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जनता ने जमा कराये 41 लाख टैक्स, विभागों पर 80 करोड़ बकाया
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
Updated Mon, 05 Dec 2016 12:35 AM IST
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जनता ने जमा कराये 41 लाख टैक्स, विभागों पर 80 करोड़ बकाया
- फोटो : Amar Ujala
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गत आठ नवंबर से शुरू हुई 500 और 1000 रुपये के बंद होने के बाद से करनाल शहरवासियों ने करीब 41 लाख रुपये प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में जमा कराया है। अब निगम का टैक्स वसूली आंकड़ा सवा सात करोड़ रुपये को पार कर रहा है। हालांकि, आज भी निगम का टैक्स वसूली खाता सरकारी विभागों ने बिगाड़ रखा है।
शहर के दर्जनों सरकारी विभागों पर नगर निगम का करीब 80 करोड़ रुपये बकाया है। नोटिस देने के बाद भी ये विभाग नहीं जाग रहे हैं। अब नोटबंदी के बाद भी किसी भी सरकार विभाग ने निगम में एक रुपया तक टैक्स के रूप में जमा नहीं कराया है। खास बात यह कि निगम का यह टैक्स जिले के आला अधिकारियों के घर से लेकर दफ्तरों तक का है। टैक्स वसूली को लेकर निगम पर नई रणनीति बनाने पर विचार कर रहा है। निगम के आंकड़ों के अनुसार, सरकारी कार्यालयों और घरों पर निगम का 79 करोड़ 49 लाख रुपये बकाया है। वर्षों से फंसे पड़े इस टैक्स को निकालने के लिए नगर निगम की ओर से कई बार प्रयास किए गए।
बाद में नोटिस पर नोटिस भी भेज गए, पर किसी भी सरकारी कार्यालय ने नोटिस का जवाब तक देना मुनासिब नहीं समझा, टैक्स जमा कराने को दूर की बात है। सवाल यह है कि प्रदेश सरकार एक तरफ तो लोगों से टैक्स जमा कराने आह्वान कर रही है, वहीं उसकी के सरकारी विभाग निगम का टैक्स नहीं दे रहे हैं। इस बारे में नगर निगम में टैक्स ब्रांच के अधीक्षक हरफूल सिंह ने बताया कि नोटबंदी के बाद आम जनता ने 41 लाख रुपये टैक्स के रूप में जमा कराए हैं, जबकि सरकारी विभागों की तरफ से कोई पैसा नहीं कराया गया है। सभी को कई कई बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं, यदि सरकारी विभागों का 80 करोड़ रुपये निगम को मिल जाए निगम के खाते में भारी राशि आ सकती है।
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ये विभाग हैं देनदार
बकायादार विभागों में डीसी कार्यालय से लेकर जेल तक शामिल हैं। इसके साथ ही एनडीआरआई समेत आईसीएआर के संस्थान, एफसीआई, सिंचाई विभाग, पब्लिक हेल्थ, एएचपी मधुबन, वक्फ बोर्ड, कर्ण स्टेडियम, रेड क्रास, हैफेड, सेंट्रल वेयर हाउस, एआईटीसी, बिजली निगम, पीडब्ल्यूडी, कोऑपरेटिव बैंक, शुगर मिल, जिला परिषद, बीडीपीओ, हुडा समेत कई अन्य विभाग हैं, जिन पर निगम के करोड़ों से लेकर लाखों रुपये बकाया हैं।
ये हैं करोड़ों के देनदार
विभाग : राशि
एनडीआरआई : 346333217
एचएपी मधुबन : 14,14 93770
एग्रीकल्चर विवि : 5, 1468750
शुगर मिल : 2,2263950
जेल : 1, 6186907
बिजली निगम : 15,489527
लाखों वालों की कमी नहीं
