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Karnal News: घरौंडा के नए सेक्टरों पर रेट का रण
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। घरौंडा में प्रस्तावित नए पांच रिहायशी सेक्टरों का बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट इस समय किसानों की डिमांड कीमत पर अटकता नजर आ रहा है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने यहां सेक्टर-1, 2, 7, 8 और 9 के विस्तार के लिए 329 एकड़ जमीन खरीदने की योजना बनाई गई है लेकिन किसानों और विभाग के बीच रेट को लेकर अभी सहमति नहीं बन पा रही है। इसकी वजह से पूरे प्रोजेक्ट की रफ्तार धीमी हो गई है।
हालात ये हैं कि किसान अपनी जमीन के लिए 6 से 9 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक की मांग कर रहे हैं जबकि एचएसवीपी अधिकतम तीन करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक ही भुगतान करने को तैयार है। यही भारी अंतर इस समय सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आया है। इससे न तो जमीन की खरीद शुरू हो पा रही है और न ही विकास कार्य आगे बढ़ पा रहे हैं।
हालांकि एचएसवीपी की ओर से 30 अप्रैल तक ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से किसानों से जमीन बेचने का आग्रह किया गया है। एचएसवीपी अधिकारियों और किसानों के बीच अब तक कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। हर बार उम्मीद जताई गई कि कोई समाधान निकलेगा लेकिन हर बैठक में जमीन के रेट पर आकर मामला अटक जाता है। अधिकारियों द्वारा किसानों को योजना के दीर्घकालिक फायदे समझाए जा रहे हैं। जैसे क्षेत्र का विकास, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के अवसर लेकिन किसान फिलहाल केवल जमीन की वाजिब कीमत पर ही अड़े हुए हैं।
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किसानों का साफ संदेश: कम कीमत पर जमीन नहीं
घरौंडा क्षेत्र के कंट्रोल्ड एरिया में आने वाले गांवों के किसानों का कहना है कि घरौंडा तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है और आने वाले समय में जमीन के दाम और बढ़ेंगे। ऐसे में वे कम प्रस्तावित दरों पर वे जमीन बेचने को तैयार नहीं हैं। किसानों का तर्क है कि जब सरकार और प्राधिकरण इस जमीन पर बड़े स्तर पर रिहायशी सेक्टर विकसित कर भारी राजस्व अर्जित करेंगे तो जमीन मालिकों को भी उसका उचित लाभ मिलना चाहिए। कई किसानों ने तो यह भी साफ कर दिया है कि वे मजबूरी में नहीं, बल्कि मुनाफे के हिसाब से जमीन बेचेंगे।
एचएसवीपी का फोकस, पारदर्शी प्रक्रिया, लेकिन सीमित बजट-
दूसरी ओर एचएसवीपी इस पूरी प्रक्रिया को ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी और सरल बनाने में जुटा है। विभाग का दावा है कि यह मॉडल किसानों के हित में है क्योंकि इसमें बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो जाती है और किसान सीधे सरकार को अपनी जमीन बेच सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि जमीन खरीद प्रक्रिया ई-भूमि पोर्टल के तहत होगी। आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, किसी एजेंट या बिचौलिए की जरूरत नहीं पड़ेगी। रजिस्ट्री के समय ही भुगतान सीधे किसान के खाते में जमा होगा इसके बावजूद किसानों का कहना है कि सिस्टम अच्छा हो सकता है लेकिन रेट सही होना ज्यादा जरूरी है।
डेडलाइन नजदीक, लेकिन सहमति दूर-
एचएसवीपी अधिकारी भीम सिंह का कहना है कि ऐसे रेट फाइनल नहीं होते। पहले कंट्रोल्ड एरिया के अंदर आने वाली जमीन के मालिकों से बात की जाएगी। जो बेचने का इच्छुक है उनसे रेट पूछे जाएंगे। इसके बाद तहसील में आसपास की बेची गई जमीन की हालिया रजिस्टरी देखी जाएगी। जिससे जमीन के रेट का अंदाजा लग जाएगा। एचएसवीपी ने किसानों को 30 अप्रैल तक ई-भूमि पोर्टल पर आवेदन करने का मौका दिया है। विभाग लगातार अपील कर रहा है कि किसान इस अवसर का लाभ उठाएं। घरौंडा के ये प्रस्तावित सेक्टर शहर के भविष्य के विकास के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। इन सेक्टरों के विकसित होने से न केवल आवासीय सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी, बल्कि क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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करनाल। घरौंडा में प्रस्तावित नए पांच रिहायशी सेक्टरों का बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट इस समय किसानों की डिमांड कीमत पर अटकता नजर आ रहा है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने यहां सेक्टर-1, 2, 7, 8 और 9 के विस्तार के लिए 329 एकड़ जमीन खरीदने की योजना बनाई गई है लेकिन किसानों और विभाग के बीच रेट को लेकर अभी सहमति नहीं बन पा रही है। इसकी वजह से पूरे प्रोजेक्ट की रफ्तार धीमी हो गई है।
