रही। सदन ने वित्तीय वर्ष 2023-24 का 273 करोड़ 8 हजार 763 रुपये की प्रस्तावित आय और 204 करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय के बीच 68 करोड़ के लाभ का प्रस्ताव बजट पारित कर दिया, लेकिन अवैध कॉलोनियों को लेकर जमकर शोरशराबा हुआ। पार्षदों ने सर्वे के बाद अवैध कॉलोनियों को नियमित करने की मांग की, लेकिन एक धड़ा सिर्फ खसरा व नाम के आधार पर ही उन्हें नियमित कराने के पक्ष में था। पार्षदों में भी तीखी नोकझोंक दिखी तो एक पार्षद ने कई बार बहिष्कार कर बैठक से जाने की कोशिश भी की लेकिन साथी पार्षदों ने समझाकर रोक लिया।
सीवरेज लीकेज, सफाई न होने, पिछले दिनों खरीदी गई स्ट्रीट लाइटों की जानकारी नहीं देने, सुपरसकर व जेट मशीनें खराब होने के भी मुद्दे सदन में गूंजे। आखिरकार, पहले एजेंडे में शामिल की गई कॉलोनियों को नियमित करने के लिए तो हरी झंडी दी गई, लेकिन नए एजेंडे में शामिल की गई 103 कॉलोनियों के नियमितीकरण का प्रस्ताव टल गया, हालांकि इनका सर्वे कराने को सदन में मंजूरी दे दी।
डीटीपी गुंजन वर्मा चाहती थीं कि हर हाल में जो 26 अवैध कॉलोनियों को नियमितीकरण के लिए रखा गया है, उसे पास किया जाए, उसका सर्वे 2015 में होना बताया जबकि एजेंडे में इनमें से कई कॉलोनियों के न तो नाम थे और न ही खसरा नंबर। पार्षदों ने आरोप लगाया कि इनमें अधिकतर कॉलोनाइजरों द्वारा दी गई वह कॉलोनियां हैं, जो अविकसित हैं, खाली प्लॉट हैं। इन्हें कॉलोनाइजरों को फायदा पहुंचाने के लिए पारित कराया जा रहा है लेकिन बहुमत होने के कारण इन 26 कॉलोनियों को नियमितीकरण के लिए पास कर दिया गया। इन्हें अब नियमित करने के लिए सरकार को भेजा जाएगा।
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वार्ड 13, 15 व 17 के पार्षदों ने रोड स्वीपिंग मशीन से कोई फायदा शहर को न होने की बात कहते हुए इसे बंद करने और सुपर सकर मशीन, पांच जेट मशीनें अधिकतर खराब पड़े होने पर क़डी नाराजगी जाहिर की। सिर्फ एक मशीन चल रही है, जो बुलाने के कई दिन बाद भी मौके पर नहीं पहुंच पाती। सीवरेज की लीकेज व टूटी सड़कों पर भी खूब शोरशराबा हुआ, जिसमें पार्षदों ने संबंधित अधिकारियों को पोल खोली। एजेंडा में शामिल की गई 103 कॉलोनियों पर खूब शोरशराबा हुआ। पार्षद जोगेंद्र शर्मा कई बार भड़के। उनका कहना था कि आबादी के आधार पर 50 से 80 प्रतिशत आबादी वाली कॉलोनियों को नियमितीकरण के लिए पास किया जाना चाहिए। इसके लिए पूर्व सर्वे आवश्यक है। बिना सर्वे कॉलोनियों को पास करने पर कोर्ट में जाने की बात कहते हुए बैठक का बहिष्कार करने के लिए भी कई बार उठे, लेकिन साथी पार्षदों ने समझा कर रोक लिया। इसमें नरसी विलेज सहित कई पहले से अप्रूूव्ड कॉलोनियों व खाली प्लाॅटों वाली कॉलोनियों के नाम शामिल होने की भी बात उठी।
