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प्रदूषण ने घोटा दम : 150 से ज्यादा सांस रोगी पहुंचे अस्पताल, 20 को दी ऑक्सीजन

Fri, 02 Jan 2026 01:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Fri, 02 Jan 2026 01:56 AM IST
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Pollution suffocates: More than 150 respiratory patients reach hospital, 20 given oxygen
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। ठंड में जमे प्रदूषण ने हवा को और जहरीला बना दिया। साल के पहले दिन वायु गुणवत्ता सूचकांक सुबह 259 के स्तर पर पहुंच गया, जो शाम चार बजे तक 298 के करीब पहुंच गया। जबकि दो दिन पहले यह 200 से कम था। अचानक बढ़े प्रदूषण के स्तर से अस्थमा और सांस रोगियों की मुश्किलें बढ़ गईं। हालात ऐसे बने कि कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज और नागरिक अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या 150 के पार पहुंच गई। तो दोनों अस्पतालों में इमरजेंसी में भी वीरवार को 15 से 20 लोग ऑक्सीजन चढ़वाने पहुंचे।

मेडिकल कॉलेज से सांस श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव डागर ने बताया कि श्वास रोगियों का 30 बेड का वार्ड और आईसीयू वार्ड फुल हो चुका है। इमरजेंसी में जिन्हें ऑक्सीजन चाहिए उनकी संख्या अधिक बढ़ गई है। हर रोज आपातकालीन वार्ड में ऑक्सीजन चढ़वाने के लिए 50 से अधिक उम्र के लोग और 40 से 50 वर्ष के लोग पहुंच रहे हैं जिन्हें केवल दवाओं से काम नहीं चल रहा है और अधिक दिक्कत के चलते ऑक्सीजन चढ़वाने को मजबूर हैं। इसी तरह जिला नागरिक अस्पताल में भी वीरवार को 10 से 15 अस्थमा मरीज ऑक्सीजन चढ़वाने के लिए इमरजेंसी पहुंचे, जिनमें अधिकतर को सांस फूलने, सीने में जकड़न और खांसी की शिकायत थी।
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धुआं फेफड़ों को पहुंचाता है नुकसान
नागरिक अस्पताल से सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप ने कहा कि ठंड के मौसम में प्रदूषण के कण नीचे बैठ जाते हैं, ऐसे में धुआं लंबे समय तक हवा में बना रहता है और सीधे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। अस्थमा, सीओपीडी और बुजुर्ग मरीजों पर इसका असर ज्यादा देखा जा रहा है। सुबह-शाम कोहरा और स्मॉग की परत सांस की नलियों में सूजन बढ़ा रही है, जिससे ऑक्सीजन का स्तर गिरने लगता है। इसी कारण इमरजेंसी में ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत बढ़ी है।
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सुबह-शाम बाहर निकलने से बचें और ठंड से करें बचाव
इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज से श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव डागर ने श्वास रोगियों को सलाह दी है कि प्रदूषण के दिनों में मास्क का इस्तेमाल करें, सुबह-शाम बाहर निकलने से बचें, घर में धुआं या अगरबत्ती-धूप कम जलाएं और सांस की तकलीफ बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। साथ ही ठंड से बचाव करें।
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