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Karnal News: आबोहवा में घुला जहर, बिगड़ रही सेहत
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- पराली जलाने से बढ़ी समस्या, छाती व टीबी रोग विशेषज्ञों की ओपीडी में हुआ इजाफा
- मरीजों को बाहर न निकलने और नियमित दवा लेने की सलाह
- रोगी बढ़ने के साथ नागरिक अस्पताल में बढ़ी दवाओं की खपत
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। पराली जलाए जाने के कारण जिले की आबोहवा जहरीली होती जा रही है। सोमवार को जिले का एक्यूआई का स्तर 303 पर पहुंच गया। जिसका असर लोगों की सेहत पर पड़ने लगा है। जिससे अस्पतालों में सांस और इससे संबंधित समस्याएं लेकर रोगी पहुंच रहे हैं। नागरिक अस्पताल में टीबी की ओपीडी पर नजर डालें तो सितंबर माह की ओपीडी 1554 तक थी, लेकिन अक्तूबर में यह ओपीडी 2560 के पार जा चुकी है।
टीबी के मेडिकल ऑफिसर ट्रीटमेंट यूनिट (एमओटीयू) डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ गया है। इस कारण ओपीडी में आने वाले मरीजों को खासी, छाती में दर्द, सांस फूलने सहित गर्दन में दर्द की समस्याएं बढ़ने लगी हैं। टीबी विंग की फार्मासिस्ट कविता ने बताया कि प्रदूषण के कारण खांसी, दमा, अस्थमा व टीबी के मरीजों में पिछले 20 दिनों से भारी इजाफा देखने को मिल रहा है। जैसे-जैसे ओपीडी में मरीज बढ़ रहे हैं, वैसे ही दवाओं की खपत बढ़ रही है। उनके पास पिछले माह 20 हजार के लगभग डेरीफाइलिन की दवा की खपत हुई थी और अब यह आंकड़ा 30 हजार के आस-पास जा चुका है।
इन बीमारियों के बढ़ रहे मरीज
नागरिक अस्पताल के एमडी फिजिशियन डॉ. कुलबीर सिंह व डॉ. बीरेंद्र नाथ ने बताया कि ओपीडी में स्किन संबंधी समस्याएं, अस्थमा, सिरदर्द, खांसी, आंखों में जलन, गले का दर्द, निमोनिया, उल्टी व जुकाम के केस भी बढ़ रहे हैं। वे मरीजों को रोजाना गर्म पानी पीने की सलाह दे रहे हैं।
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प्रदूषण से ऐसे करें बचाव
मास्क पहनें, हाथ धोएं, स्वच्छ पानी पिएं, कपड़ों को रोजाना धोएं, भाप लें, प्राणायाम करें, विटामिन सी लें, बाहर के खाने से परहेज करें, बिना मास्क के बाहर न निकलें।
एक सप्ताह के एक्यूआई पर नजर
दिन एक्यूआई स्तर
सोमवार 266
मंगलवार 226
बुधवार 217
वीरवार 197
शुक्रवार 261
शनिवार 268
रविवार 278
सोमवार 303
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- मरीजों को बाहर न निकलने और नियमित दवा लेने की सलाह
- रोगी बढ़ने के साथ नागरिक अस्पताल में बढ़ी दवाओं की खपत
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। पराली जलाए जाने के कारण जिले की आबोहवा जहरीली होती जा रही है। सोमवार को जिले का एक्यूआई का स्तर 303 पर पहुंच गया। जिसका असर लोगों की सेहत पर पड़ने लगा है। जिससे अस्पतालों में सांस और इससे संबंधित समस्याएं लेकर रोगी पहुंच रहे हैं। नागरिक अस्पताल में टीबी की ओपीडी पर नजर डालें तो सितंबर माह की ओपीडी 1554 तक थी, लेकिन अक्तूबर में यह ओपीडी 2560 के पार जा चुकी है।
टीबी के मेडिकल ऑफिसर ट्रीटमेंट यूनिट (एमओटीयू) डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ गया है। इस कारण ओपीडी में आने वाले मरीजों को खासी, छाती में दर्द, सांस फूलने सहित गर्दन में दर्द की समस्याएं बढ़ने लगी हैं। टीबी विंग की फार्मासिस्ट कविता ने बताया कि प्रदूषण के कारण खांसी, दमा, अस्थमा व टीबी के मरीजों में पिछले 20 दिनों से भारी इजाफा देखने को मिल रहा है। जैसे-जैसे ओपीडी में मरीज बढ़ रहे हैं, वैसे ही दवाओं की खपत बढ़ रही है। उनके पास पिछले माह 20 हजार के लगभग डेरीफाइलिन की दवा की खपत हुई थी और अब यह आंकड़ा 30 हजार के आस-पास जा चुका है।
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इन बीमारियों के बढ़ रहे मरीज
नागरिक अस्पताल के एमडी फिजिशियन डॉ. कुलबीर सिंह व डॉ. बीरेंद्र नाथ ने बताया कि ओपीडी में स्किन संबंधी समस्याएं, अस्थमा, सिरदर्द, खांसी, आंखों में जलन, गले का दर्द, निमोनिया, उल्टी व जुकाम के केस भी बढ़ रहे हैं। वे मरीजों को रोजाना गर्म पानी पीने की सलाह दे रहे हैं।
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प्रदूषण से ऐसे करें बचाव
मास्क पहनें, हाथ धोएं, स्वच्छ पानी पिएं, कपड़ों को रोजाना धोएं, भाप लें, प्राणायाम करें, विटामिन सी लें, बाहर के खाने से परहेज करें, बिना मास्क के बाहर न निकलें।
एक सप्ताह के एक्यूआई पर नजर
दिन एक्यूआई स्तर
सोमवार 266
मंगलवार 226
बुधवार 217
वीरवार 197
शुक्रवार 261
शनिवार 268
रविवार 278
सोमवार 303