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Karnal News: समुद्री भाड़ा 600 से 3000 डॉलर बिगड़ा चावल निर्यात का गणित

Sun, 05 Apr 2026 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Sun, 05 Apr 2026 01:40 AM IST
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Ocean freight rates of $600 to $3000 have ruined the rice export equation.
सुमित गर्ग
नरेंद्र पंडित
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कैथल। अंतरराष्ट्रीय हालात के चलते समुद्री भाड़े में भारी वृद्धि ने चावल निर्यात के गणित को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। एक माह से ईरान और इराक को निर्यात बंद है, जबकि यमन और सऊदी अरब जैसे देशों के लिए ट्रांसपोर्ट रेट में पांच गुना तक बढ़ोतरी कर दी गई है। वहीं दुबई में कुछ माल उतारकर वहीं बेचा भी गया।

पहले एक कंटेनर का समुद्री भाड़ा करीब 600 डॉलर था, जो अब बढ़कर 3000 डॉलर तक पहुंच गया है। ट्रांसपोर्टर युद्ध के जोखिम और बदले हुए समुद्री मार्गों का हवाला देकर यह बढ़ा हुआ किराया वसूल रहे हैं। ऐसे में निर्यात करना व्यापारियों के लिए घाटे का सौदा बन गया है।
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स्थिति यह है कि हजारों टन चावल देश के विभिन्न बंदरगाहों पर ही अटका हुआ है। अकेले कैथल का ही करीब 32 करोड़ रुपये का चावल पिछले एक माह से बंदरगाहों पर पड़ा है। यदि यह स्थिति बनी रहती है तो इसका असर आगामी धान सीजन पर भी पड़ सकता है।
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जिले में करीब 250 राइस मिल संचालित हैं, जिनमें पीडीएस और निर्यात से जुड़े मिलर्स शामिल हैं। स्टॉक जमा होने और कैश फ्लो रुकने से मिलर्स के सामने नई फसल की खरीद एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

चावल निर्यातक नरेंद्र मिगलानी ने बताया कि संकट के बीच कुछ निर्यातकों ने वैकल्पिक रास्ता अपनाया। जिन जहाजों का मार्ग बदला गया, उनका माल दुबई जैसे सुरक्षित बंदरगाहों पर उतारकर वहीं बेच दिया गया। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में केंद्र सरकार ने भी आर्थिक और प्रशासनिक स्तर पर सहयोग दिया, ताकि व्यापारियों के माल को नुकसान से बचाया जा सके। इसके बावजूद बढ़े हुए समुद्री किराए के कारण काफी माल अब भी बंदरगाहों पर फंसा हुआ है। संवाद


ईरान और इराक में निर्यात पूरी तरह बंद : सुिमत
सन फूड ओवरसीज के संचालक सुमित गर्ग के अनुसार, यमन और सऊदी अरब के लिए बढ़े हुए भाड़े पर माल भेजना संभव नहीं है। वहीं, ईरान और इराक, जो भारतीय बासमती के बड़े खरीदार हैं, में निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है। युद्ध के चलते जहाजों ने इन देशों की ओर जाना बंद कर दिया है, जिससे करोड़ों रुपये के ऑर्डर अधर में लटक गए हैं। उन्होंने बताया कि कैथल में सालाना लगभग 10 लाख मीट्रिक टन चावल का उत्पादन होता है, जिसमें से 6 से 7 लाख टन चावल विदेशों में निर्यात किया जाता है।
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