काफी देर तक बहस के बाद इन 103 कॉलोनियों को सदन में नियमितीकरण की मंजूरी नहीं दी जा सकी। पार्षद नीलम व उनके प्रतिनिधि भूपेंद्र नोतना ने अपने क्षेत्र की कॉलोनियों को पास करने को लेकर बहस की। आखिर सदन ने निर्णय लिया कि पहले इनका सर्वे कराया जाएगा, इसके बाद सदन से प्रस्ताव पारित कर सरकार को नियमित करने के लिए भेजा जाएगा। पार्षद मोनू शर्मा ने वर्षों पहले निगम में शामिल किए गए 15 गांवों में सुविधाएं शुरू नहीं होने का मुद्दा उठाया। ईश गुलाटी ने शहर की टूटी पड़ी सड़कों व सफाई अव्यवस्था के साथ प्रॉपर्टी टैक्स की दिक्कतों से लोगों को निजात दिलाने का मुद्दा उठाया। डैफिशिएंट कॉलोनियों में विकास कार्यो का भुगतान न होने से रुके विकास कार्यो पर निगमायुक्त ने बताया कि मुख्यालय को पत्र लिखा है। बैठक में वरिष्ठï उप महापौर राजेश अग्घी, उप महापौर नवीन कुमार और निगम के वरिष्ठ अधिकारियों में गौरव कुमार, अरुण भार्गव, अदिति आदि मौजूद रहे।
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महापौर रेणू बाला गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार को नगर निगम के सभागार में निगमायुक्त अभिषेक मीणा व अन्य अफसरों, 20 में से 13 निर्वाचित, दो मनोनीत पाषर्दों की मौजूदगी में आयोजित की गई हाउस की बजटीय बैठक में आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत किया गया। सदन को बताया गया कि समाप्त हो रहे वित्तीय वर्ष में 49 करोड़ 97 लाख 48 हजार 763 रुपये ओपनिंग बैलेंस है।
वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए निगम की कुल आय 191 करोड़, 49 लाख, 46 हजार 788 रुपये एवं केंद्र व राज्य सरकार के फंड और निगम के विभिन्न आय स्रोतों को मिलाकर कुल प्रस्तावित आय 273 करोड़ 08 हजार 763 रुपये होगी। जबकि नए वित्तीय वर्ष में 204 करोड़ 93 लाख 84 हजार 592 रुपये का प्रस्तावित व्यय रखा गया है। जिसे देखते हुए बजट 68 करोड़ 6 लाख 24 हजार 181 रुपये लाभ का रहेगा। बजट में जन सुविधाओं पर पिछले साल की अपेक्षा ज्यादा खर्च किया जाएगा।
आखिर कहां गईं 1400 स्ट्रीट लाइटें
निगम द्वारा वर्षो पहले खरीदी गईं 1400 स्ट्रीट लाइटों का मुद्दा आज फिर सदन में गूंजा। इससे पहले की बैठक में डिप्टी मेयर नवीन कुमार इसे मुद्दे को उठा चुके हैं। पार्षदों ने कहा कि जब स्ट्रीट लाइटें स्मार्ट सिटी लगा रहा है, तो निगम की लाइटें कहां जा रही हैं, पहले खरीदी गई 1400 लाइटें आखिर कहां गईं। स्मार्ट सिटी द्वारा लगाई जा रही लाइटों में पोल अभी तक नहीं लगे। स्ट्रीट लाइटें भी लगाने के कुछ दिन बाद ही खराब हो रही हैं। आखिर ये कैसी स्मार्ट लाइटें हैं। मेयर ने दिव्य नगर योजना के तहत 50-50 प्रतिशत धनराशि के आधार पर शहर में डेकोरेटिव लाइटें लगवाने की बात कही।
बैठक से पहले पार्षदों को नहीं दिया बजट
नगर निगम के अफसरों ने बजट का एजेंडा पार्षदों को बैठक शुरू होने से एक मिनट पहले तक नहीं दिया। जब पार्षद बैठक में बैठ गए, तभी उनके सामने एजेंडा रखा गया। जिससे पार्षद बजट को समझ ही नहीं सके। बजट पास कर दिया गया।
पार्षद प्रतिनिधियों पर उठे सवाल
अवैध कॉलोनियों की वकालत करने पर सदन में एक पार्षद ने ही पार्षद प्रतिनिधियों के बैठक में शामिल होने पर सवाल खड़े किए। करीब पांच पार्षदों के प्रतिनिधि ही शामिल थे। एक प्रतिनिधि ने तो आनन फानन फोन करके बैठक में 2.15 बजे पार्षद को घर से बुलाया। नौबत मतदान की आ गई। मतदान के लिए पर्चियां भी बांट दी गईं, लेकिन बाद में महापौर के कहने पर मतदान नहीं हुआ, प्रस्ताव को सर्वे तक सीमित कर दिया गया।
