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करनाल: सिटी बसों की दुर्दशा, सीटें फटीं-शीशे टूटे, एसी खराब और स्टीयरिंग जाम
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गगन तलवार
करनाल। एक अच्छी परियोजना अधिकारियों की लापरवाही के कारण घाटे का सौदा बनती है, करनाल की शहरी बस सेवा इसका बड़ा उदाहरण है। परियोजना के तहत करीब 1.32 करोड़ रुपये से आई छह नई आधुनिक बसों की हालत इस वक्त ऐसी है कि रोडवेज की 10 साल पुरानी कंडम बस इनके समक्ष ठीक दिखती है।
तीन साल से खड़ी इन बसों की सीटें फट चुकी हैं, शीशे टूटे हैं, एसी खराब हैं और स्टार्ट न होने के कारण स्टीयरिंग व इंजन भी जाम की स्थिति में है। मार्च 2020 में लॉकडाउन के बाद बंद हुई इस बस सेवा को रोडवेज ने घाटे का सौदा बताकर इसके संचालन से हाथ खड़े कर दिए हैं।
ऐसे में तभी से रोडवेज की कर्मशाला में खड़ी बसें खस्ताहाल हो गई हैं। अब रोडवेज के बेड़े में बसों की घटती संख्या विभाग में इन बसों को शामिल करना मजबूरी बन गया है। इसके लिए अब रोडवेज को भी इन बसों को चलने लायक बनाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। इनकी हालत सुधारने में लाखों रुपये लगेंगे। इसके बाद शहरी बस सेवा में चलने वाली इन बसों का नाम बदलकर इन्हें रोडवेज के विभिन्न मार्गों पर चलाया जाएगा। इधर, शहर के लोगों की मांग इन्हें रोडवेज की बजाय दोबारा शहरी बस सेवा के रूप में शुरू करने की मांग है। ब्यूरो
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दो साल से पत्राचार, पैसों के कारण लटकी योजना
रोडवेज में बसों की कमी के कारण रोडवेज अधिकारियों की ओर से नगर निगम अधिकारियों के साथ पत्राचार करके इन बसों को रोडवेज में शामिल करने की मांग की जा रही थी। इसके लिए करीब दो साल से विभागों में पत्राचार हो रहा था। कभी पैसों के लेनदेन तो कभी बसों को विभाग को ट्रांसफर कराने के नाम पर बात नहीं बन पाई। अब इन बसों की आरसी रोडवेज के नाम करते हुए इन्हें डिपो में शामिल करने की योजना बनाई जा रही है।
बंद होने के पीछे नगर निगम इसलिए जिम्मेदार
जनवरी 2018 में शुरू हुई शहरी बस सेवा परियोजना की शुरुआत में तीन रूट तय किए गए थे। जिन पर तीन माह तक संचालन करने के बाद रूट सवारियों की संख्या के हिसाब से रिवाइज किए जाने थे। लेकिन मार्च 2020 तक किसी भी अधिकारी ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। ऐसे में ये परियोजना गलत मार्ग पर चलने के कारण घाटे का सौदा बनती गई। ऐसे में लॉकडाउन के बहाने बंद हुई परियोजना दोबारा शुरू नहीं हो पाई और लोग इससे होने वाली सुविधा से वंचित हो गए।
महंगे किराये से राहत के लिए शहरी बस सेवा की जरूरत
समाजसेवी प्रीतपाल सिंह पन्नू, एडवोकेट संदीप राणा और राजकुमार का कहना है कि लोगों को शहर में थोड़ी दूरी पर जाने के लिए भी ऑटो चालकों की मनमर्जी के अनुसार किराया देना पड़ता है। इस पर लगाम लगाने और जनता को राहत देने के लिए शहरी बस सेवा दोबारा शुरू होनी चाहिए। नगर निगम के अधिकारी इसके लिए रूट रिवाइज करें। रोडवेज के बेड़े में इन बसों के जाने से बसें खराब हालत से भले ही ठीक होंगी, लेकिन शहर के लोगों को मुख्यमंत्री की ओर से दी गई सौगात खत्म हो जाएगी।
वर्जन
बसों को ठीक कराने के लिए कंपनी में भेजा जा रहा है। सिटी बस सेवा की बसों की हालत काफी खराब है। रोडवेज के बेड़े में इन बसों के शामिल होने से कई बंद मार्ग व ग्रामीण मार्गों पर बस सेवा शुरू होगी। इन्हें ठीक कराने का पूरा खर्च रोडवेज की ओर से वहन किया जाएगा। फिलहाल बसों का बीमा कराया गया है।
