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कटा बाग @ कीचड़ बाग : नगर निगम के अधिकारियों ने सीएम के आदेश भी किए कीचड़
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problem in katabaag in karnal
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नगर निगम के अधिकारी और जिले का प्रशासन कितना ढीठ हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कटा बाग के बुरे हालात को ठीक करने के सीएम के आदेश भी इनके लिए कोई मायने नहीं रखते। पहले तो प्रशासन ने सीएम को किसी भी सूरत में कटा बाग जाने से रोकने की साजिश की, लेकिन यहां पर वे फेल हो गए। हालात पर भड़के सीएम ने आदेश किए यहां पर सुधार शुरू होना चाहिए। निगम अधिकारियों ने आनन-फानन में हामी भी भर दी। निगम अधिकारियों ने आगामी 15 दिन में ही यहां पर चमत्कारिक विकास करने का दावा कर दिया, लेकिन सीएम को अपने अधिकारियों पर पूरा भरोसा है कि वे इतने दिनों में काम नहीं कर पाएंगे, ऐसे में उनको समय दिया एक माह।
रविवार के दिन मेरठ रोड स्थित कटा बाग के लोगों को उम्मीद थी कि सीएम के आदेश पर जरूर आज फिर निगम अधिकारी आएंगे और उनकी सुध लेंगे। दिनभर लोग ऐड़ियां उठाकर कर्मचारियों व अधिकारियों का इंतजार करते रहे। बातचीत में लोगों ने कहा चलो हम तो कीचड़ में थे ही, लेकिन ये अधिकारी तो सीएम के आदेशों को भी कीचड़ करने में लगे हैं।
लोग बोले, हमारे साथ किया फिल्मी मजाक
हालांकि, इससे पहले फिल्मी सीन जरूर तैयार किया गया। दस जेसीबी, 50 से ज्यादा सफाई कर्मचारी और कहीं पर ईंट तो कहीं पर बजरी डालकर ये दिखाने का प्रयास किया गया कि कटा बाग की सूरत बदलने वाली है। लेकिन रविवार की सुबह हुई तो लोगों के सामने वही कीचड़ वाली तस्वीर सामने थी। सुबह होते ही लोगों का सपना टूट गया। जितनी तेजी से प्रशासनिक अमला यहां पर सुधार करने आया था, उससे भी तेजी से वापस चला गया। हालांकि, सीएम ने निगम अधिकारियों को आदेश दिए थे कि आगामी एक माह में यहां के हालात सुधरने चाहिए। गंभीर बात ये कि इसके बावजूद नगर निगम ने कटा बाग को लेकर कोई प्लान तैयार नहीं किया। लोग बोले, ‘हमारे साथ फिल्मों जैसा मजाक हुआ है। सीएम के कार्यक्रम से पहले के तीन घंटे की गतिविधि पिछले छह साल के बराबर रही। सभी गलियों को बनाने के लिए ब्लॉक, रोड़ा, मिट्टी, मशीनरी और काम करने वाले पहुंचे गये। सीएम कार्यक्रम पूरा होने के बाद सब उसी हाल में छोड़कर चले गये। जाते वक्त जब उन्होेंने कर्मचारियों से काम के बारे में पूछा तो जवाब में कहा कि काम ऐसा थोड़ा होते हैं। सब अपने समय पर होंगे। उन्होंने कालोनी में ही सीएम निवास बनाने की गुहार लगाई।’
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कटा बाग में आने-जाने के तीन मुख्य रास्ते हैं। बीचों बीच एक मुख्य गली और छोटी-छोटी 12 और गलियाें में कुल 450 परिवार रहते हैं। इनमें करीब 2800 वोटर हैं। छह साल पहले पंचायत से निगम में शामिल किया गया था। रविवार को 70 घरों के दरवाजों पर नाली का गंदा पानी जमा था, 19 घरों में अंदर तक घुसा हुआ था। जिन्होेंने ईंटों को रखकर आने-जाने का रास्ता बनाया हुआ है। यही हाल मंदिर और स्कूल का है। हल्की सी बरसात होने पर स्थिति बहुत ज्यादा गंभीर हो जाती है।
चार महीने से चल रहा है सीवर डालने का काम
कटा बाग में पिछले चार महीने से सीवर डालने का काम चला हुआ है। सभी गलियों को उखाड़कर सीवर डाले जा रहे हैं। जहां पर काम पूरा हो गया, वहां की गलियों को ठीक नहीं किया गया। सभी गलियों में खुदाई का पड़े मलबा के कारण पानी की निकासी नहीं हो पा रही। पैदल चलना भी मुश्किल बना हुआ है।