किस मद में कितना होगा खर्च
- सफाई कार्य पर निगम फंड से इस वर्ष 27.50 करोड़ रुपये व्यय किए गए थे, लेकिन नए वित्तीय वर्ष में 41.28 करोड़ खर्च होंगे
- कुत्तों की नसबंदी पर इस साल कोई खर्च नहीं हुआ, नए वित्तीय वर्ष में दो करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे
- गोशाला की देखभाल पर इस वित्तीय वर्ष में अब तक 27 लाख खर्च गए, नए वित्तीय वर्ष में 6.30 करोड़ रुपये व्यय होंगे
- बरसाती पानी की निकासी पर चालू वित्तीय वर्ष में चार करोड़ रुपये तो नए वित्तीय वर्ष में आठ करोड़ रुपये खर्च होंगे
- फैंसी और सजावटी लाइटों पर इस वित्तीय वर्ष में कोई व्यय नहीं हुआ, नए वित्तीय वर्ष में 1.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे
- पार्कों के निर्माण व विकास पर इस वित्तीय वर्ष में 3.23 करोड़ रुपये खर्चे तो नए वित्तीय वर्ष में 8.55 करोड़ रुपये व्यय होंगे
- सड़कों पर इस वित्तीय वर्ष में 1.50 करोड़ रुपये व्यय किए तो नए वित्तीय वर्ष में आठ करोड़ रुपये खर्च करने को मंजूरी मिली है
- अन्य विकास कार्यों पर इस वित्तीय वर्ष में 34 करोड़ रुपये खर्च किए तो नए वित्तीय वर्ष में 40 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए हैं।
- मुख्य द्वारों के रख-रखाव पर नए वित्तीय वर्ष में 3.40 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है।
विज्ञापन से होगी एक करोड़ की कमाई
निगमायुक्त ने नए वित्तीय वर्ष में विज्ञापन से एक करोड़ की आय करने, अवैध विज्ञापन प्रदर्शित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही। वहीं, विज्ञापन प्रदर्शित करने के लिए 87 लोकेशन चिन्हित की गई हैं। कोई भी एजेंसी या कांट्रेक्टर एक या एक से अधिक साइट विज्ञापन के लिए ले सकता है। अवैध विज्ञापनों को रोकने के लिए संयुक्त निगमायुक्त को एन्फोर्समेंट अधिकारी बनाया गया, साथ ही 20 कर्मचारियों का दल गठित किया गया। नोटिस देकर अवैध विज्ञापन हटाएंगे। दोबारा विज्ञापन लगाने पर चालान काटे जाएंगे। डोर टू डोर कचरा एकत्रीकरण के लिए हर घर के आगे आरएफआईडी. स्कैनर व बार कोड लगेगा। अगले छह महीनों में इस काम के लिए हर हाउस होल्ड को कवर करने का लक्ष्य रखा है। शिकायत निवारण प्रणाली को बेहतर बनाया जाएगा। झुगी-झोपडिय़ों में जो एनजीओ, बच्चों को तालीम दे रहे हैं, उनके लिए ब्लैक बोर्ड व स्टेशनरी उपलब्ध कराने के लिए पांच लाख रुपये का फुटकर व्यय बजट में प्रावधान करने को कहा गया। फूसगढ़ गोशाला में गोवंश की संख्या क्षमता से ज्यादा होने पर सभी पार्षदों से कहा गया कि वह आसपास की गोशालाओं से अनुरोध करें कि वह सुविधानुसार गायों को ले लें।
मच्छरों से दिलाई जाएगी निजात
महापौर रेणू बाला गुप्ता ने सीएसआई को निर्देश दिए कि नगर निगम की छह फॉगिंग मशीनों में से चार को वार्डों में लगाया जाए और दो को आपातकालीन के लिए इस्तेमाल किया जाए। 15 नई फॉगिंग मशीनें खरीदी जानी प्रस्तावित हैं। इससे हर वार्ड में एक-एक मशीन जा सकेगी।
