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शोध ः बांसुरी की धुन बदल रही गायों का व्यवहार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 01 Sep 2021 02:32 AM IST
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Research: Behavior of cows changing the tune of flute
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी की धुन बजते ही बृज की सभी गैया उनके आसपास आकर शांत बैठ जाती थी। यह बात काल्पनिक नहीं थी, क्योंकि यह बात राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के जलवायु प्रतिरोधी पशु अनुसंधान केंद्र ने भी साबित की है। यहां देसी गाय पालन के साथ संगीत का इस्तेमाल करके परीक्षण किया गया। इससे गायों के स्वभाव, व्यवहार व अन्य क्रियाकलापों पर भी प्रभाव देखने को मिला। बौद्धिक क्षमता बढ़ने के साथ एक-दूसरे के साथ झगड़ने की फितरत भी बदल गई।
अनुसंधान में यह बात भी सामने आई है कि गायों को बांसुरी की धुन ही सबसे ज्यादा पसंद है। बांसुरी के संगीत में तबला व सितार के मिश्रण को गायों ने पसंद नहीं किया। धमक वाले संगीत भी पसंद नहीं किए। इससे वे चौक कर विचलित हो जाती हैं।
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नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करती हैं बछड़ियां
संस्थान की जलवायु प्रतिरोधी परियोजना पर 2011 से काम चल रहा है। एक अप्रैल 2020 से परियोजना के तीसरे चरण की शुरुआत हुई। इसका प्रभार वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. आशुतोष को दिया गया। इसका उद्देश्य पशुधन पर जलवायु परिवर्तन से संबंधित प्रभावों का अध्ययन व समाधान करना है। संस्थान के कैटल यार्ड से चार से साढ़े चार माह तक की 18 साहिवाल नस्ल, 6 थारपारकर व दो गिर नस्ल की बछड़ियां केंद्र में लाकर उनका पालन-पोषण किया जा रहा है। इन बछड़ियों का नामकरण किया गया। गुड़िया, रिद्धि, सिद्धी, काली, लक्ष्मी, सरस्वती, गंगा व यमुना इत्यादि नाम रखे गए हैं। नाम से पुकारने पर ये बछड़ियां प्रतिक्रिया व्यक्त करती हैं।
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दूसरी गायों के लिए अलग से लगाना पड़ा संगीत सिस्टम
डा. आशुतोष ने बताया कि परियोजना परिसर के समीप लगते कैटल यार्ड की गायों को जब बांसुरी की धुन सुनाई देती तो वे केंद्र की तरफ आ जाती थी। संगीत बंदकर देने पर कैटल यार्ड की गायें विचलित हो जाती थी। बांसुरी की धुन बजने पर ही शांत होती थी। जिस कारण संस्थान को कैटल यार्ड के लिए भी अलग से संगीत की व्यवस्था करनी पड़ी है।
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