{"_id":"66d3b76eea298b5267018c06","slug":"poor-material-was-used-in-canal-construction-hence-cracks-appeared-in-the-slab-karnal-news-c-18-knl1008-464781-2024-09-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: नहर निर्माण में घटिया सामग्री का हुआ था प्रयोग तभी स्लैब में आ रही दरारें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: नहर निर्माण में घटिया सामग्री का हुआ था प्रयोग तभी स्लैब में आ रही दरारें
विज्ञापन
- 202 करोड़ रुपए किए थे खर्च, तत्कालीन अधिकारियों ने नहीं दिया ध्यान
राकेश चौहान
करनाल। पश्चिमी यमुना नहर का करीब ढाई साल पहले पुनर्निर्माण कराया गया। उस दौरान नहर को चौड़ा व स्लैब को मजबूत करने के लिए घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया, जिसका नतीजा अब सामने है। उस दौरान नहर पर 202 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।
नहर के पुनर्निर्माण का कार्य 2018 से 2021 तक चला था। तब अधिकारियों का भी दावा था कि नहर को चौड़ा किया जा रहा है और इसके किनारों व तटों को पहले से मजबूत किया जा रहा है ताकि नहर का पानी कटाव न कर सके। लेकिन अब हालात कुछ और हैं। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी ढाई साल बाद नहर की स्लैब में कटाव हो गया वो भी एक नहीं दो-दो जगह से।
कटाव भरने के लिए अधिकारी पांच दिनों से प्रयास कर रहे हैं। मिट्टी से लेकर पत्थर तक नहर के कटाव को भरने के लिए प्रयोग किए जा चुके हैं, अभी तक दोनों कटाव को अधिकारी भर नहीं पाए। नहर के स्लैब में इन दोनों कटाव से अलग कई जगह दरारें आ चुकी हैं। जिसमें भविष्य में उन दरारों में पानी जाने के कारण कटाव हो सकता है।
विज्ञापन
ऐसे में अधिकारियों की परेशानी बढ़ती जा रही है। इससे तत्कालीन अधिकारियों और एजेंसी की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों ने तब नहर के निर्माण की गंभीरता से जांच नहीं की। यदि उस दौरान ठेकेदार अच्छी गुणवत्ता की सामग्री का प्रयोग करता तो नहर की स्लैब नहीं टूटती और न ही दरारें आती। हालांकि अधिकारी दावा कर रहे हैं कि वह जल्द इन दोनों कटाव को भर देंगे लेकिन हालात अभी ऐसे हैं कि नहर के एक ही कटाव पर पत्थर लगाने का कार्य चल रहा है।
कम कराया पानी का बहाव
27 अगस्त को रेलवे ओवरब्रिज के समीप पश्चिमी यमुना नहर की स्लैब में कटाव हो गया था। जो करीब 100 फीट लंबा था। इसकी जानकारी मिलते ही विभाग के अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए थे और तुरंत कटाव भरने का कार्य शुरू कर दिया था। इसके बाद 28 अगस्त को नहर के दूसरी तरफ भी स्लैब में कटाव हो गया। अधिकारियों ने इन दोनों कटाव को भरने के लिए मिट्टी डाली व मिट्टी भरकर कट्टे लगाए लेकिन पानी का बहाव तेज होने के कारण वह पानी में ही बह गए। इसके बाद अधिकारियों ने नहर में पानी के बहाव को कम कराया। पहले नहर में 12 हजार क्यूसेक के करीब पानी बह रहा था। इसके बाद अब नहर में करीब तीन हजार क्यूसेक पानी बह रहा है।
कटाव के पीछे अधिकारियों के तर्क
कटाव को लेकर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नहर पार रेलवे पुल की चौड़ाई 120 फुट के करीब है और रेलवे पुल से आगे नहर की चौड़ाई करीब 200 फीट है। इस कारण यहां पानी तेज गति से बहता है और पानी की गति होने के कारण स्लैब में कटाव हो गया। लेकिन अधिकारी यह भूल गए हैं कि यह रेलवे पुल लंबे समय से है। यदि यह समस्या थी तो नहर के पूर्ण निर्माण के दौरान इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया।
