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प्रेरणा: डॉक्टर के रूप में सेवा करते हुए डीएसपी बनी थीं राजश्री, अब हैं आईजी ट्रैफिक एवं हाईवे
Tue, 08 Mar 2022 05:38 PM IST
भूपेंद्र सिंह
गगन तलवार, अमर उजाला ब्यूरो, करनाल (हरियाणा)
गगन तलवार, अमर उजाला ब्यूरो, करनाल (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Tue, 08 Mar 2022 05:38 PM IST
सार
राजश्री को ब्रिटिश सेना के सिपाही रहे दादा के किस्सों ने पुलिस अफसर बनने के लिए प्रेरित किया था। परिवार से ही देश सेवा का जज्बा मिला। उनके दादा ब्रिटिश सेना में थे।
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डॉ. राजश्री सिंह
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चंडीगढ़ के सिविल अस्पताल में डॉक्टर के रूप में मानवता की सेवा करते-करते डॉ. राजश्री सिंह पहले प्रयास में ही 1990 में डीएसपी बनीं। इसके बाद आईपीएस में प्रोन्नत होकर कई जिलों में पुलिस अधीक्षक का कार्यभार संभाला और अब पांच साल से अपराध के अलावा यातायात एवं हाईवे आईजी के रूप में प्रदेश में सेवारत हैं। पुलिस के रूप में देश सेवा का जज्बा उन्हें अपने परिवार से ही मिला है। 2012 में भारतीय पुलिस सेवा में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रीय पुलिस पदक भी सम्मानित हो चुकी हैं।
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मूल रूप से हरियाणा के भिवानी के लुहारू के गांव की रहने वाली डॉ. राजश्री सिंह के दादा देवीराम ब्रिटिश सेना में जवान थे। वर्ल्ड वॉर में भी उनका कार्य उल्लेखनीय रहा तो सरकार की ओर से उन्हें कई पदक देकर सम्मानित किया गया। दादा की बहादुरी के किस्सों ने उन्हें पुलिस सेवा में आने के लिए प्रेरित किया।
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डॉ. राजश्री बताती हैं कि डॉक्टर के रूप में भी सेवा करते हुए उन्हें वो खुशी नहीं मिल रही थी जो एक जवान के रूप में सेवा करते हुए मिलती है। इसलिए पढ़ाई के साथ-साथ ही वे सिविल सेवा की तैयारी करती रही। 1990 में पहले ही प्रयास में डीएसपी बन गईं। 1999 में वे आईपीएस में प्रोन्नत हुईं। तीन बहनों में से मझली डॉ. राजश्री ही सिविल सेवा में आई है। उनकी बड़ी बहन का देहांत हो गया था और छोटी बहन मॉडल भी रही है।
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वर्तमान में उनके पति भी भारतीय सेना में अधिकारी हैं। कर्नल राजबीर सिंह वर्तमान में कारगिल में तैनात हैं। डॉ. राजश्री सिंह कहना है कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। बस एक बार ठान लें तो मेहनत के बल पर मुकाम तक जरूर पहुंचती हैं। अभिभावकों को अपने बच्चों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। वे पुलिस और नागरिक समाज के भीतर निरंतर सामाजिक प्रतिबद्धता को जागृत करने का कार्य कर रही हैं।
जिम्नास्टिक कप्तान रही और कविता संग्रह भी हो चुका प्रकाशित
मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मी डॉ. राजश्री सिंह ने का खेल और लेखन में भी अच्छी रुचि है। दिल्ली और भिवानी में स्कूल स्तर पर शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ जिम्नास्टिक टीम की लगातार छह साल तक कप्तान रहीं। चैंपियन बनने का भी गौरव प्राप्त हुआ। अफसर बनने के बाद भी पढ़ाई जारी रखी, मानवाधिकार विषय में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा एवं शरणार्थी नियम पर एक वर्षीय कोर्स और वकालत की पढ़ाई भी की। जीवन के अनुभव पर आधारित अध खिली धूप के नाम से उनका एक कविता संग्रह भी प्रकाशित हो चुका है।
सभी कोर्स करने वाली देश की पहली बटालियन की कमांडेंट रही
डीएसपी के रूप में रोहतक से पुलिस सेवा की शुरुआत करने वाली डॉ. राजश्री का कहना है कि उन्होंने लगभग सभी जिलों में अपनी सेवाएं दी हैं। अपने काम को ईमानदारी और बखूबी करना ही उपलब्धि मानती हैं। उन्होंने बताया कि आईआरबी की कमांडेंट रहते हुए अपनी बटालियन को सभी तरह के कोर्स कराए।
दो माह तक असम में रहकर जवानों को आर्मी अटैचमेंट, जंगल वॉर फेयर, असम राइफल्स और एंटी टेरिरेजम में नक्सलाइड इंसरजेंसी आदि का प्रशिक्षण दिलाया। एक्सीलेंट बटालियन का खिताब के साथ देश की पहली ऐसी बटालियन होने का गौरव भी मिला, जिसके जवानों को सभी तरह का प्रशिक्षण हासिल था।