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Karnal News: लोगों के 2.14 करोड़ हड़पे... संपत्ति कुर्क करने का आदेश
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करनाल। लोगों से ऋण और जमापूंजी के नाम पर 2.14 करोड़ रुपये के गबन के मामले में दी न्यू करनाल को-ऑपरेटिव मल्टी पर्पज सोसायटी लिमिटेड के पूर्व प्रधान भगवान सिंह गिल और प्रबंधक मीनू खन्ना की संपत्ति कुर्की का आदेश हुआ है। यह आदेश सहकारी समितियां कार्यालय की सहायक रजिस्ट्रार अदिति संगर ने 2023 में हुए गबन में हरियाणा सहकारी समितियां अधिनियम, 1984 की धारा 111 के तहत दिया है। विभागीय जांच में दोनों गबन के लिए जिम्मेदार पाए गए।
दोनों के पास मल्टीपर्पज सोसायटी यानी शिक्षा या परिवहन समिति व खाद बीज विक्रेता सोसायटी बनाने का अधिकार था लेकिन उन्होंने बैंक सोसायटी बनाकर 160 खाताधारकों के साथ धोखाधड़ी की। उनसे कई तरह के ऋण और जमा राशि व विदेश भेजने के नाम पर डिपॉजिट कराकर धोखाधड़ी को अंजाम दिया जबकि यह कार्य उनकी सोसायटी का नहीं था।
सहायक रजिस्ट्रार अदिति संगर ने बताया कि मामला सामने आने के बाद दोनों को 18 नोटिस जारी किए गए। उनकी ओर से गबन राशि जमा नहीं कराई गई तो कार्रवाई की गई। संपत्ति कुर्की के आदेश का पत्र हरियाणा और पंजाब के सभी उपायुक्त, डीआरओ, तहसीलदार को भेजा गया है ताकि वे अपनी किसी भी संपत्ति को ट्रांसफर या बेच न पाएं। सोसायटी को 2024 में बंद करने के बाद से उनके बैंक खाते भी फ्रीज किए हुए हैं।
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एक साल तक चली विभागीय जांच
सहायक रजिस्ट्रार ने बताया कि कार्रवाई वर्ष 2023-24 में समिति के लगभग 160 खाता धारकों की ओर से दर्ज कराई गई शिकायतों पर एक वर्ष तक चली जांच के बाद की गई है। हरियाणा सहकारी समिति अधिनियम, 1984 की धारा 101 के तहत भगवान सिंह गिल और मीनू खन्ना के विरुद्ध सरचार्ज कार्रवाई आरंभ की गई थी। वित्तीय अनियमितता, गबन होने पर दोषी व्यक्ति पर ''''सरचार्ज कार्रवाई'''' (वसूली की कार्रवाई) की जाती है। मई, 2024 में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की गई। दोनों आरोपी जमानत पर हैं।
एआरसीएस कार्यालय ने उन जमाकर्ताओं से भी पासबुक प्रविष्टियां, रसीदें, चेक आदि प्रमाण लेकर कार्यालय से संपर्क करने की अपील की है। भगवान सिंह गिल और मीनू खन्ना अथवा उनके परिजन के नाम संपत्ति की जानकारी भी देने के लिए कहा है।
28 शिकायतों में आए 160 नाम... 20 लाख रुपये तक कराए जमा
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, कुल 28 शिकायतें विभाग को प्राप्त हुईं। इनमें 160 खाताधारकों से धोखाधड़ी की बात सामने आई। इसके बाद पूर्व सहायक रजिस्ट्रार त्रिलोचन सिंह की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई। जांच में सामने आया कि लोगों से 60 रुपये से लेकर 20 लाख रुपये तक जमा कराए गए थे।
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दोनों के पास मल्टीपर्पज सोसायटी यानी शिक्षा या परिवहन समिति व खाद बीज विक्रेता सोसायटी बनाने का अधिकार था लेकिन उन्होंने बैंक सोसायटी बनाकर 160 खाताधारकों के साथ धोखाधड़ी की। उनसे कई तरह के ऋण और जमा राशि व विदेश भेजने के नाम पर डिपॉजिट कराकर धोखाधड़ी को अंजाम दिया जबकि यह कार्य उनकी सोसायटी का नहीं था।
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सहायक रजिस्ट्रार अदिति संगर ने बताया कि मामला सामने आने के बाद दोनों को 18 नोटिस जारी किए गए। उनकी ओर से गबन राशि जमा नहीं कराई गई तो कार्रवाई की गई। संपत्ति कुर्की के आदेश का पत्र हरियाणा और पंजाब के सभी उपायुक्त, डीआरओ, तहसीलदार को भेजा गया है ताकि वे अपनी किसी भी संपत्ति को ट्रांसफर या बेच न पाएं। सोसायटी को 2024 में बंद करने के बाद से उनके बैंक खाते भी फ्रीज किए हुए हैं।
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एक साल तक चली विभागीय जांच
सहायक रजिस्ट्रार ने बताया कि कार्रवाई वर्ष 2023-24 में समिति के लगभग 160 खाता धारकों की ओर से दर्ज कराई गई शिकायतों पर एक वर्ष तक चली जांच के बाद की गई है। हरियाणा सहकारी समिति अधिनियम, 1984 की धारा 101 के तहत भगवान सिंह गिल और मीनू खन्ना के विरुद्ध सरचार्ज कार्रवाई आरंभ की गई थी। वित्तीय अनियमितता, गबन होने पर दोषी व्यक्ति पर ''''सरचार्ज कार्रवाई'''' (वसूली की कार्रवाई) की जाती है। मई, 2024 में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की गई। दोनों आरोपी जमानत पर हैं।
एआरसीएस कार्यालय ने उन जमाकर्ताओं से भी पासबुक प्रविष्टियां, रसीदें, चेक आदि प्रमाण लेकर कार्यालय से संपर्क करने की अपील की है। भगवान सिंह गिल और मीनू खन्ना अथवा उनके परिजन के नाम संपत्ति की जानकारी भी देने के लिए कहा है।
28 शिकायतों में आए 160 नाम... 20 लाख रुपये तक कराए जमा
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, कुल 28 शिकायतें विभाग को प्राप्त हुईं। इनमें 160 खाताधारकों से धोखाधड़ी की बात सामने आई। इसके बाद पूर्व सहायक रजिस्ट्रार त्रिलोचन सिंह की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई। जांच में सामने आया कि लोगों से 60 रुपये से लेकर 20 लाख रुपये तक जमा कराए गए थे।