खुद के घर में जाने का नहीं करता मन
राजपाल, रमेश, सुरेंद्र, मामचंद का कहना है कि उनके घरों में गंदा पानी घुसा हुआ है। हर समय बदबू आती है। बीमारी फैसले का भय बना हुआ है। उनका खुद के घर में जाने का मन नहीं करता।
स्कूल नहीं जा पाते बच्चे
कमला देवी का कहना है कि उनकी समस्या को जानने कोई नहीं आता। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। महिलाओं को मंदिर का रास्ता नहीं मिलता। खारिश की बीमारी क्षेत्र के लोगों को लग गई है।
चार महीने पहले उखाड़ी गलियां, आज तक ठीक नहीं कीं
प्रेम चंद ने बताया कि सीवर डालने के लिए चार महीने पहले ही सभी गलियों को उखाड़ दिया था। सीवर पाइप डालने के बाद गलियों के निर्माण को नहीं करवाया गया। लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। नई सड़क ना बनाओ कम से कम जो जैसी थी उसे वैसी ही कर दो। सीएम के आने से उम्मीद जगी थी, लेकिन ये उम्मीद भी सियासी ही निकली।
पानी की लाइन डली हुई है। सीवर पाइप डाली जा चुकी हैं। स्ट्रॉम वाटर के बाद पेवर ब्लॉक टाइल लगेंगी। सप्ताहभर का काम है। जल्द ही काम को पूरा करवा दिया जाएगा। जहां तक पानी निकासी की बात है, इसको लेकर शुगर मिल में कुछ जगह मिली है, जहां पर पंपिंग स्टेशन स्थापित किया जाना है। -धीरज कुमार, डीएमसी नगर निगम।
काम पूरा करवाने के आदेश दे दिये हैं। सामान कल ही पहुंचा दिया था। 15 दिनों से पहले ही काम पूरा करवा दिया जाएगा। इसको लेकर अलग-अलग अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। सबसे पहले पानी निकासी का कार्य किया जाएगा और इसके बाद सड़कों को बनाने का कार्य किया जाएगा। -रमन शर्मा, चीफ इंजीनियर।
जयभगवान कश्यप पार्षद से बातचीत
सवाल - कटा बाग के हालात इतने खराब क्यों है?
जवाब - निकासी मुख्य कारण है। समाधान के लिए यहां सीवर का काम चला हुआ है। काम पूरा होने तक समस्या रहेगी।
सवाल - सीएम जाने के बाद काम करने वाले भी चले गए, दूसरे दिन भी नहीं आए?
जवाब - मेरी इंजीनियर से बातचीत हुई है। बताया कि सोमवार से काम शुरू हो जाएगा। सीएम को अधिकारियों ने एक महीने में काम करने को कहा है।
सवाल - घरों के अंदर भी नालियों का पानी भरा हुआ है।
जवाब - स्कूल के पास बड़ा सीवर है, वहां से पाइपों के साथ प्लाट में पानी डाला जाता है।
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रविवार के दिन मेरठ रोड स्थित कटा बाग के लोगों को उम्मीद थी कि सीएम के आदेश पर जरूर आज फिर निगम अधिकारी आएंगे और उनकी सुध लेंगे। दिनभर लोग ऐड़ियां उठाकर कर्मचारियों व अधिकारियों का इंतजार करते रहे। बातचीत में लोगों ने कहा चलो हम तो कीचड़ में थे ही, लेकिन ये अधिकारी तो सीएम के आदेशों को भी कीचड़ करने में लगे हैं।
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लोग बोले, हमारे साथ किया फिल्मी मजाक
हालांकि, इससे पहले फिल्मी सीन जरूर तैयार किया गया। दस जेसीबी, 50 से ज्यादा सफाई कर्मचारी और कहीं पर ईंट तो कहीं पर बजरी डालकर ये दिखाने का प्रयास किया गया कि कटा बाग की सूरत बदलने वाली है। लेकिन रविवार की सुबह हुई तो लोगों के सामने वही कीचड़ वाली तस्वीर सामने थी। सुबह होते ही लोगों का सपना टूट गया। जितनी तेजी से प्रशासनिक अमला यहां पर सुधार करने आया था, उससे भी तेजी से वापस चला गया। हालांकि, सीएम ने निगम अधिकारियों को आदेश दिए थे कि आगामी एक माह में यहां के हालात सुधरने चाहिए। गंभीर बात ये कि इसके बावजूद नगर निगम ने कटा बाग को लेकर कोई प्लान तैयार नहीं किया। लोग बोले, ‘हमारे साथ फिल्मों जैसा मजाक हुआ है। सीएम के कार्यक्रम से पहले के तीन घंटे की गतिविधि पिछले छह साल के बराबर रही। सभी गलियों को बनाने के लिए ब्लॉक, रोड़ा, मिट्टी, मशीनरी और काम करने वाले पहुंचे गये। सीएम कार्यक्रम पूरा होने के बाद सब उसी हाल में छोड़कर चले गये। जाते वक्त जब उन्होेंने कर्मचारियों से काम के बारे में पूछा तो जवाब में कहा कि काम ऐसा थोड़ा होते हैं। सब अपने समय पर होंगे। उन्होंने कालोनी में ही सीएम निवास बनाने की गुहार लगाई।’
