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संस्कृति की सुरक्षा सबसे बड़ा दायित्व : आचार्य

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 07 Jun 2025 01:43 AM IST
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Protection of culture is the biggest responsibility: Acharya
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। सेक्टर 14 के श्रीकृष्ण मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में प्रवचन करते हुए गोदा विहार मंदिर के पीठाधीश्वर महंत स्वामी शाश्वत आचार्य ने कहा कि श्रीमद् भागवत के सतत स्वाध्याय और चिंतन-मनन से जीव के पाप और संचित प्रारब्ध कर्म विलीन हो जाते हैं और जीव मोक्ष को प्राप्त करता है।
उन्होंने कहा कि ऐसा श्रीमद् भागवत कथा के प्रसंगों में बार बार वर्णन आता है। चारों श्रुति ग्रंथ वेद, 18 पुराणों के भक्ति, ज्ञान वैराग्य और त्याग समाहित होने से इस महान ग्रंथ श्रीमद् भागवत महापुराण का इतना अधिक महत्व है कि आज सर्वसम्मति से इसे पंचम वेद माना गया है। उन्होंने कहा कि भक्त प्रह्लाद जी के जीवन पर पहले भी बहुत कुछ कहा गया है, परंतु इसके सार-तत्व पर जाना चाहिए और उनके अटूट अनन्य विश्वास और संस्कार के सिद्धांत को समझना चाहिए कि कैसे प्रह्लाद पैदा हुए और कैसे उन में इतनी अनन्य अटूट-भक्ति और ईश्वर-प्रेम जागृत हो पाया और इस प्रकार यदि व्यक्ति में अटूट आस्था और अपने तथा ईश्वर के प्रति विश्वास हो तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
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हमारी भारतीय संस्कृति बहुत ही व्यापक और समृद्ध है जिसका परिणाम है कि आज इस तथाकथित भूमंडलीकरण और पश्चिमी सभ्यताओं के प्रकोप में भी यह बहुत सीमा तक जीवित है। भारतीय संस्कृति और संस्कारों को जीवित रखने और फलने-फूलने की जिम्मेदारी मात्र धर्म प्रचारकों और गुरुओं आचार्यो की ही नहीं बल्कि यह सबकी सामूहिक भागीदारी एवं जिम्मेदारी है। आज आवश्यकता है सबको इस पर चिंतन मनन का। बदलते परिवर्तनशील परिवेश में अपनी संस्कृति की सुरक्षा का आज सबसे बड़ा सामाजिक दायित्व है।
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