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करनाल। नगर निगम की बजटीय बैठक हंगामेदार रही। सदन ने वित्तीय वर्ष 2023-24 का 273 करोड़ 8 हजार 763 रुपये की प्रस्तावित आय और 204 करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय के बीच 68 करोड़ के लाभ का प्रस्ताव बजट पारित कर दिया, लेकिन अवैध कॉलोनियों को लेकर जमकर शोरशराबा हुआ। पार्षदों ने सर्वे के बाद अवैध कॉलोनियों को नियमित करने की मांग की, लेकिन एक धड़ा सिर्फ खसरा व नाम के आधार पर ही उन्हें नियमित कराने के पक्ष में था। पार्षदों में भी तीखी नोकझोंक दिखी तो एक पार्षद ने कई बार बहिष्कार कर बैठक से जाने की कोशिश भी की लेकिन साथी पार्षदों ने समझाकर रोक लिया।
सीवरेज लीकेज, सफाई न होने, पिछले दिनों खरीदी गई स्ट्रीट लाइटों की जानकारी नहीं देने, सुपरसकर व जेट मशीनें खराब होने के भी मुद्दे सदन में गूंजे। आखिरकार, पहले एजेंडे में शामिल की गई कॉलोनियों को नियमित करने के लिए तो हरी झंडी दी गई, लेकिन नए एजेंडे में शामिल की गई 103 कॉलोनियों के नियमितीकरण का प्रस्ताव टल गया, हालांकि इनका सर्वे कराने को सदन में मंजूरी दे दी।
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डीटीपी गुंजन वर्मा चाहती थीं कि हर हाल में जो 26 अवैध कॉलोनियों को नियमितीकरण के लिए रखा गया है, उसे पास किया जाए, उसका सर्वे 2015 में होना बताया जबकि एजेंडे में इनमें से कई कॉलोनियों के न तो नाम थे और न ही खसरा नंबर। पार्षदों ने आरोप लगाया कि इनमें अधिकतर कॉलोनाइजरों द्वारा दी गई वह कॉलोनियां हैं, जो अविकसित हैं, खाली प्लॉट हैं। इन्हें कॉलोनाइजरों को फायदा पहुंचाने के लिए पारित कराया जा रहा है लेकिन बहुमत होने के कारण इन 26 कॉलोनियों को नियमितीकरण के लिए पास कर दिया गया। इन्हें अब नियमित करने के लिए सरकार को भेजा जाएगा।
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वार्ड 13, 15 व 17 के पार्षदों ने रोड स्वीपिंग मशीन से कोई फायदा शहर को न होने की बात कहते हुए इसे बंद करने और सुपर सकर मशीन, पांच जेट मशीनें अधिकतर खराब पड़े होने पर क़डी नाराजगी जाहिर की। सिर्फ एक मशीन चल रही है, जो बुलाने के कई दिन बाद भी मौके पर नहीं पहुंच पाती। सीवरेज की लीकेज व टूटी सड़कों पर भी खूब शोरशराबा हुआ, जिसमें पार्षदों ने संबंधित अधिकारियों को पोल खोली। एजेंडा में शामिल की गई 103 कॉलोनियों पर खूब शोरशराबा हुआ। पार्षद जोगेंद्र शर्मा कई बार भड़के। उनका कहना था कि आबादी के आधार पर 50 से 80 प्रतिशत आबादी वाली कॉलोनियों को नियमितीकरण के लिए पास किया जाना चाहिए। इसके लिए पूर्व सर्वे आवश्यक है। बिना सर्वे कॉलोनियों को पास करने पर कोर्ट में जाने की बात कहते हुए बैठक का बहिष्कार करने के लिए भी कई बार उठे, लेकिन साथी पार्षदों ने समझा कर रोक लिया। इसमें नरसी विलेज सहित कई पहले से अप्रूूव्ड कॉलोनियों व खाली प्लाॅटों वाली कॉलोनियों के नाम शामिल होने की भी बात उठी।