- कुलदीप सिंह, जीएम रोडवेज
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करनाल। एक अच्छी परियोजना अधिकारियों की लापरवाही के कारण घाटे का सौदा बनती है, करनाल की शहरी बस सेवा इसका बड़ा उदाहरण है। परियोजना के तहत करीब 1.32 करोड़ रुपये से आई छह नई आधुनिक बसों की हालत इस वक्त ऐसी है कि रोडवेज की 10 साल पुरानी कंडम बस इनके समक्ष ठीक दिखती है।
तीन साल से खड़ी इन बसों की सीटें फट चुकी हैं, शीशे टूटे हैं, एसी खराब हैं और स्टार्ट न होने के कारण स्टीयरिंग व इंजन भी जाम की स्थिति में है। मार्च 2020 में लॉकडाउन के बाद बंद हुई इस बस सेवा को रोडवेज ने घाटे का सौदा बताकर इसके संचालन से हाथ खड़े कर दिए हैं।
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ऐसे में तभी से रोडवेज की कर्मशाला में खड़ी बसें खस्ताहाल हो गई हैं। अब रोडवेज के बेड़े में बसों की घटती संख्या विभाग में इन बसों को शामिल करना मजबूरी बन गया है। इसके लिए अब रोडवेज को भी इन बसों को चलने लायक बनाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। इनकी हालत सुधारने में लाखों रुपये लगेंगे। इसके बाद शहरी बस सेवा में चलने वाली इन बसों का नाम बदलकर इन्हें रोडवेज के विभिन्न मार्गों पर चलाया जाएगा। इधर, शहर के लोगों की मांग इन्हें रोडवेज की बजाय दोबारा शहरी बस सेवा के रूप में शुरू करने की मांग है। ब्यूरो
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दो साल से पत्राचार, पैसों के कारण लटकी योजना
रोडवेज में बसों की कमी के कारण रोडवेज अधिकारियों की ओर से नगर निगम अधिकारियों के साथ पत्राचार करके इन बसों को रोडवेज में शामिल करने की मांग की जा रही थी। इसके लिए करीब दो साल से विभागों में पत्राचार हो रहा था। कभी पैसों के लेनदेन तो कभी बसों को विभाग को ट्रांसफर कराने के नाम पर बात नहीं बन पाई। अब इन बसों की आरसी रोडवेज के नाम करते हुए इन्हें डिपो में शामिल करने की योजना बनाई जा रही है।
बंद होने के पीछे नगर निगम इसलिए जिम्मेदार
जनवरी 2018 में शुरू हुई शहरी बस सेवा परियोजना की शुरुआत में तीन रूट तय किए गए थे। जिन पर तीन माह तक संचालन करने के बाद रूट सवारियों की संख्या के हिसाब से रिवाइज किए जाने थे। लेकिन मार्च 2020 तक किसी भी अधिकारी ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। ऐसे में ये परियोजना गलत मार्ग पर चलने के कारण घाटे का सौदा बनती गई। ऐसे में लॉकडाउन के बहाने बंद हुई परियोजना दोबारा शुरू नहीं हो पाई और लोग इससे होने वाली सुविधा से वंचित हो गए।
महंगे किराये से राहत के लिए शहरी बस सेवा की जरूरत
समाजसेवी प्रीतपाल सिंह पन्नू, एडवोकेट संदीप राणा और राजकुमार का कहना है कि लोगों को शहर में थोड़ी दूरी पर जाने के लिए भी ऑटो चालकों की मनमर्जी के अनुसार किराया देना पड़ता है। इस पर लगाम लगाने और जनता को राहत देने के लिए शहरी बस सेवा दोबारा शुरू होनी चाहिए। नगर निगम के अधिकारी इसके लिए रूट रिवाइज करें। रोडवेज के बेड़े में इन बसों के जाने से बसें खराब हालत से भले ही ठीक होंगी, लेकिन शहर के लोगों को मुख्यमंत्री की ओर से दी गई सौगात खत्म हो जाएगी।
वर्जन
बसों को ठीक कराने के लिए कंपनी में भेजा जा रहा है। सिटी बस सेवा की बसों की हालत काफी खराब है। रोडवेज के बेड़े में इन बसों के शामिल होने से कई बंद मार्ग व ग्रामीण मार्गों पर बस सेवा शुरू होगी। इन्हें ठीक कराने का पूरा खर्च रोडवेज की ओर से वहन किया जाएगा। फिलहाल बसों का बीमा कराया गया है।
- कुलदीप सिंह, जीएम रोडवेज