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कटा बाग में आने-जाने के तीन मुख्य रास्ते हैं। बीचों बीच एक मुख्य गली और छोटी-छोटी 12 और गलियाें में कुल 450 परिवार रहते हैं। इनमें करीब 2800 वोटर हैं। छह साल पहले पंचायत से निगम में शामिल किया गया था। रविवार को 70 घरों के दरवाजों पर नाली का गंदा पानी जमा था, 19 घरों में अंदर तक घुसा हुआ था। जिन्होेंने ईंटों को रखकर आने-जाने का रास्ता बनाया हुआ है। यही हाल मंदिर और स्कूल का है। हल्की सी बरसात होने पर स्थिति बहुत ज्यादा गंभीर हो जाती है।
चार महीने से चल रहा है सीवर डालने का काम
कटा बाग में पिछले चार महीने से सीवर डालने का काम चला हुआ है। सभी गलियों को उखाड़कर सीवर डाले जा रहे हैं। जहां पर काम पूरा हो गया, वहां की गलियों को ठीक नहीं किया गया। सभी गलियों में खुदाई का पड़े मलबा के कारण पानी की निकासी नहीं हो पा रही। पैदल चलना भी मुश्किल बना हुआ है।
खुद के घर में जाने का नहीं करता मन
राजपाल, रमेश, सुरेंद्र, मामचंद का कहना है कि उनके घरों में गंदा पानी घुसा हुआ है। हर समय बदबू आती है। बीमारी फैसले का भय बना हुआ है। उनका खुद के घर में जाने का मन नहीं करता।
स्कूल नहीं जा पाते बच्चे
कमला देवी का कहना है कि उनकी समस्या को जानने कोई नहीं आता। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। महिलाओं को मंदिर का रास्ता नहीं मिलता। खारिश की बीमारी क्षेत्र के लोगों को लग गई है।
चार महीने पहले उखाड़ी गलियां, आज तक ठीक नहीं कीं
प्रेम चंद ने बताया कि सीवर डालने के लिए चार महीने पहले ही सभी गलियों को उखाड़ दिया था। सीवर पाइप डालने के बाद गलियों के निर्माण को नहीं करवाया गया। लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। नई सड़क ना बनाओ कम से कम जो जैसी थी उसे वैसी ही कर दो। सीएम के आने से उम्मीद जगी थी, लेकिन ये उम्मीद भी सियासी ही निकली।
पानी की लाइन डली हुई है। सीवर पाइप डाली जा चुकी हैं। स्ट्रॉम वाटर के बाद पेवर ब्लॉक टाइल लगेंगी। सप्ताहभर का काम है। जल्द ही काम को पूरा करवा दिया जाएगा। जहां तक पानी निकासी की बात है, इसको लेकर शुगर मिल में कुछ जगह मिली है, जहां पर पंपिंग स्टेशन स्थापित किया जाना है। -धीरज कुमार, डीएमसी नगर निगम।
काम पूरा करवाने के आदेश दे दिये हैं। सामान कल ही पहुंचा दिया था। 15 दिनों से पहले ही काम पूरा करवा दिया जाएगा। इसको लेकर अलग-अलग अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। सबसे पहले पानी निकासी का कार्य किया जाएगा और इसके बाद सड़कों को बनाने का कार्य किया जाएगा। -रमन शर्मा, चीफ इंजीनियर।
जयभगवान कश्यप पार्षद से बातचीत
सवाल - कटा बाग के हालात इतने खराब क्यों है?
जवाब - निकासी मुख्य कारण है। समाधान के लिए यहां सीवर का काम चला हुआ है। काम पूरा होने तक समस्या रहेगी।
सवाल - सीएम जाने के बाद काम करने वाले भी चले गए, दूसरे दिन भी नहीं आए?
जवाब - मेरी इंजीनियर से बातचीत हुई है। बताया कि सोमवार से काम शुरू हो जाएगा। सीएम को अधिकारियों ने एक महीने में काम करने को कहा है।
सवाल - घरों के अंदर भी नालियों का पानी भरा हुआ है।
जवाब - स्कूल के पास बड़ा सीवर है, वहां से पाइपों के साथ प्लाट में पानी डाला जाता है।