काफी देर तक बहस के बाद इन 103 कॉलोनियों को सदन में नियमितीकरण की मंजूरी नहीं दी जा सकी। पार्षद नीलम व उनके प्रतिनिधि भूपेंद्र नोतना ने अपने क्षेत्र की कॉलोनियों को पास करने को लेकर बहस की। आखिर सदन ने निर्णय लिया कि पहले इनका सर्वे कराया जाएगा, इसके बाद सदन से प्रस्ताव पारित कर सरकार को नियमित करने के लिए भेजा जाएगा। पार्षद मोनू शर्मा ने वर्षों पहले निगम में शामिल किए गए 15 गांवों में सुविधाएं शुरू नहीं होने का मुद्दा उठाया। ईश गुलाटी ने शहर की टूटी पड़ी सड़कों व सफाई अव्यवस्था के साथ प्रॉपर्टी टैक्स की दिक्कतों से लोगों को निजात दिलाने का मुद्दा उठाया। डैफिशिएंट कॉलोनियों में विकास कार्यो का भुगतान न होने से रुके विकास कार्यो पर निगमायुक्त ने बताया कि मुख्यालय को पत्र लिखा है। बैठक में वरिष्ठï उप महापौर राजेश अग्घी, उप महापौर नवीन कुमार और निगम के वरिष्ठ अधिकारियों में गौरव कुमार, अरुण भार्गव, अदिति आदि मौजूद रहे।
महापौर रेणू बाला गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार को नगर निगम के सभागार में निगमायुक्त अभिषेक मीणा व अन्य अफसरों, 20 में से 13 निर्वाचित, दो मनोनीत पाषर्दों की मौजूदगी में आयोजित की गई हाउस की बजटीय बैठक में आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत किया गया। सदन को बताया गया कि समाप्त हो रहे वित्तीय वर्ष में 49 करोड़ 97 लाख 48 हजार 763 रुपये ओपनिंग बैलेंस है।
वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए निगम की कुल आय 191 करोड़, 49 लाख, 46 हजार 788 रुपये एवं केंद्र व राज्य सरकार के फंड और निगम के विभिन्न आय स्रोतों को मिलाकर कुल प्रस्तावित आय 273 करोड़ 08 हजार 763 रुपये होगी। जबकि नए वित्तीय वर्ष में 204 करोड़ 93 लाख 84 हजार 592 रुपये का प्रस्तावित व्यय रखा गया है। जिसे देखते हुए बजट 68 करोड़ 6 लाख 24 हजार 181 रुपये लाभ का रहेगा। बजट में जन सुविधाओं पर पिछले साल की अपेक्षा ज्यादा खर्च किया जाएगा।
आखिर कहां गईं 1400 स्ट्रीट लाइटें
निगम द्वारा वर्षो पहले खरीदी गईं 1400 स्ट्रीट लाइटों का मुद्दा आज फिर सदन में गूंजा। इससे पहले की बैठक में डिप्टी मेयर नवीन कुमार इसे मुद्दे को उठा चुके हैं। पार्षदों ने कहा कि जब स्ट्रीट लाइटें स्मार्ट सिटी लगा रहा है, तो निगम की लाइटें कहां जा रही हैं, पहले खरीदी गई 1400 लाइटें आखिर कहां गईं। स्मार्ट सिटी द्वारा लगाई जा रही लाइटों में पोल अभी तक नहीं लगे। स्ट्रीट लाइटें भी लगाने के कुछ दिन बाद ही खराब हो रही हैं। आखिर ये कैसी स्मार्ट लाइटें हैं। मेयर ने दिव्य नगर योजना के तहत 50-50 प्रतिशत धनराशि के आधार पर शहर में डेकोरेटिव लाइटें लगवाने की बात कही।
बैठक से पहले पार्षदों को नहीं दिया बजट
नगर निगम के अफसरों ने बजट का एजेंडा पार्षदों को बैठक शुरू होने से एक मिनट पहले तक नहीं दिया। जब पार्षद बैठक में बैठ गए, तभी उनके सामने एजेंडा रखा गया। जिससे पार्षद बजट को समझ ही नहीं सके। बजट पास कर दिया गया।
पार्षद प्रतिनिधियों पर उठे सवाल
अवैध कॉलोनियों की वकालत करने पर सदन में एक पार्षद ने ही पार्षद प्रतिनिधियों के बैठक में शामिल होने पर सवाल खड़े किए। करीब पांच पार्षदों के प्रतिनिधि ही शामिल थे। एक प्रतिनिधि ने तो आनन फानन फोन करके बैठक में 2.15 बजे पार्षद को घर से बुलाया। नौबत मतदान की आ गई। मतदान के लिए पर्चियां भी बांट दी गईं, लेकिन बाद में महापौर के कहने पर मतदान नहीं हुआ, प्रस्ताव को सर्वे तक सीमित कर दिया गया।