जिला परिषद : 11,32585
को-बैंक : 38,19334
सिंचाई विभाग : 5903153
सिंचाई विभाग रेस्ट हाउस : 2443050
बीडीपीओ ऑफिस : 256932
पीडब्ल्यूडी रेसिडेंस : 1890603
पीडब्ल्यूडी माल रोड : 315702
माल रोड : 227941
डीसी आफिस : 2335993
रोडवेज : 1117203
पुलिस स्टेशन : 370206
कर्ण स्टेडियम : 4361103
एफसीआई : 5421481
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शहर के दर्जनों सरकारी विभागों पर नगर निगम का करीब 80 करोड़ रुपये बकाया है। नोटिस देने के बाद भी ये विभाग नहीं जाग रहे हैं। अब नोटबंदी के बाद भी किसी भी सरकार विभाग ने निगम में एक रुपया तक टैक्स के रूप में जमा नहीं कराया है। खास बात यह कि निगम का यह टैक्स जिले के आला अधिकारियों के घर से लेकर दफ्तरों तक का है। टैक्स वसूली को लेकर निगम पर नई रणनीति बनाने पर विचार कर रहा है। निगम के आंकड़ों के अनुसार, सरकारी कार्यालयों और घरों पर निगम का 79 करोड़ 49 लाख रुपये बकाया है। वर्षों से फंसे पड़े इस टैक्स को निकालने के लिए नगर निगम की ओर से कई बार प्रयास किए गए।
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बाद में नोटिस पर नोटिस भी भेज गए, पर किसी भी सरकारी कार्यालय ने नोटिस का जवाब तक देना मुनासिब नहीं समझा, टैक्स जमा कराने को दूर की बात है। सवाल यह है कि प्रदेश सरकार एक तरफ तो लोगों से टैक्स जमा कराने आह्वान कर रही है, वहीं उसकी के सरकारी विभाग निगम का टैक्स नहीं दे रहे हैं। इस बारे में नगर निगम में टैक्स ब्रांच के अधीक्षक हरफूल सिंह ने बताया कि नोटबंदी के बाद आम जनता ने 41 लाख रुपये टैक्स के रूप में जमा कराए हैं, जबकि सरकारी विभागों की तरफ से कोई पैसा नहीं कराया गया है। सभी को कई कई बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं, यदि सरकारी विभागों का 80 करोड़ रुपये निगम को मिल जाए निगम के खाते में भारी राशि आ सकती है।
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ये विभाग हैं देनदार
बकायादार विभागों में डीसी कार्यालय से लेकर जेल तक शामिल हैं। इसके साथ ही एनडीआरआई समेत आईसीएआर के संस्थान, एफसीआई, सिंचाई विभाग, पब्लिक हेल्थ, एएचपी मधुबन, वक्फ बोर्ड, कर्ण स्टेडियम, रेड क्रास, हैफेड, सेंट्रल वेयर हाउस, एआईटीसी, बिजली निगम, पीडब्ल्यूडी, कोऑपरेटिव बैंक, शुगर मिल, जिला परिषद, बीडीपीओ, हुडा समेत कई अन्य विभाग हैं, जिन पर निगम के करोड़ों से लेकर लाखों रुपये बकाया हैं।
ये हैं करोड़ों के देनदार
विभाग : राशि
एनडीआरआई : 346333217
एचएपी मधुबन : 14,14 93770
एग्रीकल्चर विवि : 5, 1468750
शुगर मिल : 2,2263950
जेल : 1, 6186907
बिजली निगम : 15,489527
लाखों वालों की कमी नहीं
जिला परिषद : 11,32585
को-बैंक : 38,19334
सिंचाई विभाग : 5903153
सिंचाई विभाग रेस्ट हाउस : 2443050
बीडीपीओ ऑफिस : 256932
पीडब्ल्यूडी रेसिडेंस : 1890603
पीडब्ल्यूडी माल रोड : 315702
माल रोड : 227941
डीसी आफिस : 2335993
रोडवेज : 1117203
पुलिस स्टेशन : 370206
कर्ण स्टेडियम : 4361103
एफसीआई : 5421481