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Karnal News: नगर सुधार मंडल के प्लॉटों की हो सकेगी रजिस्ट्री, मलकियत भी करा सकेंगे ट्रांसफर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 01 Feb 2026 02:17 AM IST
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Registration of plots of Municipal Improvement Board will be possible, ownership can also be transferred.
शहरी निकाय की और से जारी किया गया पत्र
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। अब इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट यानी नगर सुधार मंडल की योजनाओं के तहत आवंटित आवासीय और व्यावसायिक प्लॉटों की रजिस्ट्री हो सकेगी। उनके नक्शे भी पास हो सकेंगे। साथ ही प्लॉटों की मलकियत भी ट्रांसफर हो सकेगी। प्लॉट धारकों को इसके लिए नगर निगम में एक निर्धारित शुल्क जमा करवाना होगा। इससे पुराने शहर में बसे उन करीब 40 हजार प्लॉट धारकों को राहत मिलेगी।
अब तक इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की योजनाओं में प्लॉट आवंटन के बाद तीन वर्ष के भीतर रजिस्ट्री पूरी करना अनिवार्य था। तय अवधि में बिक्री विलेख न होने की स्थिति में प्लॉट धारकों को कई तरह की कानूनी और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। शहरी स्थानीय निकाय के नए आदेश से लंबे समय से निर्माण की समय-सीमा और सेल डीड पर उलझे मामलों में राहत की उम्मीद है। नगर निकायों को भी बकाया शुल्क की वसूली और योजनाओं के नियमितीकरण में सहूलियत भी मिल सकती है।
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सरकार ने पहले भी वर्ष 2013 में इस पॉलिसी को लागू किया था। सितंबर, 2024 में इसे बंद कर दिया गया था। अब फिर से इसे लागू किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि नगर सुधार मंडल में शहर की आवासीय और व्यासायिक आवंटन में 1986-87 को आधार माना गया था। योजना में पुराने शहर में करीब आठ बड़ी आवासीय कॉलोनी और नौ से दस मार्केट में प्लॉट आवंटित किए गए थे। इसमें शहर की धड़कन कहा जाने वाला मुगल कैनाल से लेकर नेहरू पैलेस मार्केट का इलाका भी शामिल रहेेगा।
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आवंटन से रजिस्ट्री तक गणना
विस्तार शुल्क की गणना प्लॉट के आवंटन की तारीख से रजिस्ट्री (सेल डीड) के आवेदन की तारीख तक की जाएगी। अगर भवन निर्माण निर्धारित मानकों से अधिक या नियमों के विपरीत किया गया है तो उस पर लागू नियमों के अनुसार कंपोजीशन फीस भी अलग से देनी होगी। उदाहरण के तौर पर एक 200 वर्ग मीटर का प्लॉट वर्ष 1990 में आवंटित हुआ हो और 2025 में रजिस्ट्री के लिए आवेदन किया गया हो तो वर्षों की गणना के आधार पर हजारों से लेकर लाखों रुपये तक का विस्तार शुल्क बन सकता है। बिना निर्माण वाले मामलों में यह राशि और अधिक हो सकती है। शहरी स्थानीय निकाय के ये आदेश प्रदेशभर के आवासीय योजनाओं के लंबित मामलों में तत्काल लागू होंगे। अधिकारियों का मानना है कि इससे इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की योजनाओं से जुड़े वर्षों पुराने विवाद और लंबित प्रकरण सुलझेंगे, साथ ही प्लॉट धारकों को वैध रूप से निर्माण पूरा करने का अवसर मिलेगा।





अधूरे निर्माण पर नियम
जिन मामलों में प्लॉट पर भवन का निर्माण तो हो चुका है लेकिन वह पूर्ण नहीं हुआ है या उसका ओसी ऑक्यूपेशन या कंपलीशन सर्टिफिकेट नहीं लिया गया वहां बिल्डिंग प्लान की वैधता बढ़ाने के लिए प्रति वर्ग मीटर प्रति वर्ष शुल्क लिया जाएगा। यह शुल्क नगर निगम गुरुग्राम, मानेसर और फरीदाबाद में 30 रुपये, अन्य नगर निगम क्षेत्रों में 20 रुपये, नगर परिषद में 15 रुपये और नगर समिति क्षेत्रों में 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर प्रतिवर्ष तय किया गया है।

बगैर निर्माण पर नियम
जिन मामलों में आवंटित प्लॉट पर अब तक कोई निर्माण नहीं हुआ है, वहां अधिक दरों पर विस्तार शुल्क वसूला जाएगा। गुरुग्राम, मानेसर और फरीदाबाद नगर निगम क्षेत्र में 60 रुपये, अन्य नगर निगम क्षेत्रों में 40 रुपये, नगर परिषद में 30 रुपये और नगर समिति क्षेत्रों में 20 रुपये प्रति वर्ग मीटर प्रति वर्ष शुल्क निर्धारित किया गया है। यह शुल्क निर्धारित समय में भवन निर्माण न करने की शर्त के कंपाउंडिंग (समाधान) के रूप में आवेदक से लिया जाएगा।

वर्जन-
तत्कालीन नगर सुधार मंडल ने विभिन्न योजनाओं में बेचे या अलॉट किए गए प्लॉटों की एक्सटेंशन पॉलिसी की अवधि को बढ़ा दिया गया है। इसके लिए एक्सटेंशन फीस जमा करवाने के लिए निगम में आवेदन करना होगा। ताकि प्लॉटों के भवन प्लान, मलकियत ट्रांसफर और सेल डीड इत्यादि जारी किए जा सकेंगे। - डॉ. वैशाली शर्मा, आयुक्त, नगर निगम
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