किस मद में कितना होगा खर्च
- सफाई कार्य पर निगम फंड से इस वर्ष 27.50 करोड़ रुपये व्यय किए गए थे, लेकिन नए वित्तीय वर्ष में 41.28 करोड़ खर्च होंगे
- कुत्तों की नसबंदी पर इस साल कोई खर्च नहीं हुआ, नए वित्तीय वर्ष में दो करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे
- गोशाला की देखभाल पर इस वित्तीय वर्ष में अब तक 27 लाख खर्च गए, नए वित्तीय वर्ष में 6.30 करोड़ रुपये व्यय होंगे
- बरसाती पानी की निकासी पर चालू वित्तीय वर्ष में चार करोड़ रुपये तो नए वित्तीय वर्ष में आठ करोड़ रुपये खर्च होंगे
- फैंसी और सजावटी लाइटों पर इस वित्तीय वर्ष में कोई व्यय नहीं हुआ, नए वित्तीय वर्ष में 1.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे
- पार्कों के निर्माण व विकास पर इस वित्तीय वर्ष में 3.23 करोड़ रुपये खर्चे तो नए वित्तीय वर्ष में 8.55 करोड़ रुपये व्यय होंगे
- सड़कों पर इस वित्तीय वर्ष में 1.50 करोड़ रुपये व्यय किए तो नए वित्तीय वर्ष में आठ करोड़ रुपये खर्च करने को मंजूरी मिली है
- अन्य विकास कार्यों पर इस वित्तीय वर्ष में 34 करोड़ रुपये खर्च किए तो नए वित्तीय वर्ष में 40 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए हैं।
- मुख्य द्वारों के रख-रखाव पर नए वित्तीय वर्ष में 3.40 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है।
विज्ञापन से होगी एक करोड़ की कमाई
निगमायुक्त ने नए वित्तीय वर्ष में विज्ञापन से एक करोड़ की आय करने, अवैध विज्ञापन प्रदर्शित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही। वहीं, विज्ञापन प्रदर्शित करने के लिए 87 लोकेशन चिन्हित की गई हैं। कोई भी एजेंसी या कांट्रेक्टर एक या एक से अधिक साइट विज्ञापन के लिए ले सकता है। अवैध विज्ञापनों को रोकने के लिए संयुक्त निगमायुक्त को एन्फोर्समेंट अधिकारी बनाया गया, साथ ही 20 कर्मचारियों का दल गठित किया गया। नोटिस देकर अवैध विज्ञापन हटाएंगे। दोबारा विज्ञापन लगाने पर चालान काटे जाएंगे। डोर टू डोर कचरा एकत्रीकरण के लिए हर घर के आगे आरएफआईडी. स्कैनर व बार कोड लगेगा। अगले छह महीनों में इस काम के लिए हर हाउस होल्ड को कवर करने का लक्ष्य रखा है। शिकायत निवारण प्रणाली को बेहतर बनाया जाएगा। झुगी-झोपडिय़ों में जो एनजीओ, बच्चों को तालीम दे रहे हैं, उनके लिए ब्लैक बोर्ड व स्टेशनरी उपलब्ध कराने के लिए पांच लाख रुपये का फुटकर व्यय बजट में प्रावधान करने को कहा गया। फूसगढ़ गोशाला में गोवंश की संख्या क्षमता से ज्यादा होने पर सभी पार्षदों से कहा गया कि वह आसपास की गोशालाओं से अनुरोध करें कि वह सुविधानुसार गायों को ले लें।
मच्छरों से दिलाई जाएगी निजात
महापौर रेणू बाला गुप्ता ने सीएसआई को निर्देश दिए कि नगर निगम की छह फॉगिंग मशीनों में से चार को वार्डों में लगाया जाए और दो को आपातकालीन के लिए इस्तेमाल किया जाए। 15 नई फॉगिंग मशीनें खरीदी जानी प्रस्तावित हैं। इससे हर वार्ड में एक-एक मशीन जा सकेगी।