नहर पर हुए कटाव को लगभग भर दिया गया है। एक-दो दिन का कार्य शेष है, पत्थर लगाए जा रहे हैं। नहर के पूर्व निर्माण का कार्य मेरे कार्यकाल से पहले हुआ है।
- रणवीर सिंह, एक्सईन, सिंचाई विभाग करनाल
विज्ञापन
राकेश चौहान
करनाल। पश्चिमी यमुना नहर का करीब ढाई साल पहले पुनर्निर्माण कराया गया। उस दौरान नहर को चौड़ा व स्लैब को मजबूत करने के लिए घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया, जिसका नतीजा अब सामने है। उस दौरान नहर पर 202 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।
नहर के पुनर्निर्माण का कार्य 2018 से 2021 तक चला था। तब अधिकारियों का भी दावा था कि नहर को चौड़ा किया जा रहा है और इसके किनारों व तटों को पहले से मजबूत किया जा रहा है ताकि नहर का पानी कटाव न कर सके। लेकिन अब हालात कुछ और हैं। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी ढाई साल बाद नहर की स्लैब में कटाव हो गया वो भी एक नहीं दो-दो जगह से।
विज्ञापन
कटाव भरने के लिए अधिकारी पांच दिनों से प्रयास कर रहे हैं। मिट्टी से लेकर पत्थर तक नहर के कटाव को भरने के लिए प्रयोग किए जा चुके हैं, अभी तक दोनों कटाव को अधिकारी भर नहीं पाए। नहर के स्लैब में इन दोनों कटाव से अलग कई जगह दरारें आ चुकी हैं। जिसमें भविष्य में उन दरारों में पानी जाने के कारण कटाव हो सकता है।
विज्ञापन
ऐसे में अधिकारियों की परेशानी बढ़ती जा रही है। इससे तत्कालीन अधिकारियों और एजेंसी की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों ने तब नहर के निर्माण की गंभीरता से जांच नहीं की। यदि उस दौरान ठेकेदार अच्छी गुणवत्ता की सामग्री का प्रयोग करता तो नहर की स्लैब नहीं टूटती और न ही दरारें आती। हालांकि अधिकारी दावा कर रहे हैं कि वह जल्द इन दोनों कटाव को भर देंगे लेकिन हालात अभी ऐसे हैं कि नहर के एक ही कटाव पर पत्थर लगाने का कार्य चल रहा है।
कम कराया पानी का बहाव
27 अगस्त को रेलवे ओवरब्रिज के समीप पश्चिमी यमुना नहर की स्लैब में कटाव हो गया था। जो करीब 100 फीट लंबा था। इसकी जानकारी मिलते ही विभाग के अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए थे और तुरंत कटाव भरने का कार्य शुरू कर दिया था। इसके बाद 28 अगस्त को नहर के दूसरी तरफ भी स्लैब में कटाव हो गया। अधिकारियों ने इन दोनों कटाव को भरने के लिए मिट्टी डाली व मिट्टी भरकर कट्टे लगाए लेकिन पानी का बहाव तेज होने के कारण वह पानी में ही बह गए। इसके बाद अधिकारियों ने नहर में पानी के बहाव को कम कराया। पहले नहर में 12 हजार क्यूसेक के करीब पानी बह रहा था। इसके बाद अब नहर में करीब तीन हजार क्यूसेक पानी बह रहा है।
कटाव के पीछे अधिकारियों के तर्क
कटाव को लेकर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नहर पार रेलवे पुल की चौड़ाई 120 फुट के करीब है और रेलवे पुल से आगे नहर की चौड़ाई करीब 200 फीट है। इस कारण यहां पानी तेज गति से बहता है और पानी की गति होने के कारण स्लैब में कटाव हो गया। लेकिन अधिकारी यह भूल गए हैं कि यह रेलवे पुल लंबे समय से है। यदि यह समस्या थी तो नहर के पूर्ण निर्माण के दौरान इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया।
नहर पर हुए कटाव को लगभग भर दिया गया है। एक-दो दिन का कार्य शेष है, पत्थर लगाए जा रहे हैं। नहर के पूर्व निर्माण का कार्य मेरे कार्यकाल से पहले हुआ है।
- रणवीर सिंह, एक्सईन, सिंचाई विभाग करनाल