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प्रगतिशील किसानों के सहारे पिछड़े किसानों को साधने की तैयारी में सरकार
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नये तीन कृषि कानूनों को लेकर किसानों में संशय को तोड़ने के लिए हरियाणा सरकार ने प्रगतिशील किसानों के सहारे पिछड़े किसानों को साधने की कोशिश की है। सरकार ने प्रगतिशील किसानों के लिए न केवल लाखों रुपये के इनाम की घोषणा की, बल्कि सीएम ने उनको सरकार का ब्रांड एंबेस्डर तक कह दिया। किसानों का जो संशय भाजपा नेता दूर नहीं कर पाये, अब ये प्रगतिशील किसानों के जिम्मे आ गया है। वहीं प्रगतिशील किसान मंच ने तीनों नये कानूनों का खुलकर समर्थन किया और दावा किया कि इससे किसानों का कोई नुकसान नहीं होगा।
रविवार को करनाल के डा. मंगल सेन सभागार में हुए प्रगतिशील किसान सम्मेलन कई मायनों में खास रहा। एक तो सीएम मनोहर लाल ने प्रगतिशील किसान सम्मान योजना लांच की, वहीं प्रगतिशील किसानों को रोल माडल की तरह पेश किया। साथ ही आह्वान किया कि अन्य किसान भी पारंपरिक खेती को छोड़कर आधुनिक व बागवानी आदि की खेती करें, ताकि उनकी आमदनी बढ़ सके। इस दौरान छह प्रगतिशील किसानों ने अपने-अपने अनुभव साझा किये। उन्होंने बताया कि किस प्रकार से वे बिना सरकार के एमएसपी के अच्छे दामों पर फसल बेच रहे हैं। सीएम मनोहर लाल ने एमएसपी पर साफ कहा कि हम तो चाहते हैं कि किसान एमएसपी से ऊंचे दामों पर फसल बेचें। किसानों को केवल एमएसपी पर आधारित नहीं रहना चाहिए। केवल सरकार के भरोसे रहना ठीक नहीं है, किसान को खुद भी मेहनत करनी होगी।
किसानों की दशा सुधारने की जिम्मेदारी प्रगतिशील किसानों के जिम्मे
कृषि विभाग और मार्केटिंग बोर्ड की ओर से आयोजित इस राज्यस्तरीय सम्मेलन में प्रदेश के अलग अलग जिलों से करीब 100 किसानों ने हिस्सा लिया। सरकार की ओर से इन प्रगतिशील किसानों को ही अन्य किसानों की दशा सुधारने के लिए जिम्मेदारी दी गई। एक प्रगतिशील किसान से कम से कम 10 किसानों को एडॉप्ट करने और करीब 100 किसानों को मित्र बनाने का आह्वान किया गया, ताकि पिछड़े और कर्ज में दबे किसान अर्थव्यवस्था और बाजार को समझ सकें। दूसरा प्रतियोगिता के तहत इनामों की बौछार करके भी सरकार नये तरीकों से की जानी वाली खेती के प्रति किसानों को आकर्षित करने की कोशिश में है।
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खुद की कहानी बताकर बयां की छोड़ रहे खेती की दास्तां
सीएम मनोहर लाल ने बताया कि उनकी कोशिश है कि खेती में युवाओं की रुचि को बढ़ाया जाए, इसके लिए सरकार कई स्तर पर प्रयास कर रही है और आने वाले दिनों कई योजनाएं लाई जाएंगी। अपना उदाहरण देते हुए सीएम ने बताया कि वे पांच भाई हैं और जमीन केवल दस एकड़ थी। पांच में से उनके समेत तीन भाई बाहर शहरों में चले गए और दो भाई गांव में रह गए। इसके बाद उनका छोटा भाई भी नौकरी में लग गया। ऐेसे में केवल एक भाई गांव में रह गया जो 10 एकड़ की खेती करता था, लेकिन 7 साल खेती के बाद उसने भी गांव छोड़ दिया और शहर में आ गये। खेती को ठेके पर दे दिया, लेकिन वो दौर दूसरा था, और अब दौर दूसरा है। सरकार किसानों के हित में कानून लाई है। छोटी जोतों को बड़ा करने और उनको अन्य काम देने पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
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रविवार को करनाल के डा. मंगल सेन सभागार में हुए प्रगतिशील किसान सम्मेलन कई मायनों में खास रहा। एक तो सीएम मनोहर लाल ने प्रगतिशील किसान सम्मान योजना लांच की, वहीं प्रगतिशील किसानों को रोल माडल की तरह पेश किया। साथ ही आह्वान किया कि अन्य किसान भी पारंपरिक खेती को छोड़कर आधुनिक व बागवानी आदि की खेती करें, ताकि उनकी आमदनी बढ़ सके। इस दौरान छह प्रगतिशील किसानों ने अपने-अपने अनुभव साझा किये। उन्होंने बताया कि किस प्रकार से वे बिना सरकार के एमएसपी के अच्छे दामों पर फसल बेच रहे हैं। सीएम मनोहर लाल ने एमएसपी पर साफ कहा कि हम तो चाहते हैं कि किसान एमएसपी से ऊंचे दामों पर फसल बेचें। किसानों को केवल एमएसपी पर आधारित नहीं रहना चाहिए। केवल सरकार के भरोसे रहना ठीक नहीं है, किसान को खुद भी मेहनत करनी होगी।
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किसानों की दशा सुधारने की जिम्मेदारी प्रगतिशील किसानों के जिम्मे
कृषि विभाग और मार्केटिंग बोर्ड की ओर से आयोजित इस राज्यस्तरीय सम्मेलन में प्रदेश के अलग अलग जिलों से करीब 100 किसानों ने हिस्सा लिया। सरकार की ओर से इन प्रगतिशील किसानों को ही अन्य किसानों की दशा सुधारने के लिए जिम्मेदारी दी गई। एक प्रगतिशील किसान से कम से कम 10 किसानों को एडॉप्ट करने और करीब 100 किसानों को मित्र बनाने का आह्वान किया गया, ताकि पिछड़े और कर्ज में दबे किसान अर्थव्यवस्था और बाजार को समझ सकें। दूसरा प्रतियोगिता के तहत इनामों की बौछार करके भी सरकार नये तरीकों से की जानी वाली खेती के प्रति किसानों को आकर्षित करने की कोशिश में है।
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खुद की कहानी बताकर बयां की छोड़ रहे खेती की दास्तां
सीएम मनोहर लाल ने बताया कि उनकी कोशिश है कि खेती में युवाओं की रुचि को बढ़ाया जाए, इसके लिए सरकार कई स्तर पर प्रयास कर रही है और आने वाले दिनों कई योजनाएं लाई जाएंगी। अपना उदाहरण देते हुए सीएम ने बताया कि वे पांच भाई हैं और जमीन केवल दस एकड़ थी। पांच में से उनके समेत तीन भाई बाहर शहरों में चले गए और दो भाई गांव में रह गए। इसके बाद उनका छोटा भाई भी नौकरी में लग गया। ऐेसे में केवल एक भाई गांव में रह गया जो 10 एकड़ की खेती करता था, लेकिन 7 साल खेती के बाद उसने भी गांव छोड़ दिया और शहर में आ गये। खेती को ठेके पर दे दिया, लेकिन वो दौर दूसरा था, और अब दौर दूसरा है। सरकार किसानों के हित में कानून लाई है। छोटी जोतों को बड़ा करने और उनको अन्य काम देने पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।