हालात ये हैं कि किसान अपनी जमीन के लिए 6 से 9 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक की मांग कर रहे हैं जबकि एचएसवीपी अधिकतम तीन करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक ही भुगतान करने को तैयार है। यही भारी अंतर इस समय सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आया है। इससे न तो जमीन की खरीद शुरू हो पा रही है और न ही विकास कार्य आगे बढ़ पा रहे हैं।
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हालांकि एचएसवीपी की ओर से 30 अप्रैल तक ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से किसानों से जमीन बेचने का आग्रह किया गया है। एचएसवीपी अधिकारियों और किसानों के बीच अब तक कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। हर बार उम्मीद जताई गई कि कोई समाधान निकलेगा लेकिन हर बैठक में जमीन के रेट पर आकर मामला अटक जाता है। अधिकारियों द्वारा किसानों को योजना के दीर्घकालिक फायदे समझाए जा रहे हैं। जैसे क्षेत्र का विकास, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के अवसर लेकिन किसान फिलहाल केवल जमीन की वाजिब कीमत पर ही अड़े हुए हैं।
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किसानों का साफ संदेश: कम कीमत पर जमीन नहीं
घरौंडा क्षेत्र के कंट्रोल्ड एरिया में आने वाले गांवों के किसानों का कहना है कि घरौंडा तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है और आने वाले समय में जमीन के दाम और बढ़ेंगे। ऐसे में वे कम प्रस्तावित दरों पर वे जमीन बेचने को तैयार नहीं हैं। किसानों का तर्क है कि जब सरकार और प्राधिकरण इस जमीन पर बड़े स्तर पर रिहायशी सेक्टर विकसित कर भारी राजस्व अर्जित करेंगे तो जमीन मालिकों को भी उसका उचित लाभ मिलना चाहिए। कई किसानों ने तो यह भी साफ कर दिया है कि वे मजबूरी में नहीं, बल्कि मुनाफे के हिसाब से जमीन बेचेंगे।
एचएसवीपी का फोकस, पारदर्शी प्रक्रिया, लेकिन सीमित बजट-
दूसरी ओर एचएसवीपी इस पूरी प्रक्रिया को ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी और सरल बनाने में जुटा है। विभाग का दावा है कि यह मॉडल किसानों के हित में है क्योंकि इसमें बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो जाती है और किसान सीधे सरकार को अपनी जमीन बेच सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि जमीन खरीद प्रक्रिया ई-भूमि पोर्टल के तहत होगी। आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, किसी एजेंट या बिचौलिए की जरूरत नहीं पड़ेगी। रजिस्ट्री के समय ही भुगतान सीधे किसान के खाते में जमा होगा इसके बावजूद किसानों का कहना है कि सिस्टम अच्छा हो सकता है लेकिन रेट सही होना ज्यादा जरूरी है।
डेडलाइन नजदीक, लेकिन सहमति दूर-
एचएसवीपी अधिकारी भीम सिंह का कहना है कि ऐसे रेट फाइनल नहीं होते। पहले कंट्रोल्ड एरिया के अंदर आने वाली जमीन के मालिकों से बात की जाएगी। जो बेचने का इच्छुक है उनसे रेट पूछे जाएंगे। इसके बाद तहसील में आसपास की बेची गई जमीन की हालिया रजिस्टरी देखी जाएगी। जिससे जमीन के रेट का अंदाजा लग जाएगा। एचएसवीपी ने किसानों को 30 अप्रैल तक ई-भूमि पोर्टल पर आवेदन करने का मौका दिया है। विभाग लगातार अपील कर रहा है कि किसान इस अवसर का लाभ उठाएं। घरौंडा के ये प्रस्तावित सेक्टर शहर के भविष्य के विकास के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। इन सेक्टरों के विकसित होने से न केवल आवासीय सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी, बल्कि क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।